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सीबीआई अकादमी में आईटीईसी कोर्स शुरू: 16 देशों के 24 अधिकारी भ्रष्टाचार-रोधी जांच और संपत्ति वसूली सीखेंगे

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सीबीआई अकादमी में आईटीईसी कोर्स शुरू: 16 देशों के 24 अधिकारी भ्रष्टाचार-रोधी जांच और संपत्ति वसूली सीखेंगे

सारांश

गाजियाबाद की सीबीआई अकादमी में एक सप्ताह का आईटीईसी कोर्स शुरू हुआ, जिसमें 16 देशों के 24 अधिकारी भ्रष्टाचार जांच और अवैध संपत्ति वसूली की तकनीकें सीखेंगे — यह भारत की कूटनीतिक क्षमता-निर्माण पहल का हिस्सा है।

मुख्य बातें

सीबीआई अकादमी, गाजियाबाद में 4 नवंबर 2026 को भ्रष्टाचार-रोधी जांच पर आईटीईसी कोर्स का उद्घाटन हुआ।
कोर्स में 16 आईटीईसी सदस्य देशों के 24 प्रतिभागी शामिल हैं।
प्रशिक्षण का आयोजन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के आईटीईसी कार्यक्रम के तहत एक सप्ताह के लिए किया गया है।
उद्घाटन सीबीआई अकादमी निदेशक सुहेल शर्मा ने किया; अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विशेष बल दिया गया।
कोर्स में वित्तीय जांच, अवैध संपत्ति जब्ती और सीमापार वसूली जैसे व्यावहारिक विषय शामिल हैं।
सीबीआई की स्थापना 1 अप्रैल 1963 को हुई थी; वर्तमान निदेशक प्रवीण सूद हैं।

गाजियाबाद स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अकादमी में 4 नवंबर 2026 (बुधवार) को 'भ्रष्टाचार-रोधी मामलों की जांच और संपत्ति की वसूली' विषय पर एक सप्ताह के इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन (आईटीईसी) प्रशिक्षण कोर्स का विधिवत उद्घाटन किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के आईटीईसी कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें 16 सदस्य देशों के कुल 24 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।

कोर्स का उद्देश्य और विषय-वस्तु

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मूल लक्ष्य भागीदार देशों के जांच अधिकारियों को भ्रष्टाचार से निपटने के लिए भारत के कानूनी और संस्थागत ढाँचे की व्यापक समझ देना है। कोर्स में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच, अपराध से अर्जित आय की पहचान और ट्रैकिंग, वित्तीय जांच की पद्धतियाँ, अवैध संपत्तियों की ज़ब्ती, तथा संपत्ति वसूली में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े व्यावहारिक कौशल शामिल हैं।

यह कार्यक्रम केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि केस-स्टडी और व्यावहारिक अभ्यास पर आधारित बताया जा रहा है, ताकि प्रतिभागी देश अपनी-अपनी प्रवर्तन एजेंसियों में इन तकनीकों का सीधा उपयोग कर सकें।

भागीदार देश

इस कोर्स में 16 आईटीईसी सदस्य देशों से प्रतिनिधि शामिल हैं — बोत्सवाना, इथियोपिया, घाना, इराक, लेबनान, मेडागास्कर, मालदीव, माली, मॉरीशस, म्यांमार, नामीबिया, नाइजीरिया, पनामा, पैराग्वे, तंजानिया और जिम्बाब्वे। इन देशों की भौगोलिक विविधता — अफ्रीका, एशिया, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका — इस कार्यक्रम के वैश्विक महत्व को रेखांकित करती है।

उद्घाटन समारोह और मुख्य संदेश

कोर्स का उद्घाटन सीबीआई अकादमी के निदेशक सुहेल शर्मा ने किया। इस अवसर पर उन्होंने भ्रष्टाचार से प्राप्त आय का पता लगाने और अवैध संपत्तियों की वसूली के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा समन्वित प्रयासों के महत्व पर विशेष ज़ोर दिया। गौरतलब है कि वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में सीमापार संपत्ति वसूली एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

सीबीआई और आईटीईसी की भूमिका

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की स्थापना 1 अप्रैल 1963 को हुई थी और यह देश की सबसे बड़ी आपराधिक जांच एजेंसी है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है और यह कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अधीन कार्य करती है। एजेंसी मुख्यतः गंभीर अपराधों, भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय महत्व के मामलों की जांच करती है। वर्तमान में इसके निदेशक प्रवीण सूद हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक मंचों पर भ्रष्टाचार-रोधी प्रशासन में अपनी विशेषज्ञता साझा करने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है। आईटीईसी कार्यक्रम दशकों से विकासशील देशों के साथ क्षमता-निर्माण में भारत का प्रमुख कूटनीतिक साधन रहा है।

आगे की राह

एक सप्ताह के इस गहन कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को भ्रष्टाचार-रोधी जांच में व्यावहारिक दक्षता के प्रमाणपत्र दिए जाएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की साझेदारी वैश्विक वित्तीय अपराध नेटवर्क के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई को मज़बूत बनाने में सहायक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें वह अपनी जांच विशेषज्ञता को 'सॉफ्ट पावर' के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। उल्लेखनीय है कि वैश्विक स्तर पर सीमापार संपत्ति वसूली अभी भी सबसे कमज़ोर कड़ी बनी हुई है — और भारत स्वयं कई बड़े आर्थिक भगोड़ों की संपत्ति वसूली में वर्षों से संघर्ष कर रहा है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या यह पहल केवल प्रतिष्ठा-निर्माण है, या सहभागी देशों के साथ ठोस पारस्परिक सहयोग समझौतों की दिशा में एक ठोस कदम — यह स्पष्टता आगे आने वाले कार्यक्रमों से ही मिलेगी।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई अकादमी में शुरू हुआ आईटीईसी कोर्स क्या है?
यह भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के आईटीईसी कार्यक्रम के तहत एक सप्ताह का प्रशिक्षण कोर्स है, जिसका विषय 'भ्रष्टाचार-रोधी मामलों की जांच और संपत्ति की वसूली' है। इसमें 16 देशों के 24 प्रतिभागी शामिल हैं और कोर्स गाजियाबाद स्थित सीबीआई अकादमी में आयोजित हो रहा है।
इस कोर्स में कौन-कौन से देश भाग ले रहे हैं?
कोर्स में 16 आईटीईसी सदस्य देश शामिल हैं — बोत्सवाना, इथियोपिया, घाना, इराक, लेबनान, मेडागास्कर, मालदीव, माली, मॉरीशस, म्यांमार, नामीबिया, नाइजीरिया, पनामा, पैराग्वे, तंजानिया और जिम्बाब्वे। इन सभी देशों से मिलाकर कुल 24 प्रतिभागी प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्या सिखाया जाएगा?
प्रतिभागियों को भ्रष्टाचार के मामलों की जांच, अपराध से अर्जित आय की पहचान और ट्रैकिंग, वित्तीय जांच, अवैध संपत्तियों की ज़ब्ती और संपत्ति वसूली में अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही भारत के कानूनी और संस्थागत ढाँचे की जानकारी भी दी जाएगी।
सीबीआई अकादमी के निदेशक कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
सीबीआई अकादमी के निदेशक सुहेल शर्मा हैं, जिन्होंने इस कोर्स का उद्घाटन किया। उन्होंने अवैध संपत्तियों की वसूली और भ्रष्टाचार से प्राप्त आय का पता लगाने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा समन्वित प्रयासों के महत्व पर ज़ोर दिया।
आईटीईसी कार्यक्रम क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
आईटीईसी (इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) भारत सरकार के विदेश मंत्रालय का एक दीर्घकालिक क्षमता-निर्माण कार्यक्रम है, जिसके तहत विकासशील देशों के अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। यह भारत की 'सॉफ्ट पावर' कूटनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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