21 अक्टूबर 2026
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मैसूरु दशहरा 2026: CM शिवकुमार परिवार सहित पहुंचे, ऐतिहासिक 'जंबू सवारी' में होंगे शामिल

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मैसूरु दशहरा 2026: CM शिवकुमार परिवार सहित पहुंचे, ऐतिहासिक 'जंबू सवारी' में होंगे शामिल

सारांश

मैसूरु दशहरा 2026 का समापन ऐतिहासिक 'जंबू सवारी' से होगा — 750 किलो सोने के हौदे में देवी चामुंडेश्वरी, पैलेस से बन्नीमंटप तक 5 किमी का भव्य जुलूस। CM शिवकुमार परिवार सहित पहुंचे; केरल और तेलंगाना के मुख्यमंत्री भी शामिल।

मुख्य बातें

कर्नाटक के CM डीके शिवकुमार बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को परिवार सहित मैसूरु पहुंचे; हवाई अड्डे पर 'गार्ड ऑफ ऑनर' से स्वागत हुआ।
ऐतिहासिक 'जंबू सवारी' में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा 750 किलोग्राम वजनी सोने के हौदे में सजाई जाती है।
जुलूस मैसूरु पैलेस से बन्नीमंटप तक 5 किलोमीटर की दूरी तय करता है और 'मशाल परेड' से संपन्न होता है।
केरल CM वीडी सतीशन और तेलंगाना CM ए.
रेवंत रेड्डी भी इस आयोजन में शामिल हुए।
पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण मैसूरु, मडिकेरी और बेंगलुरु के समीपवर्ती होटल पूरी तरह भर गए।
भारतीय वायु सेना का एयर शो, ड्रोन शो और पारंपरिक 'कंबाला' भैंसा दौड़ उत्सव के अतिरिक्त आकर्षण रहे।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को अपने परिवार के साथ मैसूरु पहुंचे, जहाँ वे मैसूरु दशहरा के भव्य समापन पर आयोजित होने वाली ऐतिहासिक 'जंबू सवारी' शोभायात्रा में शिरकत करेंगे। मैसूरु हवाई अड्डे पर उनका स्वागत 'गार्ड ऑफ ऑनर' से किया गया। इस अवसर पर केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी भी उपस्थित रहे।

क्या है 'जंबू सवारी' और क्यों है यह खास

'जंबू सवारी' विजयदशमी के दिन 10 दिवसीय मैसूरु दशहरा उत्सव का भव्य और पारंपरिक समापन है। इस शोभायात्रा में देवी चामुंडेश्वरी की पवित्र प्रतिमा को 750 किलोग्राम वजनी सोने के हौदे (अंबारी) में सजाकर जुलूस के अग्रणी हाथी की पीठ पर विराजमान किया जाता है। यह विशाल जुलूस मैसूरु पैलेस से बन्नीमंटप मैदान तक 5 किलोमीटर की दूरी तय करता है।

जुलूस में विभिन्न जिलों के रंग-बिरंगे सांस्कृतिक दल, राज्य और सेना की झांकियां, पुलिस बैंड, लोक कलाकार और मार्चिंग टुकड़ियां शामिल होती हैं। बन्नीमंटप पहुंचकर पारंपरिक 'मशाल परेड' के साथ यह उत्सव संपन्न होता है — एक ऐसी परंपरा जो सदियों से इस शहर की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है।

मुख्यमंत्री की शुभकामनाएं और प्रार्थना

मैसूरु पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री शिवकुमार ने उत्सव देख रहे सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, 'देश भर से आए लोग और विदेशी पर्यटक जो आज इस भव्य दशहरा उत्सव को देख रहे हैं, उन्हें देवी चामुंडेश्वरी का आशीर्वाद मिले। देवी उनके जीवन से सभी दुखों को दूर करें और सबके साथ अच्छा हो।' उन्होंने उत्सव के सफल आयोजन के लिए मीडिया का सहयोग भी आमंत्रित किया।

डिजिटल प्रसार और पर्यटन का उफान

मुख्यमंत्री ने बताया कि लाइव प्रसारण और सोशल मीडिया के ज़रिए इस उत्सव का व्यापक प्रचार हुआ है। युवाओं ने रील्स बनाकर उन्हें ऑनलाइन साझा किया, जिससे यह आयोजन देश की सीमाओं के पार भी पहुंचा। गौरतलब है कि इस वर्ष मैसूरु, पड़ोसी मडिकेरी जिले और बेंगलुरु के प्रवेश द्वारों के निकट के कई होटल और कमरे पूरी तरह भर गए, जिससे पर्यटकों को ठहरने में कुछ असुविधा का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने भारतीय वायु सेना के एयर शो और ड्रोन शो पर भी संतोष व्यक्त किया और कहा कि इन आयोजनों ने पर्यटकों के लिए अनुभव को और यादगार बनाया। उन्होंने पारंपरिक 'कंबाला' भैंसा दौड़ को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया का भी उल्लेख किया।

प्रशासनिक तैयारी और भविष्य की योजना

शिवकुमार ने बताया कि उत्सव के दौरान यातायात प्रबंधन के लिए प्रशासन ने समुचित इंतज़ाम किए हैं। उनके मंत्रियों और विधायकों ने उन्हें इस आयोजन को मिली अनुकूल प्रतिक्रिया से अवगत कराया था। उन्होंने कहा कि इस वर्ष उत्सव में शामिल होने वाले लोगों की प्रतिक्रिया भविष्य के आयोजनों को और बेहतर बनाने में सहायक होगी — जो यह संकेत देता है कि सरकार मैसूरु दशहरा को और बड़े वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में सोच रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कर्नाटक सरकार के लिए एक बड़ा पर्यटन और 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति का अवसर बन चुका है — यही कारण है कि तीन राज्यों के मुख्यमंत्री एक साथ मंच साझा करते हैं। होटलों का पूर्ण भर जाना और डिजिटल प्रसार की तारीफ़ स्वागत योग्य है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि पर्यटन बुनियादी ढांचे में निवेश उस रफ़्तार से क्यों नहीं हुआ जिस रफ़्तार से उत्सव की लोकप्रियता बढ़ी है। भविष्य के आयोजनों को 'और बेहतर' बनाने की बात तब तक अधूरी है जब तक ठहरने की क्षमता और यातायात ढांचे में ठोस विस्तार न हो।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मैसूरु दशहरा की 'जंबू सवारी' क्या है?
'जंबू सवारी' विजयदशमी के दिन 10 दिवसीय मैसूरु दशहरा उत्सव का भव्य समापन जुलूस है, जिसमें देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा को 750 किलोग्राम वजनी सोने के हौदे में सजाकर अग्रणी हाथी पर रखा जाता है। यह जुलूस मैसूरु पैलेस से बन्नीमंटप मैदान तक 5 किलोमीटर की दूरी तय करता है।
2026 की 'जंबू सवारी' में कौन-कौन से मुख्यमंत्री शामिल हुए?
कर्नाटक के CM डीके शिवकुमार के अलावा केरल के CM वीडी सतीशन और तेलंगाना के CM ए. रेवंत रेड्डी भी इस आयोजन में शामिल हुए। शिवकुमार परिवार सहित मैसूरु हवाई अड्डे पर पहुंचे, जहाँ उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया।
'जंबू सवारी' जुलूस कहाँ से शुरू होकर कहाँ समाप्त होता है?
यह जुलूस मैसूरु पैलेस से शुरू होकर शहर के बाहरी इलाके बन्नीमंटप मैदान तक 5 किलोमीटर की दूरी तय करता है। वहाँ पारंपरिक 'मशाल परेड' के साथ उत्सव का समापन होता है।
मैसूरु दशहरा 2026 में पर्यटकों की कितनी भीड़ रही?
इस वर्ष पर्यटकों की भारी भीड़ के कारण मैसूरु, पड़ोसी मडिकेरी जिले और बेंगलुरु के प्रवेश द्वारों के पास के होटल व कमरे पूरी तरह से भर गए। इससे पर्यटकों को ठहरने में कुछ असुविधा का सामना करना पड़ा, जिसका उल्लेख CM शिवकुमार ने भी किया।
इस वर्ष मैसूरु दशहरा में क्या नए आकर्षण थे?
2026 के मैसूरु दशहरा में भारतीय वायु सेना का एयर शो, ड्रोन शो और पारंपरिक 'कंबाला' भैंसा दौड़ विशेष आकर्षण रहे। इसके अलावा युवाओं द्वारा सोशल मीडिया पर रील्स साझा करने से उत्सव देश-विदेश में व्यापक रूप से प्रसारित हुआ।
राष्ट्र प्रेस
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