सिमडेगा के आम पहुंचे लंदन: महिला-संचालित FPC और 3,101 एकड़ बागवानी से जिले को पहला अंतर्राष्ट्रीय निर्यात
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के सिमडेगा जिले ने 8 जून 2026 को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया — जिले में उगाए गए आम पहली बार लंदन निर्यात किए गए। महिलाओं के नेतृत्व में चलाई जा रही बागवानी परियोजना के तहत उत्पादित 1.3 मीट्रिक टन उच्च गुणवत्ता वाले आम की यह पहली खेप जिले के किसानों, विशेष रूप से महिला कृषकों, के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है।
मुख्य घटनाक्रम
जिला उपायुक्त कंचन सिंह ने बताया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी बागवानी योजना के अंतर्गत 3,101 एकड़ क्षेत्र में आम का रोपण किया गया था। यह रोपण मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा संचालित परियोजनाओं के तहत हुआ। वर्तमान में बागान शूटिंग स्टेज पर पहुंच चुके हैं और इस सीज़न में लगभग 300 मीट्रिक टन आम उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।
बाज़ार की तलाश में जिला प्रशासन ने विभिन्न राज्यों के खरीदारों को आमंत्रित किया। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप 1.3 टन आम लंदन निर्यात करने में सफलता मिली, जो सिमडेगा का पहला अंतर्राष्ट्रीय कृषि निर्यात है।
महिला सशक्तीकरण की भूमिका
उपायुक्त कंचन सिंह के अनुसार इस परियोजना की सबसे उल्लेखनीय विशेषता इसमें महिलाओं की केंद्रीय भूमिका है। मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत महिलाओं ने बागवानी का काम संभाला। इससे भी आगे, किसान उत्पादक कंपनी (FPC) भी पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित है।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की महिला-केंद्रित विकास नीति को ध्यान में रखते हुए यह काम किया जा रहा है। इस सफलता से महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक सम्मान मिलेगा।
किसानों पर असर और आगे की योजना
उपायुक्त ने बताया कि यह पहला निर्यात है और आगे और खेप भेजने की तैयारी चल रही है। इस बार का लक्ष्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में सिमडेगा के आम को स्थापित करना है, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिले और उनकी आय में वृद्धि हो। तकनीकी सहयोग और नियमित देखभाल के कारण पौधे स्वस्थ रहे, जिससे अच्छी पैदावार की संभावना बनी।
गौरतलब है कि यह उपलब्धि केवल आम तक सीमित नहीं रहेगी — प्रशासन का इरादा है कि काजू, चिरौंजी और अन्य स्थानीय कृषि उत्पादों को भी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में पहचान दिलाई जाए।
विशेषज्ञ और प्रशासन का नज़रिया
उपायुक्त कंचन सिंह ने इसे जिले के लिए 'गौरव की बात' बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मज़बूत करती है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ग्रामीण कृषि निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि भविष्य में जिले के अन्य कृषि उत्पाद भी वैश्विक बाज़ार तक पहुंचें।