मैसूर दशहरा विवाद: प्रमोदा देवी बोलीं- सरकार को सुझाव दिए थे, आदेश नहीं; CM शिवकुमार ने दिया संवाद का आश्वासन
सारांश
मुख्य बातें
मैसूर दशहरा आयोजन विवाद में पूर्व मैसूर शाही परिवार की सदस्य प्रमोदा देवी वाडियार ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को स्पष्ट किया कि कर्नाटक सरकार को भेजे गए उनके पत्र में केवल सुझाव थे, कोई निर्देश नहीं। मैसूर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि यह सुझाव मानना या न मानना पूरी तरह सरकार का अधिकार है। वहीं, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि वे इस मसले को विस्तार से देखेंगे और प्रमोदा देवी से सीधी बातचीत करेंगे।
प्रमोदा देवी का स्पष्टीकरण
प्रमोदा देवी वाडियार ने मैसूर में पत्रकारों को बताया कि उनके सुझावों का एकमात्र उद्देश्य आने वाले वर्षों में दशहरा उत्सव को सुचारु और सुरक्षित रूप से आयोजित कराना है। उन्होंने यह भी साफ किया कि शाही परिवार ने किसी भी रूप में कर्नाटक सरकार को दोषी नहीं ठहराया है।
उनकी आपत्ति विशेष रूप से दशहरा समारोह के दौरान पुलिस की उपस्थिति और उसके कथित व्यवहार को लेकर थी। उन्होंने कहा, 'यह केवल शाही परिवार के अधिकारों का मामला नहीं है, बल्कि हाथी और लाखों लोगों की सुरक्षा का भी सवाल है। महावत या हाथी की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।'
स्वर्ण हौदा और शाही संपत्ति का विवाद
दशहरा जुलूस के मुख्य आकर्षण स्वर्ण हौदा (गोल्डन हाउदाह) के स्वामित्व पर प्रमोदा देवी ने दो टूक कहा कि यह शाही परिवार की निजी संपत्ति है और न तो स्वर्ण हौदा और न ही शाही सिंहासन किसी सरकारी कानून के दायरे में आते हैं। उनके अनुसार, 'ये पहले भी शाही परिवार के थे और आगे भी उसी के रहेंगे।'
सरकार द्वारा स्वर्ण हौदा के उपयोग के बदले किए जाने वाले भुगतान पर उन्होंने कहा कि इसे 'रॉयल्टी' नहीं कहा जाना चाहिए — सरकार पहले महल से अनुमति माँगती है और उसी संदर्भ में भुगतान होता है। उन्होंने यह भी माँग दोहराई कि जुलूस के लिए हाथी के चयन में महल प्रशासन को विश्वास में लिया जाए।
समन्वय की कमी की शिकायत
इससे पहले प्रमोदा देवी ने प्रेस बयान और पत्र जारी कर मैसूर दशहरा 2026 के आयोजन पर गंभीर आपत्तियाँ दर्ज की थीं। उनका आरोप था कि विभिन्न सरकारी विभागों और पुलिस के बीच समन्वय की कमी रही और कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ शाही परिवार को समय पर नहीं दी गईं।
उन्होंने बताया कि किस हाथी को स्वर्ण हौदा उठाने के लिए चुना गया है, यह जानने के लिए उन्हें कार्यक्रम से पाँच दिन पहले वन विभाग के अधिकारियों से स्वयं संपर्क करना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने कुछ द्वारों पर पुलिसकर्मियों के कथित रूखे व्यवहार और लगाए गए प्रतिबंधों पर भी आपत्ति जताई थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्हें इस मसले की पूरी जानकारी अभी नहीं है। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक का शाही परिवार हमारे लिए अत्यंत सम्मानित है। मैं केवल मीडिया में आई बातों के आधार पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकता। मैं पूरे मामले को देखूंगा और उनसे बात करूंगा।'
मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया ने कहा था कि मैसूर महल और उसका प्रशासन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और शाही परिवार को सम्मान के तौर पर आवासीय सुविधा दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार अंबारी (स्वर्ण हौदा) का उपयोग मुफ्त में नहीं करती और सभी आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन होता है।
राजनीतिक खींचतान
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता बीवाई विजयेंद्र सहित अन्य नेताओं ने मंत्री यतींद्र सिद्दारमैया से माफी माँगने की माँग की, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। सिद्दारमैया का कहना था कि उनकी टिप्पणी प्रमोदा देवी वाडियार के सार्वजनिक बयान के जवाब में की गई थी और मैसूर महल से जुड़ी ज़मीनें राज्य सरकार की संपत्ति हैं।
गौरतलब है कि मैसूर दशहरा कर्नाटक का सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक उत्सव है, जिसमें लाखों श्रद्धालु और पर्यटक हर वर्ष शामिल होते हैं। शाही परिवार की भागीदारी इस उत्सव की पहचान का अभिन्न हिस्सा रही है, यही कारण है कि यह विवाद व्यापक ध्यान खींच रहा है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री शिवकुमार और प्रमोदा देवी वाडियार के बीच प्रस्तावित बातचीत से इस विवाद का कोई हल निकलने की संभावना है।