कर्नाटक हाईकोर्ट ने 20 मई की RTC बस हड़ताल पर लगाई रोक, ट्रांसपोर्ट मंत्री से वार्ता का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने मंगलवार, 19 मई 2026 को एक अहम अंतरिम आदेश जारी करते हुए ट्रांसपोर्ट यूनियनों को 20 मई से प्रस्तावित राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर आगे बढ़ने से रोक दिया। बेंगलुरु स्थित उच्च न्यायालय का यह आदेश उन यूनियनों के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के कर्मचारियों की विभिन्न माँगों को लेकर यह हड़ताल आह्वान की थी।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस सूरज गोविंदराज और जस्टिस के. मनमधा राव की डिवीजन बेंच ने यह आदेश एक घरेलू कामगार और एक निर्माण मजदूर द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका में प्रस्तावित हड़ताल को आम नागरिकों और परीक्षार्थियों के हित में रोकने की माँग की गई थी। बेंच ने राज्य सरकार और ट्रांसपोर्ट यूनियनों दोनों को नोटिस जारी करते हुए परिवहन मंत्री के साथ बैठक बुलाने का निर्देश दिया।
कानूनी आधार
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में लाया गया कि कर्नाटक आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम के तहत 1 जनवरी से 30 जून तक ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों की हड़ताल पर पहले से प्रतिबंध है। इसके अतिरिक्त, 18 जुलाई, 2025 को श्रम आयुक्त द्वारा आरंभ की गई सुलह प्रक्रिया अभी भी जारी है और इसकी अगली सुनवाई 25 मई को निर्धारित है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि यूनियनों ने अनिवार्य 14 दिनों की नोटिस अवधि के स्थान पर केवल 7 दिन का नोटिस जारी किया था, जो प्रक्रियागत रूप से अवैध है।
आम जनता और छात्रों पर असर
याचिका में विशेष रूप से इस बात पर ज़ोर दिया गया कि इसी अवधि में SSLC (कक्षा 10) की पूरक परीक्षाएँ निर्धारित हैं। हड़ताल होने की स्थिति में हज़ारों विद्यार्थियों के परीक्षा केंद्रों तक पहुँचने में गंभीर बाधा उत्पन्न होती। अदालत ने इस पहलू को संज्ञान में लेते हुए जनहित को प्राथमिकता दी।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य के गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने हड़ताल की घोषणा के बाद कहा था कि मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री इस मुद्दे पर नज़र रख रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने भी उनसे बात की थी। वे काले झंडे दिखाने का विरोध-प्रदर्शन न करने पर सहमत हो गए हैं। 20 मई के बाद, अगर वे चाहें, तो मुख्यमंत्री उनसे मुलाकात करेंगे।' इससे पहले KSRTC ने भी अपने कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी दी थी कि वे इस हड़ताल में भाग न लें।
आगे क्या होगा
उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बाद अब सुलह प्रक्रिया की अगली सुनवाई 25 मई को होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और यूनियनें वार्ता के ज़रिए किस हद तक सहमति बना पाती हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब कर्नाटक में ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों की हड़ताल को न्यायालय के हस्तक्षेप से रोका गया हो — यह पैटर्न दर्शाता है कि श्रम विवाद और आवश्यक सेवाओं के बीच संतुलन अभी भी एक अनसुलझी चुनौती है।