झारखंड वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डीजीपी को लिखा कड़ा पत्र, पुलिसिंग पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के वित्त, योजना एवं विकास, वाणिज्य-कर तथा संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सोमवार, 13 जुलाई को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक कड़ा पत्र लिखकर राज्य की पुलिस व्यवस्था और डीजीपी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। पत्र में मंत्री ने पहले भेजे गए पत्र का जवाब न मिलने पर नाराजगी जताते हुए सुरक्षा नियमों में आमूल बदलाव की माँग की और डीजीपी को सीधे शब्दों में 'हठधर्मिता छोड़ने' की सलाह दी।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपने पत्र में बताया कि उन्होंने पहले अपने सुरक्षाकर्मियों के लिए एक अतिरिक्त वाहन की माँग की थी — और यह माँग उनकी निजी सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि उनके साथ तैनात पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए थी। उस पत्र का कोई जवाब न मिलने पर उन्होंने इसे राज्य पुलिस की कार्यसंस्कृति के विपरीत करार दिया।
मंत्री ने यह भी उजागर किया कि कई पीसीआर और पेट्रोलिंग वाहनों में महज एक चालक और एक पुलिस पदाधिकारी की तैनाती हो रही है। उनका तर्क था कि जब सुरक्षा देने वाले पुलिसकर्मी स्वयं असुरक्षित हों, तो वे आम नागरिकों की रक्षा कैसे करेंगे।
बजट होने के बावजूद सुरक्षा की अनदेखी
मंत्री किशोर ने आरोप लगाया कि पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद पुलिसकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा रही, जो राज्य की सुरक्षा नीति की स्पष्ट विफलता को दर्शाता है। उनके अनुसार यह स्थिति प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़ा करती है।
भू-माफियाओं और अवैध कारोबारियों को अंगरक्षक देने का आरोप
पत्र में मंत्री ने एक और गंभीर आरोप लगाया — कि नियमों को दरकिनार कर कई रसूखदार लोगों, भू-माफियाओं, अवैध खनन से जुड़े कारोबारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को पुलिस अंगरक्षक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह पुलिस बल और सरकारी संसाधनों का खुला दुरुपयोग है।
मंत्री ने डीजीपी से वर्तमान और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को दी गई सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की भी माँग की।
डीजीपी को सीधा संदेश
पत्र के अंत में मंत्री ने लिखा, 'डीजीपी मैडम, अब तो हठधर्मिता छोड़िए और सुरक्षा के पुराने नियमों को बदलिए। अपराध की वर्तमान स्थिति को देखते हुए आम नागरिकों, सुरक्षा जोखिम वाले लोगों और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए नए सुरक्षा मानक तय कीजिए।'
यह दूसरी बार है जब मंत्री ने उठाए सवाल
गौरतलब है कि यह दूसरी बार है जब मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सार्वजनिक रूप से डीजीपी की कार्यप्रणाली और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले से ही राजनीतिक बहस का केंद्र बनी हुई है। आने वाले दिनों में डीजीपी की ओर से इस पत्र का औपचारिक जवाब आना बाकी है।