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कांवड़ यात्रा 2025: मेरठ में सचिन सिरोही का अभियान — दुकानदार अपनी पहचान करें सार्वजनिक

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कांवड़ यात्रा 2025: मेरठ में सचिन सिरोही का अभियान — दुकानदार अपनी पहचान करें सार्वजनिक

सारांश

मेरठ में अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के अध्यक्ष सचिन सिरोही ने कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानदारों से पहचान सार्वजनिक करने की अपील की। पल्लवपुरम क्षेत्र में पर्दे के पीछे मीट दुकान और फल ठेले पर पहचान छिपाने के आरोप लगाए गए। संगठन का अभियान यात्रा समाप्ति तक जारी रहेगा।

मुख्य बातें

अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के अध्यक्ष सचिन सिरोही ने 4 अगस्त को मेरठ में दुकानदारों से पहचान सार्वजनिक करने का अभियान शुरू किया।
पल्लवपुरम थाना क्षेत्र में एक मीट की दुकान पर्दा डालकर संचालित मिली; संगठन ने उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देशों का हवाला देते हुए बंद करवाने की माँग की।
बारकोड के आधार पर फल ठेला संचालक का नाम जावेद बताया गया; सिरोही ने आरोप लगाया कि पहचान छिपाई जा रही थी।
सिरोही ने मेरठ से हरिद्वार तक हिंदू नामों से चलने वाले कुछ भोजनालयों पर भी सवाल उठाए।
संगठन ने कांवड़ यात्रियों से भगवा वस्त्र धारण कर यात्रा करने की अपील की।

अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के अध्यक्ष सचिन सिरोही ने 4 अगस्त को मेरठ में कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के बीच किसी भी प्रकार का भ्रम या विवाद न हो, इसके लिए संगठन ने एक विशेष जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत दुकानदारों से अपील की जा रही है कि वे अपनी वास्तविक पहचान सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करें।

मुख्य घटनाक्रम

सिरोही ने बताया कि मंगलवार को संगठन के कार्यकर्ताओं ने मेरठ के पल्लवपुरम थाना क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान एक मीट की दुकान पर्दा डालकर अंदर संचालित होती पाई गई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने कांवड़ मार्ग पर स्थित मीट की दुकानों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं, और ऐसे में किसी भी ऐसी दुकान का संचालित रहना प्रशासनिक आदेशों का उल्लंघन है।

सिरोही के अनुसार, संगठन ने दुकान संचालक से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा, लेकिन उनका आरोप है कि संचालक ने बहानेबाजी की।

फल ठेले पर पहचान का विवाद

सिरोही ने दावा किया कि उसी स्थान पर एक फल का ठेला भी लगा हुआ था, जहाँ उनकी टीम को बारकोड के आधार पर ठेला संचालक का नाम जावेद होने की जानकारी मिली। उनका आरोप है कि ठेला संचालक ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर फलों पर थूकने जैसी घटनाओं के वायरल वीडियो का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोगों में चिंता बढ़ी है, इसलिए सभी दुकानदारों को अपनी वास्तविक पहचान स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया, 'यदि किसी का नाम जावेद, उस्मान या कुछ भी है तो उसे अपनी उसी पहचान के साथ दुकान चलानी चाहिए। हमें किसी की पहचान से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन पहचान छिपाकर कारोबार करना उचित नहीं है।'

धार्मिक परंपराओं पर सिरोही का आग्रह

सिरोही ने यह भी कहा कि जो लोग कांवड़ यात्रा या जलाभिषेक के लिए मेरठ से हरिद्वार जा रहे हैं, उन्हें हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भगवा वस्त्र धारण कर यात्रा करनी चाहिए, ताकि धार्मिक आस्था का सम्मान बना रहे।

हिंदू नामों से संचालित भोजनालयों पर आरोप

सिरोही ने आरोप लगाया कि मेरठ से हरिद्वार तक कांवड़ मार्ग पर कुछ भोजनालय हिंदू नामों से संचालित किए जा रहे हैं, जबकि कथित तौर पर उनके संचालक मुस्लिम समुदाय से हैं। उन्होंने इसे गलत बताते हुए माँग की कि ऐसे मामलों में वास्तविक पहचान सामने आनी चाहिए और प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है और प्रशासन ने मार्ग पर कड़े नियम लागू किए हैं।

आगे क्या

संगठन का कहना है कि यह अभियान कांवड़ यात्रा की समाप्ति तक जारी रहेगा। प्रशासन की ओर से अभी तक इस अभियान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन संगठन की माँगों पर क्या रुख अपनाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सर्वोच्च न्यायालय इससे जुड़े राज्य सरकारों के आदेशों पर पहले भी सवाल उठा चुका है। असली सवाल यह है कि क्या ऐसे अभियान सामाजिक सौहार्द को मज़बूत करते हैं या उसे और कमज़ोर करते हैं — और प्रशासन इन दबावों के बीच कानून-व्यवस्था तथा संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को आधार बनाकर किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाने की प्रवृत्ति को पत्रकारिता में तथ्य-जाँच की कसौटी पर कसा जाना ज़रूरी है।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिन सिरोही का कांवड़ यात्रा अभियान क्या है?
अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के अध्यक्ष सचिन सिरोही ने मेरठ में एक अभियान शुरू किया है, जिसके तहत कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों से अपनी वास्तविक पहचान — नाम और समुदाय — सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की अपील की जा रही है। संगठन का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं के बीच भ्रम और विवाद नहीं होगा।
मेरठ में कांवड़ यात्रा के दौरान मीट दुकानों पर क्या नियम हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने कांवड़ मार्ग पर स्थित मीट और चिकन की दुकानों को यात्रा अवधि के दौरान बंद रखने के निर्देश दिए हैं। सिरोही के अनुसार, पल्लवपुरम थाना क्षेत्र में एक मीट की दुकान इन आदेशों का उल्लंघन करते हुए पर्दे के पीछे संचालित पाई गई।
फल ठेले पर विवाद क्यों उठा?
सिरोही ने दावा किया कि पल्लवपुरम क्षेत्र में एक फल ठेले के बारकोड से संचालक का नाम जावेद सामने आया, जबकि उसने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं की थी। उन्होंने इसे पहचान छिपाकर कारोबार करने का उदाहरण बताया।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने दुकानदारों की पहचान प्रदर्शित करने के आदेशों पर कोई टिप्पणी की है?
पिछले वर्षों में सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ राज्य सरकारों के उन आदेशों पर सवाल उठाए थे, जिनमें कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों के नाम प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया था। न्यायालय ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए संबंधित आदेशों पर रोक लगाई थी।
यह अभियान कब तक चलेगा?
अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा संगठन के अनुसार, यह जागरूकता अभियान कांवड़ यात्रा की समाप्ति तक जारी रहेगा। प्रशासन की ओर से इस अभियान पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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