कंडला ग्रीन हाइड्रोजन कॉन्क्लेव 2026: भारत के पहले 1 मेगावाट 'मेक इन इंडिया' ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का प्रतिनिधिमंडल ने किया दौरा
सारांश
मुख्य बातें
दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (DPA), कंडला ने 21 अगस्त 2026 को गांधीधाम स्थित अपने प्रशासनिक कार्यालय भवन में कंडला ग्रीन हाइड्रोजन कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दुनिया भर से नीति विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कॉन्क्लेव का शुभारंभ
सम्मेलन की शुरुआत केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के वर्चुअल वीडियो संदेश से हुई। उन्होंने भारत के हरित ऊर्जा लक्ष्यों और सतत समुद्री विकास की दिशा में देश की प्रतिबद्धता पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह (आईआरएसएमई) के साथ-साथ नॉर्वे के पूर्व मंत्री एवं GH2 इंडिया के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष एरिक सोलहेम सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मुख्य विचार-विमर्श
कॉन्क्लेव में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन, सतत बंदरगाह विकास और उभरती हरित प्रौद्योगिकियों पर गहन चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने एकमत से भारत की हरित समुद्री महत्वाकांक्षाओं को गति देने के लिए वैश्विक सहयोग, नवाचार और तकनीकी साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत देश को एक प्रमुख ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादक और निर्यातक बनाने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
भारत के पहले 1 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का दौरा
कॉन्क्लेव के अंतर्गत GH2 प्रतिनिधिमंडल ने कंडला में स्थापित भारत के पहले 'मेक इन इंडिया' 1 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का भ्रमण किया। प्रतिनिधिमंडल ने संयंत्र की कार्यप्रणाली और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
गौरतलब है कि यह संयंत्र स्वदेशी तकनीक पर आधारित है और भारत की हरित ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
बंदरगाह की आधारभूत संरचना का निरीक्षण
प्रतिनिधिमंडल ने दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण की प्रमुख सुविधाओं का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें बंदरगाह की सुदृढ़ आधारभूत संरचना, परिचालन क्षमताओं और हरित ऊर्जा तथा सतत समुद्री विकास की दिशा में चल रहे प्रयासों से अवगत कराया गया।
दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी इस दौरे की जानकारी साझा करते हुए बताया कि GH2 प्रतिनिधिमंडल ने भारत के पहले 'मेक इन इंडिया' 1 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन संयंत्र का दौरा किया और बंदरगाह की महत्वपूर्ण सुविधाओं का निरीक्षण कर ग्रीन ऊर्जा आधारित विकास पहलों को करीब से देखा।
आगे की राह
इस कॉन्क्लेव से उभरी साझेदारियाँ और विचार-विमर्श भारत के ग्रीन हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करने में सहायक हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कंडला बंदरगाह की भौगोलिक स्थिति और मौजूदा अवसंरचना इसे भारत के हरित ऊर्जा निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए अनुकूल है।