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कांदिवली में लेदर वर्कर्स के लिए कौशल विकास कार्यक्रम: पारंपरिक हुनर में आधुनिकता की छाप

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कांदिवली में लेदर वर्कर्स के लिए कौशल विकास कार्यक्रम: पारंपरिक हुनर में आधुनिकता की छाप

सारांश

कांदिवली में आयोजित एक विशेष कौशल विकास कार्यक्रम ने लेदर वर्कर्स समुदाय को पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का अवसर प्रदान किया, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

मुख्य बातें

कांदिवली में कौशल विकास कार्यक्रम का आयोजन लेदर वर्कर्स के लिए आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम पारंपरिक हुनर में नवाचार समुदाय को सशक्त बनाने का प्रयास

कांदिवली, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार की पहल पर कांदिवली (ईस्ट) स्थित अटल बिहारी वाजपेयी कौशल विकास केंद्र में लेदर वर्कर्स समुदाय के लिए एक विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के पारंपरिक और पिछड़े वर्ग के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत २० प्रतिभागियों को २७ जनवरी से २४ फरवरी तक २५ दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

प्रशिक्षण के लिए केंद्रीय फुटवियर प्रशिक्षण संस्थान, आगरा से विशेषज्ञ प्रशिक्षक देवेंद्र तिवारी और मिथुन कुमार सिंह को नियुक्त किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को डर्बी बूट्स, पुरुषों के लिए स्टिच्ड चप्पल और महिलाओं के लिए चप्पल तैयार करने की आधुनिक तकनीक सिखाई गई।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक तकनीक से जोड़कर रोजगार के नए अवसर सृजित करना और लेदर वर्कर्स समुदाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

तकनीकी प्रशिक्षक मिथुन कुमार राजपूत ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत करने वालों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने बताया कि २० उम्मीदवारों को २५ दिनों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें टीम वर्क के माध्यम से जूता निर्माण की बारीकियां सिखाई गईं।

उन्होंने कहा कि जो लोग पहले सड़क किनारे बैठकर जूते बनाते थे, वे अब नए डिजाइन के जूते, चप्पल और सैंडल बनाने में सक्षम हो गए हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इन प्रशिक्षित युवाओं को लघु उद्योग या किसी कारखाने में अवसर प्रदान किए जाएं, ताकि वे अपने कौशल के बल पर कई गुना अधिक आय अर्जित कर सकें।

प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले रामचंद्र ने बताया कि पहले वे फुटपाथ पर बैठकर जूते-चप्पलों की मरम्मत कर अपनी रोजी-रोटी चलाते थे। जब उन्हें इस कार्यक्रम की जानकारी मिली तो उन्होंने आवेदन कर प्रशिक्षण लिया। उन्होंने कहा कि पहले वे केवल टूटी चप्पल और जूतों की मरम्मत करते थे, लेकिन अब उन्हें जूते और चप्पल बनाने की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई है। इससे उनकी आमदनी में कई गुना वृद्धि होने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि चमड़े की विभिन्न किस्मों के आधार पर उत्पाद की कीमत तय की जाती है और अब वे बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पिछड़े वर्ग के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का लोगों को अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए नई संभावनाओं का द्वार भी खोलता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस कौशल विकास कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
इस कार्यक्रम का उद्देश्य लेदर वर्कर्स समुदाय को आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षित करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
प्रशिक्षण में किन चीजों को शामिल किया गया है?
प्रशिक्षण में डर्बी बूट्स, स्टिच्ड चप्पल और महिलाओं के लिए चप्पल तैयार करने की तकनीक शामिल है।
प्रशिक्षण का अवधि क्या थी?
प्रशिक्षण की अवधि २५ दिन थी, जो २७ जनवरी से २४ फरवरी तक चला।
इस कार्यक्रम से लाभ किसे हुआ?
इस कार्यक्रम से लेदर वर्कर्स समुदाय के २० प्रतिभागियों को लाभ हुआ।
सरकार की भूमिका इस कार्यक्रम में क्या है?
सरकार ने इस कार्यक्रम की योजना बनाई और इसे लागू करने में सहयोग दिया।
राष्ट्र प्रेस
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