68वाँ कालिदास समारोह 21 से 27 नवंबर तक, CM मोहन यादव ने तय की पूरी रूपरेखा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में 68वाँ अखिल भारतीय कालिदास समारोह इस वर्ष 21 नवंबर से 27 नवंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय समिति ने सात दिवसीय इस भव्य सांस्कृतिक महोत्सव के सभी कार्यक्रमों को अंतिम रूप दे दिया है। समिति के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 सितंबर 2026 को प्रस्तावित गतिविधियों की विस्तृत रूपरेखा की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री की प्राथमिकताएँ
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने समारोह की केंद्रीय समिति की बैठक में स्पष्ट किया कि इस आयोजन को मध्य प्रदेश के विख्यात साहित्यकारों — कवि प्रदीप, कृष्ण सरल, शिवमंगल सिंह सुमन और शरद जोशी — की स्मृतियों को समर्पित गतिविधियों से भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि नाट्य विधा से जुड़े वरिष्ठ कलाकारों एवं निर्देशकों को कला प्रदर्शन के अधिकाधिक अवसर मिलने चाहिए और युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर इससे जोड़ा जाए।
यादव ने यह भी निर्देश दिए कि राज्य की प्रतिभाओं को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों प्रकार की कला स्पर्धाओं में भाग लेने का अवसर मिले। एकात्मधाम ओंकारेश्वर को समारोह से जोड़ने और संगीत विद्यालयों व विश्वविद्यालयों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। क्षेत्रीय बोलियों एवं भाषाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति और पुलिस बैंड की प्रस्तुति भी समारोह का हिस्सा होगी।
दिन-दर-दिन कार्यक्रम की रूपरेखा
अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि समारोह से एक दिन पूर्व, अर्थात 20 नवंबर को, पूर्व रंग के अंतर्गत मंगल कलश यात्रा और नांदी सांस्कृतिक प्रस्तुति होगी।
21 नवंबर (उद्घाटन दिवस) को अतिथियों द्वारा राष्ट्रीय चित्र एवं मूर्तिकला प्रदर्शनी का शुभारंभ होगा तथा शास्त्रीय वादन से जुड़े प्रख्यात कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति होगी। 22 नवंबर को राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी एवं पंडित सूर्यनारायण व्यास स्मृति व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।
23 नवंबर को महाकवि कालिदास स्मृति व्याख्यान, 24 नवंबर को पद्मश्री वाकणकर स्मृति व्याख्यान और संस्कृत नाटकों का मंचन, 25 नवंबर को संस्कृत कवि समवाय: एवं हिंदी नाटक की प्रस्तुति, 26 नवंबर को संत समागम और 27 नवंबर (समापन दिवस) को सांस्कृतिक प्रस्तुति एवं पुरस्कार वितरण समारोह होगा।
सांस्कृतिक विरासत का महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। गौरतलब है कि कालिदास समारोह भारत के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित सांस्कृतिक महोत्सवों में गिना जाता है, जो शास्त्रीय साहित्य, नाट्य कला, संगीत और मूर्तिकला को एक साझा मंच पर लाता है।
आगे की तैयारियाँ
मुख्यमंत्री यादव ने सभी संबंधित विभागों को समारोह की व्यापक तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। समारोह में राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के कलाकारों, साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं की भागीदारी होने की उम्मीद है, जिससे यह संस्करण पिछले वर्षों से अधिक समावेशी और व्यापक होगा।