कर्नाटक की 'गृह लक्ष्मी' योजना: 1.23 करोड़ लाभार्थियों की दोबारा जांच, ₹20 करोड़ का बजट तय
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार अपनी प्रमुख 'गृह लक्ष्मी' योजना के तहत पंजीकृत लगभग 1.23 करोड़ लाभार्थियों की व्यापक पुनः सत्यापन प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। इस कदम का मकसद अयोग्य, मृत या किसी अन्य कारण से अपात्र हो चुके लाभार्थियों को सूची से हटाना और यह सुनिश्चित करना है कि ₹2,000 प्रति माह की आर्थिक सहायता केवल वास्तविक जरूरतमंद महिलाओं तक पहुँचे। गारंटी कमेटी के चेयरमैन और वरिष्ठ नेता एच.एम. रेवन्ना इस विषय पर सोमवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से उनके आवास पर मुलाकात करेंगे, जिसके बाद आधिकारिक घोषणा की संभावना है।
पुनः सत्यापन की प्रक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, महिला एवं बाल कल्याण विभाग को यह पूरी प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है। जिला और तालुक स्तर पर स्थानीय गारंटी कमेटियों के सदस्यों की मदद से लाभार्थियों की जाँच की जाएगी। कर्मचारी एक विशेष ऐप के माध्यम से लाभार्थियों के घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे और फेस ऑथेंटिकेशन तथा बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए पहचान की पुष्टि की जाएगी।
किन लाभार्थियों पर होगी विशेष नज़र
सरकार उन लाभार्थियों की पहचान करने के लिए रिकॉर्ड की जाँच करेगी जो जीएसटी (GST) भर रहे हैं या आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल कर रहे हैं और इस प्रकार पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करते। इसके अतिरिक्त, उन लाभार्थियों के नाम भी सूची से हटाए जाएंगे जिनकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम पर अभी भी भुगतान जारी है। शहरी क्षेत्रों में रेवेन्यू इंस्पेक्टर और बिल कलेक्टर सत्यापन अभियान में सहयोग करेंगे।
योजना की पृष्ठभूमि और वित्तीय पैमाना
'गृह लक्ष्मी' योजना अगस्त 2023 में शुरू हुई थी और यह कर्नाटक में कांग्रेस सरकार द्वारा घोषित पाँच प्रमुख गारंटियों में से एक है। इस योजना के तहत घर की मुखिया मानी जाने वाली पात्र महिलाओं को हर महीने ₹2,000 की सहायता दी जाती है। सरकार इस योजना पर सालाना लगभग ₹32,000 करोड़ खर्च करती है और योजना शुरू होने के बाद से अब तक कुल ₹74,000 करोड़ से ₹76,500 करोड़ के बीच व्यय हो चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के वित्तीय संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
पुनः सत्यापन पर कितना खर्च
इस दोबारा जाँच प्रक्रिया के लिए लगभग ₹20 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग व रिसाव को रोकना है। गौरतलब है कि लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 1.23 करोड़ तक पहुँच जाने के बाद यह कदम और भी जरूरी हो गया था।
आगे क्या होगा
सोमवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार और रेवन्ना की बैठक के बाद पुनः सत्यापन की आधिकारिक समयसीमा और दिशानिर्देश जारी होने की संभावना है। यदि यह प्रक्रिया सफल रही, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी कल्याणकारी योजनाओं में पात्रता जाँच का एक मॉडल बन सकती है।