क्या झारखंड सरकार ने लंदन में वैश्विक शिक्षा संगठनों से संवाद किया?
सारांश
Key Takeaways
- झारखंड में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है।
- पूर्वी भारत को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा साझेदारी का मुख्य गंतव्य बनाना।
- लंदन में वैश्विक शिक्षा संगठनों के साथ संवाद महत्त्वपूर्ण है।
- महिलाओं की भागीदारी का प्रतिशत उच्च है।
- सतत पर्यटन और जलवायु कार्यों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
रांची/लंदन, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने लंदन में एक राउंड टेबल संवाद का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य झारखंड के युवाओं को वैश्विक शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों से जोड़ना था। इस दौरान यूके के प्रमुख विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, कौशल विकास संगठनों, पुरस्कार देने वाली संस्थाओं और अप्रेंटिसशिप क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ झारखंड में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सहयोग के संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार ने की। प्रस्तुति में झारखंड को वैश्विक शिक्षा और नवाचार के उभरते केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक निवेश की गतिविधियां अब तक पश्चिमी भारत, दिल्ली एनसीआर और दक्षिण भारत तक सीमित रही हैं, जबकि पूर्वी और मध्य भारत अपेक्षाकृत उपेक्षित रहे हैं।
झारखंड ने पूर्वी भारत को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा साझेदारी के अगले चरण का प्रमुख गंतव्य बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्य सरकार की ओर से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के लिए किए जा रहे सुधारों का भी ब्योरा पेश किया गया। राज्य संकाय विकास अकादमी की स्थापना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप आठ सप्ताह की अनिवार्य इंटर्नशिप, और राज्य स्तरीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क से वैश्विक प्रतिनिधियों को अवगत कराया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है और विदेशी छात्रवृत्ति योजना के तहत यूके जाने वाले छात्रों में 65 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। संवाद के दौरान अप्रेंटिसशिप आधारित शिक्षा, उद्योग से जुड़े डिग्री कार्यक्रम, फिनिशिंग स्कूल की अवधारणा और आईटीआई पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण पर विशेष चर्चा हुई। केयर इकॉनमी, पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी, हरित कौशल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और खनन से जुड़े अनुसंधान एवं कौशल विकास को प्राथमिक क्षेत्र बताया गया।
बैठक में भारत और यूके के बीच कौशल एवं योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता, संयुक्त डिग्री कार्यक्रम, छात्र और शिक्षक विनिमय, अंतरराष्ट्रीय कैंपस और भारत–यूके हरित कौशल एजेंडा के तहत सहयोग के नए अवसरों पर सहमति बनी। सतत पर्यटन, आदिवासी ज्ञान प्रणालियां, संस्कृति, जलवायु कार्रवाई और नवाचार आधारित साझेदारियों पर भी विचार किया गया।
यूके पक्ष के प्रतिभागियों ने रांची और उसके आसपास विकसित हो रहे स्मार्ट सिटी पारिस्थितिकी तंत्र में शिक्षा आधारित निवेश की संभावनाओं में भी रुचि दिखाई। बैठक का समापन संस्थागत स्तर पर आगे की ठोस बातचीत और साझेदारियों को आगे बढ़ाने की सहमति के साथ हुआ।