झारखंड भाजपा कार्यसमिति का जनसंघर्ष प्रस्ताव पारित, हेमंत सरकार पर भ्रष्टाचार-वादाखिलाफी के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 25 अक्टूबर 2026 को रांची में संपन्न प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में सर्वसम्मति से एक राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और चुनावी वादाखिलाफी के गंभीर आरोप लगाए गए। पार्टी ने ग्रासरूट स्तर पर जनसंघर्ष तेज करने और गाँव-गाँव जनजागरण अभियान चलाने का संकल्प लिया।
कार्यसमिति बैठक का मुख्य घटनाक्रम
रांची के सुकुरहुट्टू स्थित हवेली बैंक्वेट हॉल में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में दो दिवसीय बैठक आयोजित हुई। बैठक के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राजनीतिक प्रस्ताव पेश किया, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी और विधायक मंजू कुमारी ने अनुमोदित किया। प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।
बैठक के पहले दिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा था कि बंगाल की तरह 'मिशन झारखंड' को पार्टी के नेता-कार्यकर्ता सफल बनाएंगे। उन्होंने राज्य सरकार पर जनाकांक्षाओं को रौंदने का आरोप भी लगाया था।
प्रस्ताव में उठाए गए मुख्य आरोप
प्रस्ताव में कहा गया कि झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार के कुशासन और भ्रष्टाचार से झारखंड की अस्मिता को गहरी चोट पहुँची है। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में विकास कार्य ठप हैं, सरकारी संसाधनों की लूट हो रही है और आदिवासियों की जमीन पर कथित कब्ज़ा किया जा रहा है। उन्होंने खनिज संपदा के दुरुपयोग और घुसपैठ के मुद्दे भी उठाए।
मरांडी ने एमएमडीआर (MMDR) अधिनियम का समर्थन करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस कानून को लेकर 'गलत नैरेटिव' बना रही है।
चुनावी वादाखिलाफी पर घेराबंदी
प्रस्ताव में हेमंत सोरेन सरकार पर चुनावी वादे पूरे न करने के आरोप भी लगाए गए। इसके अनुसार, प्रतिवर्ष 5 लाख नौकरियाँ देने, बेरोज़गारी भत्ता, हर घर में सरकारी नौकरी, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण और किसानों को ₹3,200 प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य देने जैसे वादे अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, छात्रवृत्ति, पेंशन, विस्थापितों के अधिकार और पलायन के मुद्दों पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया गया।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार बढ़ा है और सरकारी योजनाओं में अनियमितताएं हो रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।
आगे की रणनीति और माँगें
प्रस्ताव में महिला सुरक्षा, युवाओं के रोज़गार और बदलती जनसांख्यिकी पर चिंता जताते हुए पिछड़ा वर्ग आयोग से संबंधित ट्रिपल टेस्ट प्रक्रिया जल्द पूरी कराने और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव समय पर कराने की माँग की गई। भाजपा ने संकल्प लिया कि वह जनमत तैयार करते हुए जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी।
बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' को भी सुना। संगठन को मज़बूत करने और 'विकसित झारखंड' के लक्ष्य के लिए काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। यह बैठक झारखंड में अगले विधानसभा चुनाव की दिशा में भाजपा की रणनीतिक तैयारी का संकेत देती है।