बेंगलुरु में SIR ड्यूटी पर तैनात सरकारी अधिकारी पर हमला, तीन आरोपियों पर FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु के डीजे हल्ली इलाके में 29 जुलाई 2026 को मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी पर कथित तौर पर हमला किया गया, जिसके बाद देवराजीवनहल्ली पुलिस ने तीन व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पीड़ित अधिकारी को पुलकेशी नगर विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 47 में सुपरवाइजरी ऑफिसर के रूप में तैनात किया गया था।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला
शिकायत के अनुसार, स्लम बोर्ड और डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के सुपरिटेंडेंट रैंक के यह अधिकारी रोशन नगर स्थित कौसर मस्जिद के पास 11 बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) के कार्य का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने यारब और दस्तगीर नामक दो युवकों को एसआईआर फॉर्म जारी करने को लेकर बीएलओ से विवाद करते हुए पाया।
शिकायत के अनुसार, जब बीएलओ ने दोनों युवकों — जिन्होंने खुद को जयनगर का निवासी बताया — को सलाह दी कि वे अपने निवास स्थान से ही एसआईआर फॉर्म प्राप्त करें, तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। जब सुपरवाइजिंग ऑफिसर ने स्थिति को शांत करने का प्रयास किया, तो एक आरोपी ने कथित तौर पर उनके मुँह पर मुक्का मारा, जिससे उनके होंठ से खून निकलने लगा, जबकि दूसरे ने उनकी भौंह के पास और पीठ पर प्रहार किया।
आसपास मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद हमला रुका। घटना के बाद पीड़ित अधिकारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया, अंबेडकर अस्पताल में उपचार कराया और फिर देवराजीवनहल्ली पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएँ
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें धारा 121(1) (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए जानबूझकर चोट पहुँचाना), धारा 132 (सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और धारा 3(5) (साझा इरादा) शामिल हैं।
SIR प्रक्रिया और उसका महत्व
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन और सटीक बनाने की एक विशेष प्रक्रिया है। इस दौरान बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं और नए नामांकन प्रपत्र जारी करते हैं। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब चुनावी तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं और सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा एक अहम सवाल बन गई है।
आम जनता और प्रशासन पर असर
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब चुनावी ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मियों को कार्यस्थल पर हिंसा का सामना करना पड़ा हो। ऐसी घटनाएँ चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और मैदानी अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाती हैं। प्रशासनिक हलकों में यह माँग उठ रही है कि एसआईआर जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं के दौरान सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
मामले में आगे की जाँच देवराजीवनहल्ली पुलिस कर रही है और आरोपियों की गिरफ्तारी की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।