भाजपा सांसद के. लक्ष्मण का हमला: 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' असल में 'वंशवाद बचाओ मार्च' है
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद और संसदीय बोर्ड के सदस्य डॉ. के. लक्ष्मण ने 2 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह आंदोलन लोकतंत्र की रक्षा का नहीं, बल्कि 'वंशवाद बचाओ मार्च' का रूप ले चुका है। उनके अनुसार, विपक्ष इस प्रदर्शन की आड़ में वंशवादी राजनीति और उससे जुड़े नेताओं को संरक्षण देने का प्रयास कर रहा है।
मार्च पर भाजपा का मुख्य आरोप
महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का जिक्र करते हुए के. लक्ष्मण ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), राहुल गांधी और इंडी गठबंधन ने देश के विभिन्न हिस्सों में यह 'मार्च' शुरू किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आंदोलन का वास्तविक उद्देश्य उन नेताओं को बचाना है जिन पर आपराधिक गतिविधियों, भ्रष्टाचार और परिवारवाद की राजनीति से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं।
लक्ष्मण ने कहा, 'राहुल गांधी संविधान की प्रति दिखाकर लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की बात करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी पार्टी के कामकाज में इन सिद्धांतों का पालन नहीं दिखाई देता।'
तेलंगाना का उदाहरण
डॉ. के. लक्ष्मण ने तेलंगाना का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि जिस राज्य में कांग्रेस की सरकार है, वहाँ विपक्ष के करीब 8 से 10 विधायकों को कथित तौर पर कांग्रेस में शामिल कराया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि राहुल गांधी वास्तव में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात करते हैं, तो उन्हें तेलंगाना में भी 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' निकालना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और इंडी गठबंधन दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई शहरों में समन्वित विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि विपक्ष इन प्रदर्शनों के ज़रिए जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है।
राजनीतिक आचरण पर सवाल
लक्ष्मण ने कहा कि जो दल लोकतंत्र और संविधान की दुहाई देते हैं, उन्हें अपने राजनीतिक आचरण में भी उन्हीं मूल्यों को प्रदर्शित करना होगा। उनके अनुसार, कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के इस आंदोलन के पीछे लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की नीयत से अधिक वंशवादी नेताओं को बचाने का उद्देश्य नज़र आता है।
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा ने कांग्रेस पर वंशवाद का आरोप लगाया हो — यह मुद्दा पार्टी की चुनावी रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों की ओर से लोकतांत्रिक मूल्यों की आड़ में राजनीतिक हमले किए जा रहे हैं।
आगे की राजनीतिक दिशा
इंडी गठबंधन का यह मार्च देश भर में जारी रहने की संभावना है, और भाजपा की ओर से जवाबी राजनीतिक अभियान भी तेज़ होने के संकेत हैं। 2 अक्टूबर जैसे प्रतीकात्मक अवसर पर दोनों पक्षों की ओर से राजनीतिक बयानबाज़ी के इस दौर में आने वाले हफ्तों में और तीखापन आने की उम्मीद है।