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जनसुराज के डिजिटल मैनेजर देवपालिक गुप्ता की संदिग्ध मौत, परिजनों ने की CBI जांच की मांग

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जनसुराज के डिजिटल मैनेजर देवपालिक गुप्ता की संदिग्ध मौत, परिजनों ने की CBI जांच की मांग

सारांश

31 वर्षीय देवपालिक गुप्ता जनशताब्दी एक्सप्रेस में खाना लेने गए और लौटे ही नहीं — अगले दिन शव रेलखंड में मिला। परिजन CBI जांच माँग रहे हैं, पार्टी ने 36 घंटे में कोई संपर्क नहीं किया, और FIR में 6 घंटे की देरी सवालों के घेरे में है।

मुख्य बातें

देवपालिक गुप्ता ( 31 वर्ष ), जनसुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर, 26 अक्टूबर को जनशताब्दी एक्सप्रेस में रांची से पटना यात्रा के दौरान लापता हुए।
शव 27 अक्टूबर को रांची-मुरी रेलखंड में जोन्हा के निकट झाड़ियों से बरामद हुआ।
परिजनों ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग की; घटना के 36 घंटे बाद भी प्रशांत किशोर या पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता का परिवार से कोई संपर्क नहीं।
सहकर्मियों के अनुसार बोकारो और मुरी में क्षेत्राधिकार विवाद के कारण FIR दर्ज होने में करीब 6 घंटे की देरी हुई।
पुलिस अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट , फॉरेंसिक साक्ष्य और मोबाइल के तकनीकी रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

जनसुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर देवपालिक गुप्ता (31 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 26 अक्टूबर 2026 को रांची से पटना जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस में सफर के दौरान वे अचानक लापता हो गए थे, और 27 अक्टूबर को उनका शव रांची-मुरी रेलखंड में जोन्हा के निकट झाड़ियों से बरामद हुआ। मृतक चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज में डिजिटल टीम का अहम हिस्सा थे।

घटनाक्रम: ट्रेन से लापता होने की पूरी कहानी

देवपालिक के सहकर्मियों के अनुसार, 26 अक्टूबर को दोपहर करीब 2:25 बजे ट्रेन रांची स्टेशन से रवाना हुई थी। देवपालिक सी-2 कोच की सीट नंबर 50 पर बैठे थे। ट्रेन खुलने के करीब 10 मिनट बाद वे पेंट्री कार से खाना लाने की बात कहकर उठे — और फिर वापस नहीं लौटे। सहकर्मियों ने बोगियों में खोजबीन की और मोबाइल पर बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला। इसके बाद रेल पुलिस को सूचना दी गई।

अगले दिन, 27 अक्टूबर को अनगड़ा थाना क्षेत्र के जारवाडीह के पास रेलवे लाइन के किनारे देवपालिक का शव बरामद हुआ। रांची के रिम्स में बुधवार दोपहर पोस्टमार्टम के बाद परिजन पार्थिव शरीर लेकर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर स्थित पैतृक गांव रवाना हुए।

परिजनों की मांग: CBI करे जांच

सूचना मिलते ही रांची पहुंचे देवपालिक के बड़े भाई, मित्रों और परिवारजनों ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। परिजनों ने यह भी जताया कि घटना के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर या पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता ने परिवार से फोन पर भी संपर्क नहीं किया — इस पर उन्होंने गहरा दुख और नाराज़गी व्यक्त की।

अनुत्तरित सवाल: पुलिस के सामने बड़ी चुनौती

पुलिस की शुरुआती जांच में चलती ट्रेन से गिरने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन कई बुनियादी सवाल अब तक अनुत्तरित हैं। देवपालिक कैसे गिरे? किसी यात्री या रेलकर्मी ने उन्हें गिरते हुए क्यों नहीं देखा? उनका मोबाइल अचानक बंद कैसे हुआ? लापता होने की सूचना के बाद तलाशी में देरी क्यों हुई? शव मिलने के स्थान और ट्रेन के रूट के बीच का संबंध क्या है?

देवपालिक के सहकर्मियों ने आरोप लगाया है कि बोकारो और मुरी में रेलवे पुलिस के बीच क्षेत्राधिकार की खींचतान के कारण एफआईआर दर्ज होने में करीब छह घंटे का समय बर्बाद हुआ। इस देरी को लेकर भी परिजन सवाल उठा रहे हैं।

जांच की दिशा: फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्य

फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के फॉरेंसिक साक्ष्यों, देवपालिक के साथ यात्रा कर रहे सहकर्मियों के बयान तथा उनके मोबाइल के तकनीकी रिकॉर्ड — जिसमें अंतिम लोकेशन और कॉल डेटा शामिल हैं — की जांच में जुटी है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में जनसुराज पार्टी राजनीतिक रूप से सक्रिय है और पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली पर भी ध्यान खिंचा है।

गौरतलब है कि यह मामला तब तक अनिर्णीत है जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के नतीजे सामने नहीं आते। जांच की दिशा और मृत्यु की परिस्थितियाँ स्पष्ट होने पर ही यह तय हो पाएगा कि यह दुर्घटना थी, या कुछ और।

संपादकीय दृष्टिकोण

और 36 घंटे बाद भी पार्टी नेतृत्व परिवार से संपर्क नहीं करता — यह चूक नहीं, बेरुखी है। रेलवे पुलिस के बीच क्षेत्राधिकार की खींचतान के चलते 6 घंटे FIR में बर्बाद होना दर्शाता है कि संस्थागत प्रतिक्रिया में वह तत्परता नहीं है जो ऐसे मामलों में होनी चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज 'गिरने की आशंका' पर रुक जाती है, लेकिन मोबाइल का अचानक बंद होना, किसी प्रत्यक्षदर्शी का न होना और शव की बरामदगी की लोकेशन — ये तीनों मिलकर ऐसे सवाल बनाते हैं जिनका जवाब सिर्फ निष्पक्ष, स्वतंत्र जांच ही दे सकती है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवपालिक गुप्ता कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
देवपालिक गुप्ता (31 वर्ष) प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर थे। 26 अक्टूबर 2026 को रांची से पटना जा रही जनशताब्दी एक्सप्रेस में वे पेंट्री कार की ओर गए और वापस नहीं लौटे; अगले दिन उनका शव रांची-मुरी रेलखंड में बरामद हुआ।
परिजनों ने CBI जांच की मांग क्यों की?
परिजनों का कहना है कि मौत की परिस्थितियाँ संदिग्ध हैं — मोबाइल का अचानक बंद होना, किसी प्रत्यक्षदर्शी का न होना और FIR में 6 घंटे की देरी उन्हें संतुष्ट नहीं करती। इसके अलावा, घटना के 36 घंटे बाद भी पार्टी नेतृत्व ने परिवार से कोई संपर्क नहीं किया, जिससे उनका अविश्वास और गहरा हुआ।
FIR दर्ज होने में 6 घंटे की देरी क्यों हुई?
सहकर्मियों के अनुसार बोकारो और मुरी की रेलवे पुलिस के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर खींचतान हुई, जिसके चलते FIR दर्ज होने में करीब 6 घंटे लग गए। यह देरी परिजनों और सहकर्मियों के लिए बड़ी आपत्ति का विषय बनी हुई है।
पुलिस अभी जांच में क्या देख रही है?
पुलिस फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल के फॉरेंसिक साक्ष्य, सहयात्री सहकर्मियों के बयान और देवपालिक के मोबाइल के तकनीकी रिकॉर्ड — जिसमें अंतिम लोकेशन और कॉल डेटा शामिल हैं — की जांच कर रही है। शुरुआती आशंका चलती ट्रेन से गिरने की है।
जनसुराज पार्टी और प्रशांत किशोर ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी?
परिजनों के अनुसार घटना के 36 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर या पार्टी के किसी वरिष्ठ नेता ने परिवार से फोन पर भी संपर्क नहीं किया। इस चुप्पी पर परिवारजनों ने गहरी नाराज़गी जताई है।
राष्ट्र प्रेस
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