पितृपक्ष मेला 2026: गयाजी में 'जीविका दीदी की रसोई' ₹30 में थाली परोस रही, महिला सशक्तीकरण की मिसाल
सारांश
मुख्य बातें
गयाजी में पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान गांधी मैदान स्थित टेंट सिटी में संचालित 'जीविका दीदी की रसोई' देशभर से आए पिंडदानियों के लिए महज ₹30 में सात्विक और स्वच्छ भोजन का भरोसेमंद केंद्र बन गई है। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस मेले में ग्रामीण महिलाएं आस्था के इस महाकुंभ में अपनी सेवा और आत्मनिर्भरता का संकल्प एक साथ पूरा कर रही हैं।
भोजन की व्यवस्था और किफायती दरें
रसोई संचालन कर रही एक जीविका दीदी के अनुसार, टेंट सिटी में स्थित इस स्टॉल पर चावल-दाल-सब्जी की थाली, पूरी-सब्जी, रोटी-सब्जी और लिट्टी-चोखा केवल ₹30 में उपलब्ध है। दही-चूड़ा ₹40 में, स्पेशल थाली ₹60 में और चाय ₹10 में मिल रही है।
पेयजल की बोतलें ₹10 और ₹20 की दर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। पितृपक्ष की धार्मिक परंपराओं के अनुरूप रसोई में बनने वाले सभी भोजन में प्याज और लहसुन का उपयोग नहीं किया जा रहा है, जो तर्पण और पिंडदान के बाद सात्विक भोजन की तलाश करने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
संचालन और महिला स्वावलंबन
इस रसोई का संचालन सहारा जीविका महिला स्वावलंबी सहकारी समिति, चंदौती के अंतर्गत किया जा रहा है। मेले के दौरान जीविका दीदियां अलग-अलग शिफ्ट में स्टॉल की जिम्मेदारी संभाल रही हैं — भोजन तैयार करने से लेकर परोसने तक का हर काम खुद कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ये महिलाएं इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन में भागीदारी के ज़रिए न केवल आमदनी अर्जित कर रही हैं, बल्कि बड़े मंच पर अपनी क्षमता भी सिद्ध कर रही हैं। यह रसोई गयाजी में ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भरता के संकल्प की एक जीवंत तस्वीर है।
गयाजी में पितृपक्ष का महत्व
फल्गु नदी के तट, विष्णुपद मंदिर और विभिन्न पिंडवेदी स्थलों पर पिंडदान और तर्पण के लिए पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुट रही है। सदियों पुरानी मान्यता है कि गयाधाम में फल्गु नदी के तट और विभिन्न वेदियों पर पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यह आस्था हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को देश के कोने-कोने से गयाजी खींच लाती है, जिससे मेले के दौरान भोजन और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।
प्रशासन की व्यापक तैयारी
दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जिला प्रशासन की ओर से ठहरने और भोजन समेत विभिन्न व्यवस्थाएं की गई हैं। इसी व्यापक ढाँचे के तहत 'जीविका दीदी की रसोई' को भी संचालित किया जा रहा है, जो सरकार की महिला स्वावलंबन योजनाओं को जमीन पर उतारने का एक व्यावहारिक उदाहरण है।
गयाजी की आध्यात्मिक धरती पर जहां श्रद्धालु अपने पितरों के प्रति श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं, वहीं जीविका दीदियां अपने परिश्रम और आत्मविश्वास से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं — मेला 10 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा।