झारखंड वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने लौटाई पूरी सरकारी सुरक्षा, 16 जवान और 3 वाहन वापस
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार में कांग्रेस कोटे से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने 3 जुलाई को पुलिस मुख्यालय की कार्यशैली से नाराज होकर अपनी पूरी सरकारी सुरक्षा व्यवस्था वापस कर दी। उन्होंने अपने साथ तैनात 16 सुरक्षाकर्मियों और आवंटित तीन सरकारी सुरक्षा वाहनों को लौटा दिया और इसके बाद बिना किसी सुरक्षा काफिले के रांची में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल हुए।
विवाद की जड़: अतिरिक्त वाहन की मांग
मामले की शुरुआत तब हुई जब वित्त मंत्री ने कुछ दिन पहले पुलिस महानिदेशक (DGP) को पत्र लिखकर एक अतिरिक्त सुरक्षा वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि मौजूदा तीन वाहनों में 16 सुरक्षाकर्मियों को ठूंस-ठूंस कर बैठाना पड़ता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था न तो व्यावहारिक रहती है और न ही प्रभावी। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में मंत्रियों की सुरक्षा संसाधनों के आवंटन को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
पुलिस मुख्यालय का उल्टा जवाब
बताया गया है कि वित्त मंत्री की मांग पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया। इसके बजाय पुलिस मुख्यालय की ओर से उनके आप्त सचिव को पत्र लिखकर मौजूदा तीन वाहनों में से एक वाहन वापस लेने की सूचना दी गई। इस कदम को वित्त मंत्री ने अपने लिए 'इंब्रैसिंग' (शर्मनाक) बताया और घोषणा की कि वह पूरी सुरक्षा व्यवस्था ही लौटा रहे हैं।
बिना सुरक्षा के सार्वजनिक कार्यक्रमों में शिरकत
शुक्रवार सुबह राधाकृष्ण किशोर खेलगांव स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए और इसके बाद प्रोजेक्ट भवन सचिवालय पहुँचे। इस पूरे दौरान उनके साथ न सुरक्षा गार्डों का काफिला था और न ही कोई सरकारी वाहन। उनका कहना है कि 16 जवानों के लिए तीन बड़े वाहन रखना सुरक्षा और सरकारी संसाधनों, दोनों के नज़रिये से उचित नहीं है।
सरकार और पुलिस की चुप्पी
वित्त मंत्री के इस असामान्य कदम को पुलिस मुख्यालय के प्रति उनकी खुली नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि यह मामला राज्य सरकार के भीतर कांग्रेस और प्रशासनिक तंत्र के बीच तालमेल की कमी को भी उजागर करता है। अब तक न राज्य सरकार और न ही पुलिस मुख्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या झारखंड सरकार इस मामले में कोई मध्यस्थता करती है या वित्त मंत्री बिना सुरक्षा के ही कार्य करते रहते हैं।