25 जुलाई 2026
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झारखंड की महिला किसानों का आम्रपाली आम लंदन पहुंचा, सिमडेगा से 1.32 टन की पहली खेप रवाना

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झारखंड की महिला किसानों का आम्रपाली आम लंदन पहुंचा, सिमडेगा से 1.32 टन की पहली खेप रवाना

सारांश

झारखंड के सिमडेगा की महिला किसानों ने वह कर दिखाया जो कभी कल्पना से परे था — उनके आम्रपाली आम अब लंदन के बाज़ारों में हैं। 1.32 टन की पहली खेप के साथ, बिरसा हरित ग्राम योजना और एफपीओ मॉडल ने साबित किया कि ग्रामीण महिला उद्यमिता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जगह बना सकती है।

मुख्य बातें

सिमडेगा, झारखंड से 1.32 टन आम्रपाली आम की पहली व्यावसायिक खेप यूनाइटेड किंगडम (यूके) के लिए 9 जून 2026 को रवाना हुई।
बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 2019-20 से 2024-25 के बीच 12,000 से अधिक किसानों ने 10,500 एकड़ में आम के बाग विकसित किए।
निर्यात में महिला जागृति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी और बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (जेएसएलपीएस से संबद्ध) की अहम भूमिका।
एपीडा के सहयोग से महिला किसानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों का प्रशिक्षण दिया गया।
जिले का इस सीज़न में 81 टन आम बेचने का लक्ष्य; जल्द ही यूरोप के अन्य बाज़ारों में भी खेप भेजी जाएगी।
राज्य स्तर पर योजना से 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को आजीविका का स्थायी आधार मिला है।

झारखंड के सिमडेगा जिले की महिला किसानों द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम अब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में दस्तक दे चुके हैं। 9 जून 2026 को 1.32 टन आम की पहली व्यावसायिक खेप यूनाइटेड किंगडम (यूके) के लिए रवाना हुई, जो झारखंड के फल निर्यात इतिहास में एक नया अध्याय है। कभी स्थानीय हाट-बाज़ारों तक सीमित रहने वाली यह उपज अब लंदन के बाज़ारों में अपनी मिठास बिखेरने को तैयार है।

मुख्यमंत्री को दी उपलब्धि की जानकारी

सिमडेगा की उपायुक्त कंचन सिंह ने मंगलवार को रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर इस उपलब्धि की जानकारी दी। महिला स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री को सिमडेगा के आम्रपाली आम भेंट किए। विधायक कल्पना सोरेन भी इस मौके पर उपस्थित रहीं।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जिला प्रशासन, महिला समूहों और किसानों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि किसानों को बेहतर कीमत, महिलाओं को नई पहचान और कृषि निर्यात को नई गति देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

बिरसा हरित ग्राम योजना की भूमिका

इस सफलता की नींव बिरसा हरित ग्राम योजना ने रखी, जिसे कोरोना काल में शुरू किया गया था। 2019-20 से 2024-25 के बीच सिमडेगा जिले के 12,000 से अधिक किसानों ने करीब 10,500 एकड़ भूमि पर आम्रपाली, मल्लिका और लंगड़ा किस्म के आम के बाग विकसित किए। कृषि विभाग के अनुसार, राज्य स्तर पर इस योजना के तहत अब तक 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में बागवानी विकसित की जा चुकी है, जिससे 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को आजीविका का स्थायी आधार मिला है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष आम का अच्छा उत्पादन होने के बावजूद किसानों को बेहतर बाज़ार नहीं मिल पाया था। इस बार जिला प्रशासन ने खरीदार-विक्रेता बैठकें आयोजित कर किसानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों से जोड़ा।

एपीडा और एफपीओ की अहम भूमिका

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से आमों को निर्यात योग्य बनाया गया और महिला किसानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया गया। इस निर्यात अभियान में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़ी 'महिला जागृति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' और 'बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' की केंद्रीय भूमिका रही है। महिला-नेतृत्व वाले इन किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की इस पहल को ग्रामीण महिलाओं की वैश्विक पहचान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आगे का लक्ष्य और विस्तार योजना

सिमडेगा जिला प्रशासन ने इस सीज़न में 81 टन आम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बेचने का लक्ष्य रखा है। जल्द ही आम की नई खेप यूके और यूरोप के अन्य बाज़ारों के लिए भी भेजी जाएगी। इसके साथ ही बड़े घरेलू खुदरा नेटवर्क के साथ भी किसानों का बाज़ार संपर्क स्थापित किया जा रहा है। कृषि विभाग के अनुसार, इस वर्ष राज्य में कम से कम 50,000 मीट्रिक टन फल उत्पादन का अनुमान है, जिसमें से 52,000 एकड़ क्षेत्र फल उत्पादन के चरण में पहुंच चुका है। यह निर्यात पहल झारखंड की ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस मॉडल का प्रमाण है जिसमें सरकारी योजना, एफपीओ संरचना और निर्यात एजेंसी का समन्वय ज़मीनी स्तर पर काम कर सकता है। लेकिन असली कसौटी तब होगी जब 81 टन का लक्ष्य पूरा होगा और किसानों को बाज़ार भाव पर वास्तविक लाभ मिलेगा — न कि केवल एक प्रतीकात्मक पहली खेप। पिछले वर्ष अच्छे उत्पादन के बावजूद बाज़ार न मिलने की बात स्वयं प्रशासन ने स्वीकार की है, जो दर्शाता है कि बाज़ार संपर्क की यह कड़ी पहले से क्यों नहीं जोड़ी गई। दीर्घकालिक सफलता के लिए निर्यात की निरंतरता, गुणवत्ता मानकों का पालन और किसानों की आय में सीधी वृद्धि — तीनों को एक साथ सुनिश्चित करना होगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड के सिमडेगा से लंदन आम निर्यात क्या है?
सिमडेगा जिले की महिला किसान उत्पादक कंपनियों द्वारा उगाए गए आम्रपाली आम की 1.32 टन की पहली व्यावसायिक खेप 9 जून 2026 को यूनाइटेड किंगडम के लिए रवाना हुई। यह झारखंड के फल निर्यात क्षेत्र में पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि है।
बिरसा हरित ग्राम योजना क्या है और इसका आम निर्यात से क्या संबंध है?
बिरसा हरित ग्राम योजना झारखंड सरकार की वह पहल है जो कोरोना काल में शुरू हुई और जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को बागवानी के लिए भूमि और सहायता दी गई। 2019-20 से 2024-25 के बीच सिमडेगा में 12,000 से अधिक किसानों ने 10,500 एकड़ में आम के बाग लगाए, जिनकी उपज अब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुंच रही है।
इस निर्यात में किन संगठनों की भूमिका रही?
जेएसएलपीएस से जुड़ी 'महिला जागृति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' और 'बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' ने निर्यात में केंद्रीय भूमिका निभाई। एपीडा ने आमों को निर्यात योग्य बनाने और महिला किसानों को अंतरराष्ट्रीय मानकों का प्रशिक्षण देने में सहयोग किया।
सिमडेगा जिले का इस सीज़न में कितना आम बेचने का लक्ष्य है?
जिला प्रशासन ने इस सीज़न में 81 टन आम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बेचने का लक्ष्य रखा है। जल्द ही यूके और यूरोप के अन्य बाज़ारों के लिए नई खेप भेजी जाएगी और बड़े घरेलू खुदरा नेटवर्क से भी किसानों को जोड़ा जा रहा है।
इस पहल से झारखंड के कितने परिवारों को फायदा हो रहा है?
कृषि विभाग के अनुसार, बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत राज्य में अब तक 1.86 लाख एकड़ में बागवानी विकसित हुई है, जिससे 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका का आधार मिला है। इस वर्ष कम से कम 50,000 मीट्रिक टन फल उत्पादन का अनुमान है।
राष्ट्र प्रेस
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