केंद्र सरकार की ₹100 करोड़ जमीन पर कब्जे का आरोप, कर्नाटक मंत्री के करीबी पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) के पूर्व पार्षद एनआर रमेश ने मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कथित तौर पर दावा किया कि कर्नाटक के बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के करीबी सहयोगी और BBMP के पूर्व पार्षद केएम चेतन ने केंद्रीय विद्युत मंत्रालय की 32 गुंटा भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है, जिसकी बाजार कीमत ₹100 करोड़ से अधिक आँकी जा रही है।
विवादित जमीन का विवरण
रमेश के अनुसार, यह भूमि बेंगलुरु उत्तर तालुक के येलहंका होबली स्थित कोडिगेहल्ली गाँव के सर्वे नंबर 17/1 में दर्ज है, जो मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा के विधानसभा क्षेत्र बयातारायणपुरा के अंतर्गत आती है। उनके अनुसार, यह जमीन विद्युत मंत्रालय की कुल 3.04 एकड़ भूमि का हिस्सा है, जहाँ साउदर्न रीजनल पावर कमेटी (SRPC) के आवासीय क्वार्टर स्थित हैं।
रमेश का आरोप है कि चेयरमैन क्लब — जिसे चेयरमैन्स रिज़ॉर्ट्स के नाम से भी जाना जाता है — सर्वे नंबर 14/1 में 1.11 एकड़ भूमि का वैध मालिक है, परंतु क्लब ने अपनी सीमा दीवार बढ़ाकर विद्युत मंत्रालय की 32 गुंटा अतिरिक्त भूमि को भी घेर लिया है, जिससे उसके कब्जे वाली कुल जमीन लगभग 2.1 एकड़ हो गई है। कथित तौर पर इस खाली जमीन को ओपन डाइनिंग एरिया और पार्किंग स्थल में बदल दिया गया है।
कौन हैं आरोपी
BJP नेता ने केएम चेतन — चेयरमैन क्लब के वर्तमान अध्यक्ष और कोडिगेहल्ली वार्ड (2015–2020) के पूर्व पार्षद — तथा उनके पिता एन मंजूनाथ — क्लब के पूर्व अध्यक्ष — को इस कथित अतिक्रमण का मुख्य जिम्मेदार बताया। रमेश का दावा है कि पिता-पुत्र ने क्लब अध्यक्ष के पद का इस्तेमाल करते हुए पिछले करीब 18 वर्षों से इस बहुमूल्य सरकारी जमीन पर कब्जा बनाए रखा है।
रमेश के अनुसार, केएम चेतन, एन मंजूनाथ और कुछ BBMP अधिकारियों के विरुद्ध कर्नाटक लोकायुक्त में सरकारी जमीन पर कब्जे, जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।
केंद्र सरकार की कार्रवाई और राज्य की निष्क्रियता
रमेश ने बताया कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल ने 22 दिसंबर 2025 को कर्नाटक की मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर अदालत के आदेशों के अनुरूप तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसके बाद 11 मई 2026 को मंत्रालय के अधीक्षण अभियंता ने येलहंका के सहायक भूमि अभिलेख निदेशक को जमीन का शीघ्र सर्वे कराने के लिए पत्र लिखा, लेकिन रमेश के अनुसार दोनों पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब विद्युत मंत्रालय के अधिकारी जमीन वापस लेने पहुँचे, तो मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा और केएम चेतन के समर्थकों ने मौके पर आकर अधिकारियों को धमकाया और उन्हें काम करने से रोका। स्थानीय पुलिस ने भी केंद्र सरकार के अधिकारियों की कोई सहायता नहीं की, ऐसा रमेश ने दावा किया।
माँगें और राजनीतिक संदर्भ
BJP नेता ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से माँग की कि इस कथित भूमि अतिक्रमण घोटाले की व्यापक जाँच CID को सौंपी जाए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कई अदालतों ने जमीन का स्वामित्व विद्युत मंत्रालय के पक्ष में तय किया है, फिर भी राज्य सरकार ने जमीन कब्जामुक्त कराने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में भूमि अतिक्रमण के मामले पहले से ही राजनीतिक विवाद का केंद्र बने हुए हैं।
गौरतलब है कि इन सभी आरोपों पर अब तक मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, केएम चेतन या चेयरमैन क्लब की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला आगे किस दिशा में जाता है, यह राज्य सरकार की जाँच-प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।