चमोली में महिलाओं का आत्मनिर्भरता का सफर, कौशल प्रशिक्षण से बन रहे नए रोजगार के अवसर

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चमोली में महिलाओं का आत्मनिर्भरता का सफर, कौशल प्रशिक्षण से बन रहे नए रोजगार के अवसर

सारांश

चमोली में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास योजना के तहत रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भरता हासिल करने और आर्थिक स्थिति सुधारने का अवसर मिल रहा है।

Key Takeaways

  • महिलाओं का सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
  • कौशल विकास प्रशिक्षण से नए रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
  • महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से व्यवसाय कर रही हैं।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि हो रही है।

चमोली, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के चमोली में महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक नई और महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत, जिले की महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

चमोली जिले में अब तक २०० से अधिक महिलाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस प्रशिक्षण में महिलाओं को जूट बैग निर्माण, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प और अन्य उपयोगी उत्पाद बनाने की विधियां सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन से संबंधित मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाता है, ताकि वे अपने उत्पादों को स्थानीय और राष्ट्रीय बाजारों में पहुंचा सकें।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से या व्यक्तिगत स्तर पर व्यवसाय आरंभ कर रही हैं। जूट बैग और हस्तशिल्प उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण महिलाओं को नियमित आय मिलने लगी है। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है और परिवार व समाज में आत्मविश्वास बढ़ा है।

महिलाओं का कहना है कि इस योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। अब वे अपने पैरों पर खड़ी होकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में योगदान दे रही हैं बल्कि समाज में भी सशक्त भूमिका निभा रही हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की पहल महिलाओं के सशक्तीकरण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करती है। प्रशिक्षण केंद्रों में दी जा रही व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास से महिलाओं में नवाचार और उद्यमिता की भावना विकसित हो रही है, जो लंबे समय में जिले के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

लाभार्थी प्रियंका देवी ने राष्ट्रीय प्रेस से कहा, "हम यहाँ सिलाई सीखने के लिए आते हैं, हमें बहुत अच्छे से सिखाया जाता है। यहाँ से सीखकर हमने अपने लिए सूट सिला है, इससे हमें काफी लाभ होगा।"

लाभार्थी हिमांशी ने कहा, "भारत सरकार की तरफ से हमें काम सिखाया जा रहा है। यह बहुत अच्छा है। इससे हमें आगे रोजगार मिलने में आसानी होगी।" वहीं, एक अन्य लाभार्थी सीमा ने राष्ट्र प्रेस से कहा, "हम यहाँ सिलाई सीखने आते हैं। हमें एक नई पहचान मिल रही है। अब हम खुद का काम कर सकते हैं और पैसे कमा सकते हैं। पहले हमें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब नहीं।"

Point of View

बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है।
NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

यह कौशल विकास प्रशिक्षण किसके तहत चलाया जा रहा है?
यह प्रशिक्षण प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
कितनी महिलाओं को अब तक प्रशिक्षित किया गया है?
अब तक 200 से अधिक महिलाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
महिलाएं किस प्रकार के उत्पाद बना रही हैं?
महिलाएं जूट बैग, सिलाई, कढ़ाई और हस्तशिल्प उत्पाद बना रही हैं।
इस पहल का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा है?
इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी में भागीदारी कर रही हैं।
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