जिगर सरैया का आह्वान: भारतीय संगीत को वैश्विक मंच तक पहुँचाना हमारी ज़िम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में फिल्म 'चांद मेरा दिल' के प्रमोशन के दौरान मशहूर संगीतकार जोड़ी सचिन-जिगर के कंपोज़र जिगर सरैया ने 7 जून 2026 को भारतीय संगीत की वैश्विक क्षमता पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय कलाकारों और श्रोताओं की सामूहिक ज़िम्मेदारी है कि वे अपने संगीत को दुनिया के बड़े मंचों तक ले जाएँ।
वैश्विक संगीत से डर नहीं, अवसर देखें
जिगर सरैया ने स्पष्ट किया कि वैश्विक संगीत के बढ़ते प्रभाव को खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'वैश्विक संगीत को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। अगर दुनिया में कोई नया संगीत चल रहा है तो भारतीय कलाकारों को यह सोचना चाहिए कि वे अपने संगीत को भी उसी तरह दुनिया तक कैसे पहुंचा सकते हैं। असली चुनौती यह नहीं है कि दूसरे देशों का संगीत लोकप्रिय हो रहा है, बल्कि यह है कि भारतीय संगीत को और ज्यादा लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए।'
भारतीय संगीत की ताकत: विविधता और विशिष्टता
सरैया के अनुसार, भारतीय संगीत की सबसे बड़ी पूँजी उसकी विविधता है। उन्होंने कहा, 'भारत का संगीत किसी भी शैली के संगीत के साथ आसानी से जुड़ सकता है और फिर भी अपनी पहचान बनाए रख सकता है। भारतीय धुनों, सुरों और आवाजों में एक अलग ही आकर्षण है, जो दुनिया भर के कलाकारों को प्रभावित करता है।' उन्होंने भारतीय कलाकारों से आग्रह किया कि वे अपने संगीत की ताकत पर भरोसा रखें।
आशा भोसले का उदाहरण: भारतीय आवाज़ की वैश्विक पहचान
जिगर ने एक ठोस उदाहरण देते हुए बताया कि हाल ही में एक बेहद प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कलाकार ने अपने नए संगीत में महान गायिका आशा भोसले की आवाज़ का एक हिस्सा इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय संगीत या भारतीय कलाकारों की आवाज़ को दुनिया भर में सराहा गया हो — ऐसे अनेक उदाहरण मौजूद हैं जो साबित करते हैं कि भारतीय संगीत की वैश्विक पहुँच लगातार बढ़ रही है।
विदेशी कलाकारों की नज़र में भारतीय संगीत
सरैया ने बताया कि जब भी वे विदेशी कलाकारों या संगीत निर्माताओं से मिलते हैं, तो वे भारतीय संगीत को किसी स्थानीय शैली के रूप में नहीं, बल्कि एक वैश्विक संगीत के रूप में देखते हैं। उन्होंने कहा, 'दुनिया के लोग भारतीय संगीत को उसकी अलग धुनों, अनोखी लय और भावनात्मक गहराई के कारण पसंद करते हैं। जिस तरह भारतीय श्रोता विदेशी कलाकारों का सम्मान करते हैं, उसी तरह उन्हें अपने संगीत और अपने कलाकारों पर भी गर्व करना चाहिए।'
आगे की राह
यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारतीय संगीत उद्योग में वैश्विक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स की पहुँच तेज़ी से बढ़ रही है और भारतीय कलाकारों के अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मामले भी बढ़े हैं। जिगर सरैया का यह आह्वान भारतीय संगीत जगत में एक नई सोच को बल देता है — कि वैश्वीकरण को प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि विस्तार के अवसर के रूप में देखा जाए।