क्या कर्नाटक कैबिनेट वीबी जी राम जी योजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी?
सारांश
Key Takeaways
- कर्नाटक सरकार ने विकसित भारत–जी राम जी योजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया।
- मंत्री पाटिल ने इसे 'तानाशाही कानून' कहा।
- मनरेगा के तहत रोजगार के अधिकार को लेकर चिंता जताई गई।
- पंचायत चुनाव जल्द कराने का निर्णय लिया गया।
- 33 कैदियों को अच्छे आचरण के आधार पर रिहा किया जाएगा।
बेंगलुरु, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक कैबिनेट ने गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को वापस लेने के मुद्दे पर विचार किया और नई विकसित भारत–जी राम जी योजना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी राज्य के पर्यटन, कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने साझा की।
कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए पाटिल ने कहा कि राज्य सरकार इस नई योजना को “जनता की अदालत” में पेश करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि 73वें संविधान संशोधन के बाद देश में विकेंद्रीकरण को बल मिला था, लेकिन यह योजना उसी के मूल सिद्धांतों पर प्रहार करती है। मनरेगा को वापस लेकर केंद्र सरकार ने ग्रामीण लोगों से रोजगार का अधिकार छीन लिया है।
पाटिल ने बताया कि मनरेगा के तहत पंचायतों के माध्यम से संपत्तियों का निर्माण होता था, जबकि नई “तानाशाही कानून” जैसी योजना में मजदूरों को ठेकेदारों द्वारा बनाए जा रहे राष्ट्रीय राजमार्गों के काम में जबरन लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को मजदूरों के कल्याण की कोई चिंता नहीं है और उनके रोजगार का अधिकार छीन लिया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले पंचायतों को यह तय करने का अधिकार था कि गांवों में कौन-से काम किए जाएं, लेकिन अब यह अधिकार पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। केंद्र सरकार अब यह तय करेगी कि कहां और किस प्रकार का काम होगा। कर्नाटक सरकार इस “दमनकारी कानून” का राजनीतिक, कानूनी और जनस्तर पर विरोध करने का निर्णय लेगी।
पाटिल ने यह सवाल भी उठाया कि 125 दिनों का रोजगार देने का दावा कैसे किया जाएगा, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने पूछा कि इसके लिए धन कहां से आएगा। उन्होंने बताया कि इस योजना की लगभग 40 प्रतिशत लागत राज्यों को वहन करनी होगी, जिससे उन पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। यदि ऐसा बोझ डालना था, तो केंद्र को राज्यों से परामर्श करने की आवश्यकता थी, जो नहीं किया गया। यह योजना 15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद लाई गई है।
पाटिल ने यह भी बताया कि कैबिनेट ने पंचायत चुनाव जल्द से जल्द कराने का निर्णय लिया है। कई पंचायतों ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाने का आग्रह किया है। इस पर एक-दो दिन में निर्णय लिया जाएगा।
कैबिनेट ने राज्य की विभिन्न केंद्रीय जेलों में बंद 33 आजीवन कारावास की सजा पाए कैदियों को अच्छे आचरण के आधार पर समयपूर्व रिहा करने को भी मंजूरी दी है। इनमें से दो कैदियों की रिहाई केंद्रीय गृह मंत्रालय की सहमति के बाद ही होगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने रायचूर जिले के सिरवार तालुक के सिरवार सीमा क्षेत्र में सर्वे नंबर 2.2.39 की 10 गुंटा जमीन “कांग्रेस भवन ट्रस्ट, बेंगलुरु” को कांग्रेस भवन के निर्माण के लिए आवंटित करने का निर्णय लिया है।
कैबिनेट ने राज्य भर के शहरी निकाय क्षेत्रों में सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बिना विकसित लेआउट्स में स्थित “बी-खाता” साइट्स, भवनों, अपार्टमेंट्स और फ्लैट्स को “ए-खाता” जारी करने को भी मंजूरी दी है। पाटिल ने कहा कि इस योजना से लगभग 10 लाख संपत्तियां कवर होंगी।
इसके अलावा, कैबिनेट ने राज्य के 31 जिलों और पांच पुलिस आयुक्तालयों में गृह विभाग के समन्वय से “अक्का पाड़ा” योजना लागू करने का भी फैसला किया है।