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लेबनान पर इजरायली हमले: कांग्रेस ने मोदी सरकार की चुप्पी को बताया 'हैरान करने वाला'

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लेबनान पर इजरायली हमले: कांग्रेस ने मोदी सरकार की चुप्पी को बताया 'हैरान करने वाला'

सारांश

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने लेबनान पर इजरायली हमलों को लेकर मोदी सरकार की चुप्पी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट और तेल कीमतों के ज़रिए भारत के सीधे हित जुड़े हैं, फिर भी सरकार खामोश है — यह सवाल अब विदेश नीति की जवाबदेही का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

जयराम रमेश ने 2 जून को एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार पर लेबनान मसले पर 'पूर्ण चुप्पी' का आरोप लगाया।
IDF ने हिज्बुल्लाह को निशाना बनाते हुए दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया; ऑपरेशन को IDF चीफ ईयाल जमीर ने मंजूरी दी।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने लेबनान हमलों के विरोध में अमेरिका के साथ मध्यस्थ-आधारित संदेश आदान-प्रदान अस्थायी रूप से रोका।
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि नेतन्याहू से बातचीत के बाद कोई सैनिक बेरूत नहीं जाएगा और हिज्बुल्लाह के साथ गोलीबारी बंद पर सहमति बनी।
रमेश ने तर्क दिया कि होर्मुज स्ट्रेट और तेल कीमतों से जुड़े भारत के रणनीतिक हित इस संघर्ष से सीधे प्रभावित होते हैं।

कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने मंगलवार, 2 जून को इजरायल द्वारा लेबनान पर जारी सैन्य अभियान की कड़ी निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर इस मसले पर 'पूर्ण चुप्पी' साधने का आरोप लगाया। रमेश ने तर्क दिया कि इजरायली कार्रवाई न केवल अमेरिका-ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता को पटरी से उतार रही है, बल्कि होर्मुज स्ट्रेट और तेल कीमतों के ज़रिए भारत के रणनीतिक हितों को भी सीधे प्रभावित करती है।

जयराम रमेश का आरोप: मोदी की चुप्पी अस्वीकार्य

रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'पश्चिम एशिया में युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है। ऐसे किसी समझौते का तत्काल प्रभाव होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और तेल की कीमतों पर दबाव कम होने के रूप में सामने आएगा और इन दोनों मुद्दों से भारत के बड़े हित जुड़े हुए हैं।'

उन्होंने आगे कहा, 'यह बातचीत अब तक अंतिम रूप नहीं ले सकी है, जिसकी मुख्य वजह लेबनान में इजरायल की जारी सैन्य कार्रवाई है, जिसमें अभूतपूर्व घुसपैठ देखने को मिली है। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर बेहद नाराजगी और गुस्सा जाहिर किया है, यहाँ तक कि अपशब्दों का इस्तेमाल भी किया है।'

रमेश ने तीखे शब्दों में लिखा, 'हैरानी की बात नहीं कि जिस एक सरकार के मुखिया ने इजरायल की ओर से लेबनान को तबाह करने और अमेरिका-ईरान समझौते को पटरी से उतारने की कोशिशों पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। क्या तथाकथित 'फादरलैंड' उनके लिए उनकी असली 'मदरलैंड' से कहीं ज़्यादा मायने रखती है?'

इजरायल का दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर अभियान

इज़रायल डिफेंस फोर्सेज़ (IDF) ने हिज्बुल्लाह को निशाना बनाते हुए दक्षिणी लेबनान में 'बड़े पैमाने पर अभियान' शुरू किया है। इस ऑपरेशन को IDF चीफ ऑफ स्टाफ ईयाल जमीर ने मंजूरी दी थी। अभियान से पहले उत्तरी कमान के नेतृत्व में गोलाबारी की तैयारी और अन्य परिचालन तैयारियाँ व्यवस्थित रूप से पूरी की गईं।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज़ थीं और अमेरिका-ईरान वार्ता एक नाज़ुक मोड़ पर थी। गौरतलब है कि दुनिया के कई देशों ने लेबनान में इजरायली हमलों की आलोचना की है।

अमेरिका-ईरान वार्ता पर असर

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की वार्ता टीम ने लेबनान पर हुए हमलों के विरोध में अमेरिका के साथ मध्यस्थ के ज़रिए संदेश आदान-प्रदान अस्थायी रूप से रोक दिया। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच परमाणु समझौते की संभावनाओं पर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

हालाँकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर लिखा, 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ बातचीत तेज़ी से चल रही है।' ट्रंप ने यह भी दावा किया कि नेतन्याहू के साथ उनकी 'बहुत अच्छी बातचीत' हुई और कोई भी सैनिक बेरूत नहीं जाएगा तथा जो सैनिक रास्ते में हैं उन्हें वापस भेज दिया गया है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि उच्च पद वाले प्रतिनिधियों के ज़रिए हिज्बुल्लाह के साथ भी बातचीत हुई, जिसमें सभी तरफ से गोलीबारी बंद करने पर सहमति बनी है।

भारत के हित और कूटनीतिक संतुलन

विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है — होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने वाला तेल आयात, खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में कार्यरत भारतीय प्रवासी, और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े व्यापारिक हित। आलोचकों का कहना है कि ऐसे में भारत सरकार का मौन असामान्य है।

यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठाए हों। भविष्य में यह देखना होगा कि क्या केंद्र सरकार इस मसले पर अपना आधिकारिक रुख सार्वजनिक करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी सरकार की आधिकारिक चुप्पी असामान्य है। मुख्यधारा की कवरेज रमेश के बयान को 'राजनीतिक हमले' तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति पश्चिम एशिया में मौन की आड़ बन रही है। ट्रंप खुद नेतन्याहू पर नाराज़गी जता रहे हैं — ऐसे में भारत की खामोशी कूटनीतिक संतुलन है या अवसर चूकना, यह सवाल जवाब माँगता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने लेबनान पर इजरायली हमलों और अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता पर पड़ रहे उनके असर को लेकर 'पूर्ण चुप्पी' साध रखी है। उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट और तेल कीमतों के ज़रिए भारत के सीधे हित दाँव पर हैं।
इजरायल ने लेबनान में क्या सैन्य कार्रवाई की है?
IDF ने हिज्बुल्लाह को निशाना बनाते हुए दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया है, जिसे IDF चीफ ऑफ स्टाफ ईयाल जमीर ने मंजूरी दी। अभियान से पहले उत्तरी कमान के नेतृत्व में गोलाबारी और परिचालन तैयारियाँ पूरी की गईं।
लेबनान हमलों का अमेरिका-ईरान वार्ता पर क्या असर पड़ा?
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की वार्ता टीम ने लेबनान पर हुए हमलों के विरोध में अमेरिका के साथ मध्यस्थ के ज़रिए संदेश आदान-प्रदान अस्थायी रूप से रोक दिया। हालाँकि राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि बातचीत 'तेज़ी से' जारी है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने लेबनान संकट पर क्या कहा?
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि नेतन्याहू से बातचीत के बाद कोई अमेरिकी सैनिक बेरूत नहीं जाएगा और हिज्बुल्लाह के साथ गोलीबारी बंद पर सहमति बनी है। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान के साथ परमाणु वार्ता तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
लेबनान संकट भारत को कैसे प्रभावित करता है?
भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है और होर्मुज स्ट्रेट उस आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। अमेरिका-ईरान वार्ता सफल होने पर तेल कीमतों में कमी और स्ट्रेट के खुलने से भारत को सीधा आर्थिक लाभ मिल सकता है, जिसे रमेश ने अपने बयान में रेखांकित किया।
राष्ट्र प्रेस
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