6 जुलाई 2026
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कैलाश खेर: बिजनेस में नुकसान के बाद डिप्रेशन, ऋषिकेश ने दी नई राह और बने सूफी संगीत के सितारे

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कैलाश खेर: बिजनेस में नुकसान के बाद डिप्रेशन, ऋषिकेश ने दी नई राह और बने सूफी संगीत के सितारे

सारांश

बिजनेस की विफलता, गहरा अवसाद और जीवन समाप्त करने जैसे विचार — कैलाश खेर का संघर्ष किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। ऋषिकेश की गंगा के किनारे मिली आत्मिक शांति ने उन्हें वह राह दिखाई जो 'अल्लाह के बंदे हंस दे' से होते हुए पद्मश्री तक पहुँची।

मुख्य बातें

कैलाश खेर का जन्म 7 जुलाई 1973 को मेरठ, उत्तर प्रदेश में हुआ; पिता मेहर सिंह खेर लोक गायक थे।
हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट बिजनेस पूरी तरह विफल होने के बाद वह गंभीर अवसाद में चले गए और जीवन समाप्त करने जैसे विचार भी आए।
ऋषिकेश में गंगा किनारे साधु-संतों के बीच बिताए समय ने उन्हें मानसिक शांति और नई दिशा दी।
2001 में मुंबई में करियर की नई शुरुआत; 'अल्लाह के बंदे हंस दे' ने उन्हें रातोंरात राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया।
पद्मश्री और फिल्मफेयर अवॉर्ड सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित; 20 से अधिक भाषाओं में 700 से अधिक गीत गाए।

भारतीय सूफी और लोक संगीत को अपनी अनूठी आवाज से नई पहचान देने वाले गायक कैलाश खेर की जीवनयात्रा उतार-चढ़ाव, संघर्ष और असाधारण पुनरुत्थान की कहानी है। जिस मुकाम पर वह आज खड़े हैं, उस तक पहुँचने से पहले उन्हें बिजनेस में भारी नुकसान, गहरे अवसाद और जीवन समाप्त करने जैसे विचारों से गुज़रना पड़ा था।

प्रारंभिक जीवन और संगीत की नींव

कैलाश खेर का जन्म 7 जुलाई 1973 को उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक कश्मीरी हिंदू परिवार में हुआ। उनके पिता मेहर सिंह खेर स्वयं एक लोक गायक थे, इसलिए बचपन से ही संगीत उनके जीवन का हिस्सा बन गया। घर में गूँजते भजनों और लोकगीतों के बीच पले-बढ़े कैलाश ने छोटी उम्र से ही गायकी के गुर सीखने शुरू कर दिए।

बिजनेस की विफलता और मानसिक संकट

जीवन में कुछ अलग करने की चाह में कैलाश खेर ने एक मित्र के साथ मिलकर हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट का व्यवसाय शुरू किया। यह उद्यम पूरी तरह विफल हो गया और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस असफलता का असर केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक स्तर पर भी गहरा पड़ा — वह गंभीर अवसाद (डिप्रेशन) में चले गए और उनके मन में जीवन समाप्त करने जैसे विचार भी आने लगे।

यह ऐसे समय में आया जब उनके पास न कोई स्थिर आय थी, न भविष्य की कोई स्पष्ट दिशा। गौरतलब है कि मानसिक स्वास्थ्य संकट और आर्थिक विफलता का यह संयोग कई उभरते कलाकारों के लिए करियर का अंत साबित होता है — लेकिन कैलाश के लिए यह एक नई शुरुआत का द्वार बना।

ऋषिकेश में आत्मिक पुनर्जन्म

इस कठिन दौर से उबरने के बाद कैलाश खेर कुछ समय के लिए ऋषिकेश चले गए। गंगा के किनारे साधु-संतों के सान्निध्य में बिताए उन दिनों में भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें मानसिक शांति दी। यहीं उन्होंने तय किया कि अब वह पूरी तरह संगीत को ही अपना जीवन-लक्ष्य बनाएँगे।

मुंबई में करियर की नई शुरुआत

2001 में कैलाश खेर ने मुंबई में अपने संगीत करियर की नई पारी शुरू की। शुरुआती दिनों में छोटे-मोटे काम और विज्ञापन जिंगल्स से उनका सफर आगे बढ़ा। बड़ा मोड़ आया फिल्म 'अंदाज' के गाने 'रब्बा इश्क ना होवे' से, जिसने उन्हें बॉलीवुड में पहचान दिलाई। इसके बाद 'अल्लाह के बंदे हंस दे' ने उन्हें रातोंरात राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया — उनकी सूफियाना आवाज हर घर में गूँजने लगी।

आगे चलकर 'तेरी दीवानी', 'सैयां', 'बम लहरी' और 'जय जयकारा' जैसे गीतों ने उनकी लोकप्रियता को और बुलंदियों पर पहुँचाया। उन्होंने 'कैलासा' नाम से अपना बैंड भी बनाया, जिसके ज़रिए लोक और सूफी संगीत को आधुनिक रूप में पेश किया गया। इस बैंड के एल्बम देश-विदेश में बेहद सफल रहे और हज़ारों स्टेज शो किए गए।

सम्मान और उपलब्धियाँ

कैलाश खेर को भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिले। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ 20 से अधिक भाषाओं में गाने गाए हैं और अपनी आवाज 700 से अधिक गीतों को दी है। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि जीवन के सबसे अंधेरे पलों से भी रोशनी की राह निकल सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश खेर डिप्रेशन में क्यों चले गए थे?
अपने दोस्त के साथ शुरू किया हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट बिजनेस पूरी तरह विफल हो जाने और भारी आर्थिक नुकसान के बाद कैलाश खेर गंभीर अवसाद में चले गए। इस दौरान उनके मन में जीवन समाप्त करने जैसे विचार भी आए, हालाँकि धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला।
कैलाश खेर ने डिप्रेशन से कैसे उबरे?
कैलाश खेर कठिन दौर के बाद ऋषिकेश चले गए, जहाँ उन्होंने गंगा किनारे साधु-संतों के बीच समय बिताया। भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें मानसिक शांति दी और संगीत को ही जीवन बनाने का निर्णय लेने की प्रेरणा मिली।
कैलाश खेर का पहला बड़ा हिट गाना कौन-सा था?
कैलाश खेर को बॉलीवुड में पहचान फिल्म 'अंदाज' के गाने 'रब्बा इश्क ना होवे' से मिली। इसके बाद 'अल्लाह के बंदे हंस दे' ने उन्हें रातोंरात पूरे देश में लोकप्रिय बना दिया।
कैलाश खेर को कौन-से प्रमुख पुरस्कार मिले हैं?
भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड और कई अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुए हैं।
कैलासा बैंड क्या है और इसकी शुरुआत किसने की?
कैलासा कैलाश खेर द्वारा स्थापित एक म्यूज़िक बैंड है, जिसके ज़रिए उन्होंने लोक और सूफी संगीत को आधुनिक रूप में पेश किया। इस बैंड के कई एल्बम बेहद सफल रहे और देश-विदेश में हज़ारों स्टेज शो किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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