4 नवंबर 2026
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आंध्र प्रदेश सीआईडी ने ₹15 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो घोटाले का भंडाफोड़ किया, 8 गिरफ्तार

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आंध्र प्रदेश सीआईडी ने ₹15 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो घोटाले का भंडाफोड़ किया, 8 गिरफ्तार

सारांश

आंध्र प्रदेश सीआईडी ने ₹15 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो घोटाले में 8 आरोपी गिरफ्तार किए — जो हैदराबाद से लेकर चीन और पुर्तगाल तक फैले हैं। ब्लॉकचेन ट्रेसिंग और अदालती आदेश से पीड़िता को रकम वापसी की राह बनी, जो भारत में इस तरह के साइबर मामलों में एक नई मिसाल है।

मुख्य बातें

आंध्र प्रदेश सीआईडी ने ₹15 करोड़ (1.5 मिलियन डॉलर) के अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी निवेश घोटाले का 4 नवंबर 2026 को पर्दाफाश किया।
पीड़िता तेलंगाना के तेनाली की निवासी है; उसे बिटकॉइन, सोलाना और डॉजकॉइन के ज़रिए 27 लेनदेन में ठगा गया।
गिरफ्तार 8 आरोपी हैदराबाद, महाराष्ट्र, मलेशिया, चीन और पुर्तगाल के निवासी हैं; चार्जशीट दाखिल।
ठगी की रकम केमैन आइलैंड स्थित गेट ग्लोबल कॉर्पोरेशन तक ट्रेस की गई; गेट आईओ एक्सचेंज के 4 खाते फ्रीज।
गुंटूर की अदालत ने संपत्ति USDT में बदलकर पीड़िता के वॉलेट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के I4C ने जांच में तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई।

आंध्र प्रदेश अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने 4 नवंबर 2026 को करीब ₹15 करोड़ (1.5 मिलियन डॉलर) के एक संगठित अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी निवेश घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसमें तेलंगाना के तेनाली की एक महिला को फर्जी निवेश मंच के ज़रिए ठगा गया था। जांच एजेंसी ने न केवल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया, बल्कि गुंटूर की एक अदालत से ठगी की रकम पीड़िता को वापस दिलाने का आदेश भी हासिल किया — जो इस तरह के अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी मामलों में एक दुर्लभ उपलब्धि है।

घोटाले का तरीका

सीआईडी के अनुसार, पीड़िता को क्रिप्टोकरेंसी निवेश पर भारी मुनाफे का प्रलोभन देकर फंसाया गया। उसने अपने बैंक खातों से 13 नॉन-कस्टोडियल क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में धनराशि स्थानांतरित की — इनमें रॉबिनहुड का एक वॉलेट और 12 ऑन-चेन वॉलेट शामिल थे। आरोपियों के निर्देश पर उसने इस रकम को फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म पर भेजा, जहाँ बिटकॉइन, सोलाना और डॉजकॉइन के माध्यम से कुल 27 क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन दर्ज हुए। पीड़िता को यकीन था कि वह एक वैध निवेश मंच पर काम कर रही है।

यह मामला मंगलगिरी स्थित सीआईडी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को कई स्तरीय लेनदेन और म्यूल खातों के ज़रिए आगे बढ़ाया गया, और अंततः यह धनराशि केमैन आइलैंड स्थित क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज गेट ग्लोबल कॉर्पोरेशन तक पहुँची।

ब्लॉकचेन विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय समन्वय

सीआईडी ने ब्लॉकचेन लेनदेन के विस्तृत तकनीकी विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के ज़रिए ठगी की क्रिप्टोकरेंसी की पूरी आवाजाही का पता लगाया। जांच में 15 बिटकॉइन लेनदेन को गेट आईओ एक्सचेंज के चार खातों से जोड़ा गया, जिनका संबंध एक संगठित अपराध सिंडिकेट से था। न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए इन खातों में मौजूद सभी संपत्तियाँ फ्रीज करा दी गईं।

इस पूरी जांच में केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने तकनीकी सहायता और समन्वय उपलब्ध कराया। गौरतलब है कि इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो ट्रेसिंग भारतीय जांच एजेंसियों के लिए अभी भी असाधारण मानी जाती है।

गिरफ्तार आरोपी और उनकी पहचान

सीआईडी ने इस सिंडिकेट से जुड़े आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कई देशों से संबंधित हैं — दो हैदराबाद, दो महाराष्ट्र, एक मलेशिया, दो चीन और एक पुर्तगाल के निवासी हैं। एजेंसी ने सक्षम अदालत में इन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। यह बहुराष्ट्रीय संरचना बताती है कि किस तरह साइबर अपराध सिंडिकेट अब सीमाओं से परे काम करते हैं।

पीड़िता को रकम वापसी का आदेश

गुंटूर की अदालत ने गेट ग्लोबल कॉर्पोरेशन को निर्देश दिया है कि वह चारों चिह्नित खातों में मौजूद क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियों को मौजूदा बाज़ार मूल्य के आधार पर यूएसडीटी (USDT) में परिवर्तित कर पीड़िता के निर्धारित वॉलेट में स्थानांतरित करे। सीआईडी ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले जटिल साइबर धोखाधड़ी मामलों की जांच और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए पीड़ित की संपत्ति वापस दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बताया है। आने वाले समय में इस तरह के और मामलों में यही प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ केमैन आइलैंड तक फैले लेनदेन को ट्रेस कर अदालत से रकम वापसी का आदेश मिला। असली सवाल यह है कि क्या यह एकल सफलता एक प्रतिकृति-योग्य ढाँचे में बदल सकती है, क्योंकि देश में क्रिप्टो घोटालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। I4C की भागीदारी उत्साहजनक है, लेकिन बहुराष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ प्रत्यर्पण और संपत्ति वसूली अभी भी भारतीय एजेंसियों के लिए सबसे कमज़ोर कड़ी बनी हुई है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आंध्र प्रदेश सीआईडी ने किस क्रिप्टो घोटाले का भंडाफोड़ किया?
आंध्र प्रदेश सीआईडी ने ₹15 करोड़ (1.5 मिलियन डॉलर) के एक अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टोकरेंसी निवेश घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसमें तेनाली की एक महिला को फर्जी निवेश मंचों के ज़रिए ठगा गया था। मामला मंगलगिरी स्थित सीआईडी पुलिस स्टेशन में दर्ज है।
इस घोटाले में कितने और किन देशों के आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
कुल 8 आरोपी गिरफ्तार हुए हैं — दो हैदराबाद, दो महाराष्ट्र, एक मलेशिया, दो चीन और एक पुर्तगाल के निवासी। सीआईडी ने इनके खिलाफ सक्षम अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है।
पीड़िता को ठगी की रकम कैसे वापस मिलेगी?
गुंटूर की अदालत ने गेट ग्लोबल कॉर्पोरेशन को निर्देश दिया है कि वह फ्रीज खातों की क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियों को मौजूदा बाज़ार मूल्य पर USDT में बदलकर पीड़िता के निर्धारित वॉलेट में स्थानांतरित करे। यह भारत में इस तरह की अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी में रकम वापसी की एक असाधारण न्यायिक मिसाल है।
ठगी की रकम को ट्रेस करने में किस तकनीक का उपयोग हुआ?
सीआईडी ने ब्लॉकचेन लेनदेन के विस्तृत तकनीकी विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय समन्वय के ज़रिए रकम की आवाजाही का पता लगाया। केंद्रीय गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने भी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई।
इस घोटाले में कौन-कौन से क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफॉर्म शामिल थे?
पीड़िता ने रॉबिनहुड समेत 13 नॉन-कस्टोडियल वॉलेट में धन ट्रांसफर किया था। ठगी की रकम बिटकॉइन, सोलाना और डॉजकॉइन के ज़रिए फर्जी प्लेटफॉर्म से होते हुए केमैन आइलैंड स्थित गेट ग्लोबल कॉर्पोरेशन और गेट आईओ एक्सचेंज तक पहुँची।
राष्ट्र प्रेस
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