झारखंड में 27 नक्सलियों का ऐतिहासिक आत्मसमर्पण, 6 पर था ₹5-5 लाख का इनाम
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में वर्षों से सक्रिय 27 नक्सलियों ने 21 मई 2026 को रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें 25 भाकपा माओवादी और प्रतिबंधित संगठन जेजेएमपी के 2 उग्रवादी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एक ही दिन में हुआ यह सामूहिक सरेंडर राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है।
कौन-कौन आए मुख्यधारा में
आत्मसमर्पण करने वालों में भाकपा माओवादी संगठन के 7 सब जोनल कमांडर, 7 एरिया कमांडर और 13 सक्रिय कैडर शामिल हैं। प्रमुख इनामी नक्सलियों में गादी मुंडा उर्फ गुलशन, नागेंद्र मुंडा उर्फ प्रभात मुंडा, रेखा मुंडा उर्फ जयंती, सागेन आंगारिया उर्फ दोकोल और सुलेमान हांसदा उर्फ सुनी हांसदा के नाम शामिल हैं। जेजेएमपी संगठन के सचिन बेक ने भी हथियार डाल दिए।
इनके अतिरिक्त दर्शन उर्फ बिंज हांसदा, करण तियू उर्फ डांगुर, बासुमती जेराई उर्फ बासू, बैजनाथ मुंडा, रघु कायम उर्फ गुणा, किशोर सिरका उर्फ दुर्गा सिरका और राम दयाल मुंडा भी मुख्यधारा में लौटे। महिला कैडरों में वंदना उर्फ शांति, सुनिता सरदार, सपना उर्फ सुरू कालुंडिया और अनिशा कोड़ा उर्फ रानी शामिल हैं।
इनामी नक्सलियों का ब्यौरा
आत्मसमर्पण करने वाले 8 हार्डकोर नक्सली ऐसे हैं जिन पर सरकार ने इनाम घोषित कर रखा था। इनमें ₹5 लाख के इनामी 6 नक्सली, ₹2 लाख का इनामी 1 नक्सली और ₹1 लाख की इनामी 1 महिला नक्सली शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन सभी उग्रवादियों के खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों में कुल 426 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें हत्या, पुलिस बलों पर हमला, लेवी वसूली, विस्फोट और हथियारबंद गतिविधियाँ शामिल हैं।
जब्त हथियार और गोला-बारूद
सरेंडर के दौरान इन नक्सलियों ने भारी मात्रा में हथियार सुरक्षा बलों को सौंपे। इनमें 1 एलएमजी इंसास, 4 इंसास राइफल, 9 एसएलआर, 1 बोल्ट एक्शन राइफल, 1 पिस्टल, 31 मैगजीन, 2,987 कारतूस और 8 वॉकी-टॉकी शामिल हैं। यह जखीरा इस बात का प्रमाण है कि ये नक्सली किस स्तर पर सशस्त्र थे।
सरकार की प्रतिक्रिया और पुनर्वास योजना
डीजीपी तदाशा मिश्रा और पुलिस-सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित इस समारोह में आईजी पंकज कंबोज, आईजी प्रभात कुमार, आईजी सुनील बंसल, आईजी असीम विक्रांत मिंज, आईजी अनूप बिरथरे, आईजी मयूर पटेल कन्हैयालाल, डीआईजी इन्द्रजीत महथा, डीआईजी मनोज रतन चौथे, डीआईजी कार्तिक एस, एसएसपी राकेश रंजन और एसपी सौरभ समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सभी आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को झारखंड सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक सहायता और पुनर्वास सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा हथियार जमा करने के एवज में निर्धारित राशि भी अलग से दी जाएगी।
नक्सल उन्मूलन अभियान का व्यापक संदर्भ
यह आत्मसमर्पण ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान तेज़ कर रही हैं। गौरतलब है कि सारंडा और कोल्हान का जंगली इलाका दशकों से माओवादी गतिविधियों का गढ़ रहा है। सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के संयुक्त असर ने इस सामूहिक सरेंडर को संभव बनाया। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुनर्वास प्रक्रिया कितनी प्रभावी रहती है और क्या यह कदम क्षेत्र में माओवादी प्रभाव को स्थायी रूप से कमज़ोर कर पाता है।