3 नवंबर 2026
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जेफरी सैक्स का वाराणसी में आह्वान: भारत क्वाड से दूर रहे, स्वतंत्र विदेश नीति अपनाए

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जेफरी सैक्स का वाराणसी में आह्वान: भारत क्वाड से दूर रहे, स्वतंत्र विदेश नीति अपनाए

सारांश

वाराणसी की विश्व संगोष्ठी में SDSN अध्यक्ष जेफरी सैक्स ने भारत को क्वाड से दूर रहने और स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की सलाह दी। ट्रंप को वैश्विक अस्थिरता का कारण बताते हुए ईरान युद्ध को अवैध करार दिया और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

SDSN अध्यक्ष जेफरी सैक्स ने 3 नवंबर 2026 को वाराणसी संगोष्ठी में कहा कि भारत को क्वाड की चीन-विरोधी नीति से दूर रहना चाहिए।
सैक्स ने ईरान पर युद्ध को अनुचित और अवैध बताया; अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करने की नसीहत दी।
डोनाल्ड ट्रंप को 'दुनिया में अस्थिरता फैलाने वाली बड़ी ताकत' करार दिया गया।
सैक्स ने इस सदी के मध्य तक शून्य-कार्बन ऊर्जा प्रणाली हासिल करने का लक्ष्य रखने का आह्वान किया।
लुम्सा विश्वविद्यालय, रोम के प्रोफेसर मार्सेलो सांचेज सोरोंडो ने मध्य पूर्व में शांति और परमाणु हथियारों से बचने पर जोर दिया।

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) के अध्यक्ष जेफरी सैक्स ने 3 नवंबर 2026 को वाराणसी में आयोजित विश्व संगोष्ठी 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' के दूसरे दिन स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को चीन-विरोधी रुख पर आधारित क्वाड गठबंधन से दूर रहते हुए एक स्वतंत्र विदेश नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने ईरान पर जारी युद्ध को अनुचित और अवैध करार दिया तथा अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का अनुपालन करने की सीधी नसीहत दी।

भारत की विदेश नीति पर सैक्स की सलाह

सैक्स ने कहा कि भारत एक बड़ी ताकत है और उसे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के माध्यम से बहुपक्षवाद को मजबूत करना चाहिए। उनके शब्दों में, 'मैं क्वाड का समर्थन नहीं करता, जो चीन-विरोधी नीति पर चलता है। भारत को स्वतंत्र रहना चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत को चीन के खिलाफ अमेरिका के साथ खड़े होने के बजाय अपना स्वतंत्र रुख बनाए रखना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत-अमेरिका रक्षा संबंध गहरे हो रहे हैं और क्वाड की बैठकें नियमित रूप से आयोजित हो रही हैं। ऐसे में एक著名 अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्री का यह बयान नीतिगत बहस में नई परत जोड़ता है।

ट्रंप और ईरान युद्ध पर तीखी टिप्पणी

सैक्स ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 'दुनिया में अस्थिरता फैलाने वाली एक बड़ी ताकत' बताया। उन्होंने कहा कि ईरान पर युद्ध न केवल अनुचित और अवैध है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचा रहा है। उनके अनुसार, दूसरे देशों के राष्ट्रपतियों के अपहरण जैसी कार्रवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हैं।

सैक्स ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत हर दूसरे देश की तरह समान नियमों का पालन करना चाहिए — यह उनकी राय में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियादी शर्त है।

हरित ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन

संगोष्ठी के दूसरे दिन जेफरी सैक्स ने ऊर्जा नीति पर भी अपना स्पष्ट दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा, 'हमें कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस पर निर्भरता कम करके ऊर्जा प्रणाली को कार्बन मुक्त करने की जरूरत है, क्योंकि ये जीवाश्म ईंधन जलवायु के लिए हानिकारक हैं। हमारे पास सौर, पवन और सुरक्षित रूप से इस्तेमाल की जाने वाली परमाणु ऊर्जा जैसे विकल्प हैं।'

उन्होंने सरकारों से आग्रह किया कि वे इस सदी के मध्य तक शून्य-कार्बन ऊर्जा प्रणाली हासिल करने का लक्ष्य रखें। उनके अनुसार, सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत अब पहले की तुलना में काफी सस्ते हो गए हैं, जो इस लक्ष्य को व्यावहारिक बनाता है।

सभ्यताओं के बीच सामंजस्य का संदेश

सैक्स ने विभिन्न सभ्यताओं के बीच आपसी सम्मान और सामंजस्य पर जोर देते हुए कहा कि दूसरों को दुश्मन समझना विनाशकारी है और इससे टकराव व युद्ध हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत, चीन, अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ जैसी बड़ी ताकतों को एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से बचना चाहिए और एक-दूसरे की सीमाओं के पास सेना तैनात करने से परहेज करना चाहिए।

इस संगोष्ठी में लुम्सा विश्वविद्यालय, रोम में इतिहास दर्शन के एमेरिटस प्रोफेसर मार्सेलो सांचेज सोरोंडो ने भी मध्य पूर्व में शांति की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'हमें संवाद के माध्यम से समझौते तक पहुँचना चाहिए और बमों, विशेषकर परमाणु बमों के इस्तेमाल से बचना चाहिए।' उन्होंने प्राचीन ज्ञान की ओर लौटने का भी आह्वान किया।

आगे क्या

यह विश्व संगोष्ठी वाराणसी में जारी है और इसमें वैश्विक विद्वान, नीति-निर्माता और चिंतक भाग ले रहे हैं। गौरतलब है कि सैक्स के बयान ऐसे समय में आए हैं जब क्वाड की भूमिका और भारत की विदेश नीति की स्वायत्तता को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर व्यापक बहस चल रही है। संगोष्ठी के अगले सत्रों में जलवायु, शासन और सभ्यताओं के संवाद पर चर्चा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यावहारिक जटिलता को नजरअंदाज करती है जिसमें भारत काम करता है — हिंद-प्रशांत में चीन की सैन्य उपस्थिति और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव जैसी वास्तविकताएँ भारत की क्वाड भागीदारी को सिर्फ वैचारिक नहीं, बल्कि सुरक्षा-आधारित बनाती हैं। 'स्वतंत्र विदेश नीति' की माँग उचित है, पर भारत पहले से ही रूस से तेल खरीदकर, SCO में भाग लेकर और अमेरिका के साथ रक्षा सौदे करके बहुध्रुवीय संतुलन साध रहा है। असली प्रश्न यह है कि क्या क्वाड से बाहर रहना भारत की सामरिक स्वायत्तता को बढ़ाएगा, या उसे कमजोर करेगा — और इस पर वाराणसी मंच पर कोई गहरी बहस नहीं हुई।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेफरी सैक्स ने भारत को क्वाड से दूर रहने की सलाह क्यों दी?
सैक्स का मानना है कि क्वाड एक चीन-विरोधी नीति पर आधारित गठबंधन है और भारत को इसके बजाय संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के माध्यम से बहुपक्षवाद को बढ़ावा देते हुए स्वतंत्र रुख बनाए रखना चाहिए। उन्होंने यह बात वाराणसी की विश्व संगोष्ठी में 3 नवंबर 2026 को कही।
जेफरी सैक्स ने ईरान युद्ध पर क्या कहा?
सैक्स ने ईरान पर युद्ध को अनुचित और अवैध बताया और कहा कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने अमेरिका से संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करने की माँग की।
वाराणसी की विश्व संगोष्ठी का विषय क्या है?
संगोष्ठी का विषय 'आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान' है। इसमें जलवायु, शांति, ऊर्जा और सभ्यताओं के संवाद जैसे वैश्विक मुद्दों पर विद्वान और नीति-निर्माता चर्चा कर रहे हैं।
सैक्स ने हरित ऊर्जा के बारे में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सरकारों को इस सदी के मध्य तक शून्य-कार्बन ऊर्जा प्रणाली हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए। सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा को जीवाश्म ईंधन के व्यावहारिक विकल्प बताते हुए उन्होंने कहा कि ये विकल्प अब पहले से काफी सस्ते हो गए हैं।
प्रोफेसर मार्सेलो सांचेज सोरोंडो ने संगोष्ठी में क्या कहा?
लुम्सा विश्वविद्यालय, रोम के एमेरिटस प्रोफेसर सोरोंडो ने मध्य पूर्व में शांति की जरूरत पर बल दिया और कहा कि संवाद के जरिए समझौते तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने परमाणु बमों के इस्तेमाल को विशेष रूप से खतरनाक बताया।
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