जीतू पटवारी का मोहन सरकार पर निशाना: यूथ कॉन्क्लेव नहीं, शिक्षा सुधार चाहिए युवाओं को
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के मध्य प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 6 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित सीएम यूथ कॉन्क्लेव पर तीखी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार को दिखावटी आयोजनों के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, रोजगार सृजित करने और भर्ती परीक्षाएं समय पर करवाने को अपनी प्राथमिकता बनानी चाहिए।
क्या है यूथ कॉन्क्लेव विवाद
राजधानी भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित इस कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। पटवारी के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त ने निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को एक पत्र लिखकर भोपाल और आसपास के जिलों के करीब 13,000 विद्यार्थियों को बसों के ज़रिए इस कार्यक्रम में लाने के निर्देश दिए हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह पत्र सार्वजनिक रूप से साझा किया है।
खर्च विश्वविद्यालयों की संचित निधि से
पटवारी ने आरोप लगाया कि इस आयोजन के लिए बसें, शिक्षक प्रभारी, बैनर, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की जा रही है और यह खर्च विश्वविद्यालयों की संचित निधि से किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बस में 50 छात्र-छात्राएं आएंगे और उनकी जिम्मेदारी एक महिला व एक पुरुष प्राध्यापक पर होगी। उनका कहना है कि यह सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है।
पटवारी के सवाल — कॉन्क्लेव या करियर
पटवारी ने कहा, 'मध्यप्रदेश के युवाओं को कॉन्क्लेव चाहिए या करियर? सरकारी झूठ के सच्चे फोटो चाहिए या रोजगार? भाषण चाहिए या बेहतर शिक्षा?' उन्होंने यह भी कहा कि 'युवाओं को बसों में भरकर सरकारी कार्यक्रम में लाने से प्रदेश का भविष्य नहीं बदलेगा।' कांग्रेस नेता ने सरकार से माँग की है कि वह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, खाली पद भरने और भर्ती परीक्षाएं समय पर कराने को प्राथमिकता दे।
युवाओं को लुभाने की राजनीतिक होड़
गौरतलब है कि देशभर में युवा मतदाताओं को साधने की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो चुकी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी विभिन्न स्थानों पर जाकर युवाओं से सीधा संवाद कर रहे हैं। उसी राजनीतिक संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी युवाओं से जुड़ाव बनाने की कोशिश में है और इसी क्रम में भोपाल में यह यूथ कॉन्क्लेव आयोजित किया गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
अभी तक मध्य प्रदेश सरकार या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से पटवारी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन आरोपों का किस प्रकार जवाब देती है और क्या विश्वविद्यालय निधि के उपयोग पर कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है।