सपा सांसद राजीव राय का केंद्र पर प्रहार: 'सरकार के बोल और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राजीव राय ने 13 जून 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि इस सरकार की बातों और वास्तविकता में बड़ा अंतर है। उन्होंने सिंधु नदी के जल-विवाद और ओमान में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हुए हमलों के संदर्भ में केंद्र की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सिंधु जल और रक्षा मंत्री के बयान पर सवाल
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सिंधु नदी के पानी को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा सांसद राजीव राय ने कहा, "इस सरकार पर क्या भरोसा किया जा सकता है? वे अलग-अलग तरीके की बातें करते हैं। वे विपक्ष के सांसदों से कुछ कहते हैं, मीडिया में कुछ और कहते हैं, जबकि कागजों व हकीकत में चीजें कुछ और होती हैं।" उन्होंने आगे कहा, "यह ऐसी सरकार है, जो देशवासियों से कुछ और कहती है, विदेशों में कुछ और करती है।"
भारतीय नाविकों पर हमले और ट्रंप-मोदी संबंध
ओमान में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हुए कथित अमेरिकी हमलों को लेकर राय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "क्या प्रधानमंत्री ने अपने दोस्त ट्रंप के खिलाफ एक भी बयान दिया है? डोनाल्ड ट्रंप अक्सर धमकाते रहते हैं। भाजपा के लोगों को समझ लेना चाहिए कि प्रधानमंत्री सिर्फ उनके नहीं हैं, बल्कि पूरे देश के हैं।" राय ने कहा कि दोस्ती की आड़ में हर रोज अपमान सहना और उस पर खामोश रहना पूरे देश का अपमान है।
'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद PM की खामोशी पर सवाल
राजीव राय ने यह भी कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री का कोई अपमान करे, यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता — चाहे भाजपा समर्थकों को यह स्वीकार्य हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "विश्व गुरु क्यों नहीं बोलते हैं? 'ऑपरेशन सिंदूर' से पहले पीएम मोदी हर मुद्दे पर क्यों बोला करते थे और अभी खामोश क्यों हैं।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार सरकार की विदेश नीति की सक्रियता पर सवाल उठा रहा है।
TMC सांसदों की बगावत पर सपा की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 सांसदों की कथित बगावत पर राजीव राय ने कटाक्ष किया कि जारी की गई सूची में सीरियल नंबर गायब थे और नाम कटे हुए थे। उन्होंने इसे डरा-धमकाकर लक्ष्य निर्धारित करने की कोशिश बताया।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने इस मामले में दो अहम बिंदु रखे। पहला — बागी सांसद भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय नहीं कर रहे, जो उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता दर्शाता है। दूसरा — अलग गुट बनाने पर संवैधानिक प्रावधान भी लागू होंगे। वर्मा ने सवाल उठाया, "अगर आपको ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी से इतनी परेशानी थी, तो 4 मई से पहले यह कदम क्यों नहीं उठाया? जब तक सत्ता में थे, सारी सुविधाएँ लेते रहे — और तृणमूल के हारते ही उसे पत्ते की तरह गिरा दिया।"
राजनीतिक संदर्भ और आगे की स्थिति
गौरतलब है कि यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब संसद का सत्र चल रहा है और विपक्ष कई मोर्चों पर सरकार को घेरने की कोशिश में है। सिंधु जल समझौते पर भारत-पाकिस्तान तनाव और ओमान में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा — दोनों मुद्दे संसद के भीतर और बाहर गर्म बने हुए हैं। विपक्षी दलों की एकजुटता और TMC के आंतरिक संकट का असर आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।