जेफरी सैक्स का वाराणसी में आह्वान: भारत क्वाड से दूर रहे, स्वतंत्र विदेश नीति अपनाए
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) के अध्यक्ष जेफरी सैक्स ने 3 नवंबर 2026 को वाराणसी में आयोजित विश्व संगोष्ठी 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' के दूसरे दिन स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को चीन-विरोधी रुख पर आधारित क्वाड गठबंधन से दूर रहते हुए एक स्वतंत्र विदेश नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने ईरान पर जारी युद्ध को अनुचित और अवैध करार दिया तथा अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का अनुपालन करने की सीधी नसीहत दी।
भारत की विदेश नीति पर सैक्स की सलाह
सैक्स ने कहा कि भारत एक बड़ी ताकत है और उसे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के माध्यम से बहुपक्षवाद को मजबूत करना चाहिए। उनके शब्दों में, 'मैं क्वाड का समर्थन नहीं करता, जो चीन-विरोधी नीति पर चलता है। भारत को स्वतंत्र रहना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत को चीन के खिलाफ अमेरिका के साथ खड़े होने के बजाय अपना स्वतंत्र रुख बनाए रखना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका रक्षा संबंध गहरे हो रहे हैं और क्वाड की बैठकें नियमित रूप से आयोजित हो रही हैं। ऐसे में एक著名 अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्री का यह बयान नीतिगत बहस में नई परत जोड़ता है।
ट्रंप और ईरान युद्ध पर तीखी टिप्पणी
सैक्स ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'दुनिया में अस्थिरता फैलाने वाली एक बड़ी ताकत' बताया। उन्होंने कहा कि ईरान पर युद्ध न केवल अनुचित और अवैध है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचा रहा है। उनके अनुसार, दूसरे देशों के राष्ट्रपतियों के अपहरण जैसी कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं।
सैक्स ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत हर दूसरे देश की तरह समान नियमों का पालन करना चाहिए — यह उनकी राय में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियादी शर्त है।
हरित ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन
संगोष्ठी के दूसरे दिन जेफरी सैक्स ने ऊर्जा नीति पर भी अपना स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा, 'हमें कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करके ऊर्जा प्रणाली को कार्बन मुक्त करने की जरूरत है, क्योंकि ये जीवाश्म ईंधन जलवायु के लिए हानिकारक हैं। हमारे पास सौर, पवन और सुरक्षित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली परमाणु ऊर्जा जैसे विकल्प हैं।'
उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि वे इस सदी के मध्य तक शून्य-कार्बन ऊर्जा प्रणाली हासिल करने का लक्ष्य रखें। उनके अनुसार, सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत अब पहले की तुलना में काफी सस्ते हो गए हैं, जो इस लक्ष्य को व्यावहारिक बनाता है।
सभ्यताओं के बीच सामंजस्य का संदेश
सैक्स ने विभिन्न सभ्यताओं के बीच आपसी सम्मान और सामंजस्य पर जोर देते हुए कहा कि दूसरों को दुश्मन समझना विनाशकारी है और इससे टकराव व युद्ध हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, चीन, अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी ताकतों को एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए और एक-दूसरे की सीमाओं के पास सेना तैनात करने से परहेज करना चाहिए।
इस संगोष्ठी में लुम्सा विश्वविद्यालय, रोम में इतिहास दर्शन के एमेरिटस प्रोफेसर मार्सेलो सांचेज सोरोंडो ने भी मध्य पूर्व में शांति की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'हमें संवाद के माध्यम से समझौते तक पहुँचना चाहिए और बमों, विशेषकर परमाणु बमों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।' उन्होंने प्राचीन ज्ञान की ओर लौटने का भी आह्वान किया।
आगे क्या
यह विश्व संगोष्ठी वाराणसी में जारी है और इसमें वैश्विक विद्वान, नीति-निर्माता और चिंतक भाग ले रहे हैं। गौरतलब है कि सैक्स के बयान ऐसे समय में आए हैं जब क्वाड की भूमिका और भारत की विदेश नीति की स्वायत्तता को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्यापक बहस चल रही है। संगोष्ठी के अगले सत्रों में जलवायु, शासन और सभ्यताओं के संवाद पर चर्चा अपेक्षित है।