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सीता प्रपात झारखंड: 35 मीटर ऊंचा झरना, माता सीता की पौराणिक मान्यता और हर मौसम में अलग छटा

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सीता प्रपात झारखंड: 35 मीटर ऊंचा झरना, माता सीता की पौराणिक मान्यता और हर मौसम में अलग छटा

सारांश

रांची के निकट घने जंगलों में बसा सीता प्रपात झारखंड का वह अनछुआ रत्न है जहां 35 मीटर की ऊंचाई से गिरता कोइना नदी का जल, माता सीता की पौराणिक स्मृति और सारंडा वन की दुर्लभ जैव विविधता एक साथ मिलती है — हर मौसम में एक नया रूप, हर यात्री के लिए एक नया अनुभव।

मुख्य बातें

सीता प्रपात झारखंड के रांची के निकट कोइना नदी से निर्मित लगभग 35 मीटर ऊंचा जलप्रपात है।
लोक मान्यता के अनुसार रामायण काल में माता सीता के यहां विश्राम करने से यह स्थल पवित्र माना जाता है।
झरने तक पहुंचने के लिए सारंडा जंगल में लगभग 2 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है।
यहां बार्किंग डियर , माउस डियर और बड़ी गिलहरी जैसी दुर्लभ वन्यजीव प्रजातियां देखी जा सकती हैं।
मानसून में तीव्र जलधारा और शुष्क मौसम में शांत जलाशय — यह प्रपात हर मौसम में अलग रूप दिखाता है।

सीता प्रपात, झारखंड के सबसे दिव्य और शांत प्राकृतिक स्थलों में से एक है, जो रांची से कुछ ही दूरी पर घने जंगलों के बीच स्थित है। कोइना नदी के निर्मल जल से पोषित यह जलप्रपात लगभग 35 मीटर की ऊंचाई से गिरता है और अपनी प्राकृतिक भव्यता के साथ-साथ माता सीता से जुड़ी पौराणिक मान्यता के कारण श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों दोनों को समान रूप से आकर्षित करता है। यह स्थल झारखंड पर्यटन का एक छिपा हुआ हीरा माना जाता है।

माता सीता से जुड़ी पौराणिक मान्यता

स्थानीय लोक मान्यता के अनुसार, रामायण काल में माता सीता ने वनवास के दौरान इस स्थान पर विश्राम किया था और उनकी पावन उपस्थिति से यहां का जल पवित्र हो गया था। इसी मान्यता के आधार पर इस जलप्रपात को सीता प्रपात या सीता फॉल्स के नाम से जाना जाता है। यह धार्मिक आस्था इस स्थल को एक तीर्थ का दर्जा भी देती है, जिससे यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना वर्ष भर बना रहता है। गौरतलब है कि झारखंड में ऐसे अनेक स्थल हैं जो प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं, और सीता प्रपात उनमें सबसे विशिष्ट है।

ट्रेकिंग और रोमांच का अनुभव

सीता प्रपात तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को लगभग 2 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है। सारंडा जंगल के घने वृक्षों के बीच से गुजरने वाला यह रास्ता हर कदम पर नई प्राकृतिक छटा प्रस्तुत करता है। जंगल की हरियाली, पक्षियों की मधुर चहचहाहट और हवा में घुली ताजगी पूरे सफर को अविस्मरणीय बना देती है। ट्रेकिंग और रॉक क्लाइंबिंग के शौकीन पर्यटकों के लिए यह स्थान विशेष रूप से आकर्षक है। स्थानीय गाइड की सहायता से पर्यटक न केवल सही रास्ता पा सकते हैं, बल्कि इस क्षेत्र की लोककथाएं और रोचक तथ्य भी जान सकते हैं।

मौसम के साथ बदलता रूप

सीता प्रपात की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्रत्येक मौसम में एक अलग रूप धारण करता है। मानसून के दौरान जब तेज वर्षा होती है, तब पानी की तीव्र धार गर्जना करते हुए गिरती है और सफेद झाग का अद्भुत दृश्य देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है। चारों तरफ हरियाली अपने चरम पर होती है और वातावरण में एक अलग ही ऊर्जा होती है। वहीं, शुष्क मौसम में पानी की धार भले ही धीमी पड़ जाती है, लेकिन शांति और सुकून बना रहता है। पर्यटक तब झरने के नीचे बने प्राकृतिक जलाशय के किनारे बैठकर प्रकृति की गोद में विश्राम कर सकते हैं। चट्टानों पर सदियों से बहते जल ने सुंदर प्राकृतिक नक्काशी उकेरी है, जो इस दृश्य को और आकर्षक बनाती है।

वन्यजीव विविधता और प्राकृतिक जलाशय

सीता प्रपात केवल एक झरना नहीं, बल्कि वन्यजीवों का एक सुरक्षित आवास भी है। यहां बार्किंग डियर, माउस डियर और बड़ी गिलहरी जैसी दुर्लभ प्रजातियों को देखने का सौभाग्य मिल सकता है। जंगल की यह जैव विविधता इस स्थान को एक अनौपचारिक प्रकृति अभ्यारण्य का दर्जा देती है। झरने के नीचे बना प्राकृतिक जलाशय पर्यटकों के तैरने और जल-क्रीड़ा के लिए उपयुक्त स्थान है। साफ और ठंडे जल में डुबकी लगाने के बाद मन और शरीर दोनों तरोताजा हो जाते हैं।

कैसे पहुंचें और क्यों जाएं

झारखंड भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों के लिए सीता प्रपात अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करने योग्य स्थल है। रांची से इसकी निकटता इसे एक आदर्श दिन-भ्रमण (day trip) गंतव्य बनाती है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाता है जब शहरी जीवन की भागदौड़ से थके लोग प्रकृति की गोद में सुकून तलाश रहे हैं। चाहे धार्मिक आस्था हो, साहसिक पर्यटन की चाहत हो या बस शांति की तलाश — सीता प्रपात हर यात्री की जरूरत पूरी करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली सवाल यह है कि झारखंड के इन अनमोल प्राकृतिक स्थलों तक बुनियादी पर्यटन ढांचा — पक्की सड़क, सुरक्षित ट्रेकिंग मार्ग, स्वच्छता सुविधाएं — कब पहुंचेगा। सारंडा जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में पर्यटन का विस्तार जैव विविधता के लिए खतरा भी बन सकता है यदि इसे अनियंत्रित छोड़ दिया जाए। राज्य सरकार को धार्मिक और साहसिक पर्यटन के इस संगम को एक सुनियोजित इको-टूरिज्म मॉडल में बदलने का अवसर मिला है — सवाल यह है कि क्या इस पर ध्यान दिया जाएगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीता प्रपात झारखंड में कहां स्थित है?
सीता प्रपात झारखंड की राजधानी रांची से कुछ ही दूरी पर सारंडा जंगल के घने वृक्षों के बीच स्थित है। यह कोइना नदी से निर्मित लगभग 35 मीटर ऊंचा जलप्रपात है जो रांची से एक आदर्श दिन-भ्रमण गंतव्य है।
सीता प्रपात का धार्मिक महत्व क्या है?
स्थानीय लोक मान्यता के अनुसार रामायण काल में माता सीता ने वनवास के दौरान इस स्थान पर विश्राम किया था और उनकी उपस्थिति से यहां का जल पवित्र हो गया। इसी कारण इसे सीता प्रपात या सीता फॉल्स कहा जाता है और यह श्रद्धालुओं के लिए एक तीर्थ-समान स्थल है।
सीता प्रपात तक कैसे पहुंचें और ट्रेकिंग कितनी लंबी है?
सीता प्रपात तक पहुंचने के लिए सारंडा जंगल में लगभग 2 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है। रांची से सड़क मार्ग द्वारा निकटतम बिंदु तक पहुंचकर स्थानीय गाइड की सहायता से ट्रेक किया जा सकता है।
सीता प्रपात जाने का सबसे अच्छा मौसम कौन सा है?
मानसून के दौरान सीता प्रपात अपने सबसे भव्य रूप में होता है जब पानी की तीव्र धार गर्जना करते हुए गिरती है। हालांकि शुष्क मौसम में शांत जलाशय में तैराकी और आराम के लिए यह स्थान उतना ही आकर्षक रहता है — हर मौसम में यहां का अनुभव अलग है।
सीता प्रपात में कौन-से वन्यजीव देखे जा सकते हैं?
सीता प्रपात के आसपास के जंगल में बार्किंग डियर, माउस डियर और बड़ी गिलहरी जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। स्थानीय गाइड की मदद से पर्यटक इन वन्यजीवों को देखने और जंगल की जैव विविधता के बारे में जानने का अवसर पा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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