15 अगस्त 2026
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हन्नान मोल्लाह का BJP-RSS पर हमला: युद्धविराम पर मोदी की चुप्पी सवालों के घेरे में

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हन्नान मोल्लाह का BJP-RSS पर हमला: युद्धविराम पर मोदी की चुप्पी सवालों के घेरे में

सारांश

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने एक साथ कई मोर्चों पर सरकार को घेरा — युद्धविराम पर मोदी की चुप्पी, ऑपरेशन सिंदूर में पारदर्शिता की कमी, और RSS की 'एकरूपता' की राजनीति पर। उनका केंद्रीय तर्क: भारत की बहुलतावादी परंपरा ही उसकी असली ताकत है।

मुख्य बातें

हन्नान मोल्लाह ने 14 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, BJP और RSS पर तीखा हमला बोला।
पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ के युद्धविराम में ट्रंप की भूमिका के दावे पर PM मोदी की चुप्पी को सवालों के घेरे में रखा।
ऑपरेशन सिंदूर में सैनिकों के हताहतों की जानकारी सार्वजनिक न करने पर सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
भारतीय धार्मिक परंपरा की विविधता को RSS की 'एकरूपता' की नीति के विपरीत बताया।
प्रियांक खड़गे के 'हर घर तिरंगा' पर उठाए सवाल को उचित बताते हुए RSS के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता हन्नान मोल्लाह ने 14 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा हमला बोला। भारत-पाकिस्तान युद्धविराम को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्धविराम का श्रेय दिया, मोल्लाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए।

युद्धविराम और मोदी की चुप्पी

मोल्लाह ने कहा कि ट्रंप इस तरह के दावे लगातार करते रहे हैं और अब पाकिस्तान की ओर से भी यही बात दोहराई जा रही है। उनके अनुसार, जब इतने पक्षों से यह बात सामने आ रही है, तो प्रधानमंत्री को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'लंबे समय तक चुप रहने से लोगों को अलग-अलग अर्थ निकालने का मौका मिलता है।'

मोल्लाह ने यह भी आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ सरकार ने स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं कीं। उनका दावा है कि इस दौरान भारतीय सैनिकों के हताहतों की संख्या को लेकर भी लंबे समय तक कोई स्पष्ट सरकारी बयान नहीं आया।

BJP पर नेहरू-गांधी परिवार को लेकर पलटवार

BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन द्वारा नेहरू-गांधी परिवार पर सत्ता के लिए देश के विभाजन का आरोप लगाए जाने पर मोल्लाह ने कहा कि यह बहुत पुराना मुद्दा है जिसे BJP बार-बार दोहराती रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जब सरकार के पास जनता के सामने रखने के लिए पर्याप्त उपलब्धियाँ नहीं होतीं, तो पुराने विवादास्पद मुद्दों को उठाया जाता है।

उन्होंने बेरोज़गारी, शिक्षा, संविधान और सामाजिक एकता जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार से जवाब माँगा। मोल्लाह ने कहा, 'किसी बात को बार-बार दोहराने से वह सच नहीं हो जाता — जनता अपने अनुभव के आधार पर राजनीतिक दावों और वास्तविकता के बीच का फ़र्क समझती है।'

भारतीय धार्मिक परंपरा और RSS की एकरूपता

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से RSS पर की गई टिप्पणी के संदर्भ में मोल्लाह ने कहा कि भारतीय धार्मिक परंपरा की असली ताकत उसकी विविधता और विचारों की बहुलता में रही है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में अलग-अलग देवी-देवताओं, ग्रंथों और धार्मिक विचारधाराओं के लिए हमेशा स्थान रहा है।

उनके अनुसार, RSS और BJP एकरूपता पर आधारित धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश में हैं, जो भारत की बहुलतावादी परंपरा के विपरीत है। मोल्लाह ने स्पष्ट कहा कि भारत की धार्मिक परंपरा को किसी एक नेता, एक गुरु या एक किताब तक सीमित नहीं किया जा सकता।

हर घर तिरंगा और RSS का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

'हर घर तिरंगा' अभियान को लेकर कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे की टिप्पणी पर मोल्लाह ने कहा कि उठाया गया सवाल उचित है। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS का स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय ध्वज को लेकर ऐतिहासिक रिकॉर्ड सवालों के घेरे में रहा है। उनका दावा है कि लंबे समय तक RSS ने राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार नहीं किया और अब तिरंगे को लेकर बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है।

मोल्लाह ने कहा कि जो संगठन किसी मुद्दे पर अतीत में आलोचना का सामना करते हैं, वे बाद में उसी मुद्दे को जोर-शोर से प्रदर्शित करके अपनी छवि बदलने की कोशिश करते हैं। यह टिप्पणी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राजनीतिक रूप से विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विपक्ष ने युद्धविराम की कथा और RSS के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को एक साथ उठाकर सरकार को रक्षात्मक स्थिति में डालने की कोशिश की है। हालाँकि, यह भी उतना ही सच है कि वामपंथी दलों की खुद की राष्ट्रीय उपस्थिति सिकुड़ती जा रही है, इसलिए इन आरोपों का राजनीतिक वज़न सीमित हो सकता है। असली सवाल यह है कि ऑपरेशन सिंदूर और युद्धविराम की कथा पर सरकार कब और कितनी पारदर्शिता से जनता के सामने आती है — क्योंकि सूचना का शून्य हमेशा विपक्षी आख्यानों से भरा जाता है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हन्नान मोल्लाह ने युद्धविराम पर मोदी को क्यों घेरा?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि भारत-पाकिस्तान युद्धविराम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करवाया था। मोल्लाह का तर्क है कि जब ट्रंप और पाकिस्तान दोनों यह दावा कर रहे हैं, तो प्रधानमंत्री मोदी को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए, और उनकी लंबी चुप्पी राजनीतिक सवाल खड़े करती है।
ऑपरेशन सिंदूर पर मोल्लाह ने क्या आरोप लगाए?
मोल्लाह ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों से जुड़ी कई जानकारियाँ, विशेष रूप से सैनिकों के हताहतों की संख्या, सरकार ने लंबे समय तक स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं कीं। उनके अनुसार यह पारदर्शिता की कमी राजनीतिक रूप से भी असर डालती है।
मोल्लाह ने भारतीय धार्मिक परंपरा के बारे में क्या कहा?
मोल्लाह ने कहा कि भारतीय धार्मिक और सनातन परंपरा की विशेषता उसकी विविधता और विचारों की बहुलता में रही है। उन्होंने RSS और BJP पर एकरूपता आधारित धार्मिक व्यवस्था को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जो इस बहुलतावादी परंपरा के विपरीत है।
हर घर तिरंगा अभियान पर मोल्लाह का क्या रुख है?
मोल्लाह ने कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे के उस सवाल को उचित बताया जो हर घर तिरंगा अभियान के संदर्भ में RSS के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर उठाया गया था। उनका दावा है कि RSS ने लंबे समय तक राष्ट्रीय ध्वज को स्वीकार नहीं किया और अब बड़े पैमाने पर तिरंगा अभियान चला रहा है।
BJP के नेहरू-गांधी परिवार पर लगाए आरोपों पर मोल्लाह ने क्या कहा?
BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के नेहरू-गांधी परिवार पर विभाजन के आरोपों को मोल्लाह ने पुराना और बार-बार दोहराया जाने वाला मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि जब सरकार के पास पर्याप्त उपलब्धियाँ नहीं होतीं, तो पुराने विवादों को उठाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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