हन्नान मोल्लाह का दावा: पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वालों में 99% हिंदू, भगोड़े कारोबारियों में एक भी मुस्लिम नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने 14 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए कई विवादास्पद दावे किए। मोल्लाह ने कहा कि पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़े गए 30-40 लोगों में से 99 फीसदी हिंदू हैं, और देश का पैसा लूटकर विदेश भागने वाले 50 लोगों में एक भी मुसलमान नहीं है।
मुख्य बयान और दावे
मोल्लाह ने अपने संबोधन में कहा, 'यह तो आरएसएस और भाजपा का स्टैंडर्ड कंप्लेन है। मुस्लिम जहाँ रहते हैं — स्कूल, मस्जिद, शादी और व्यापार — वहाँ वो आतंकवादी हैं। इसके अलावा आरएसएस सोच नहीं सकती।' उन्होंने यह भी कहा कि लगभग 100 वर्ष पहले आरएसएस की स्थापना के समय ऐलान किया गया था कि हिंदुओं के तीन दुश्मनों में नंबर एक मुसलमान है।
उन्होंने आगे दावा किया, 'हिंदुस्तान को लूटकर 50 लोग देश छोड़कर भाग गए, करोड़ों रुपये लेकर भागे — उनमें भी एक भी मुसलमान नहीं है, वो सभी गुजराती और हिंदू हैं।' यह ध्यान देने योग्य है कि ये दावे मोल्लाह के अपने हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
आरएसएस पर निशाना
मोल्लाह ने कहा कि एक सदी बीत जाने के बावजूद आरएसएस अपनी सोच से पीछे नहीं हटी है। उनके अनुसार, 'जहाँ भी मौका मिलेगा, मुसलमान है तो उग्रवादी है' — यही आरएसएस की दृष्टि रही है। उन्होंने इसे 'मानसिक बीमारी' करार दिया और कहा कि जो देखना नहीं चाहते उन्हें जबरदस्ती नहीं दिखाया जा सकता।
भारत-पाकिस्तान संबंध और खेल पर टिप्पणी
पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार की हालिया खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए मोल्लाह ने कहा कि भारत-पाकिस्तान संबंधों में 'हॉट एंड कोल्ड' रवैया कोई नई बात नहीं है। उन्होंने इसे सामान्य कूटनीतिक उतार-चढ़ाव बताया।
भारत-अफगानिस्तान क्रिकेट मैच में वंदे मातरम गाए जाने के विवाद पर मोल्लाह ने कहा कि जब किसी गीत को राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया गया हो तो उसके बजाए जाने पर खड़ा होना उचित है — यह न्यायालय भी कह चुका है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उसी भाषा में गाना अनिवार्य नहीं है और लोग स्वाभाविक रूप से राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करते हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में अल्पसंख्यक अधिकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। गौरतलब है कि यह मोल्लाह जैसे वामपंथी नेताओं की ओर से आरएसएस और भाजपा पर इस तरह के सीधे हमले की परिपाटी रही है, लेकिन जासूसी और आर्थिक पलायन पर इस पैमाने के दावे कम ही सुनाई देते हैं।
भाजपा और आरएसएस की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह के तीखे बयान विपक्षी दलों की चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।