7 जुलाई 2026
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विश्व बैंक की 'अपर मिडिल इनकम' श्रेणी में कर्नाटक की एंट्री, सीएम शिवकुमार बोले — हर कन्नड़वासी के लिए गर्व

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विश्व बैंक की 'अपर मिडिल इनकम' श्रेणी में कर्नाटक की एंट्री, सीएम शिवकुमार बोले — हर कन्नड़वासी के लिए गर्व

सारांश

विश्व बैंक की 'अपर मिडिल इनकम' श्रेणी में कर्नाटक की एंट्री — सीएम शिवकुमार ने इसे किसानों, उद्यमियों और युवाओं की मेहनत का फल बताया। साथ ही कल्याण कर्नाटक में सूखे की समीक्षा और 'प्रजा सेवा विभाग' के ज़रिए राहत का भरोसा दिया।

मुख्य बातें

कर्नाटक ने विश्व बैंक की 'अपर मिडिल इनकम' श्रेणी की सीमा पार की — सीएम डी.के.
शिवकुमार ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री ने उपलब्धि का श्रेय राज्य के उद्यमियों, किसानों, श्रमिकों, महिलाओं और युवाओं को दिया।
कांग्रेस की पाँच गारंटी योजनाओं को समावेशी विकास की नींव बताया; कहा — ये 'लोगों में निवेश' हैं।
सरकार का अगला लक्ष्य अधिक रोज़गार सृजन और कर्नाटक को देश का नंबर एक राज्य बनाना।
कल्याण कर्नाटक में सूखे का व्यापक आकलन जारी; बीदर सहित कई ज़िलों से ज्ञापन प्राप्त।
'प्रजा सेवा विभाग' की स्थापना; अलग मंत्रालय गठित — राहत व मुआवज़े की प्रक्रिया कानूनी ढाँचे के तहत होगी।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 7 जुलाई को कहा कि विश्व बैंक की 'अपर मिडिल इनकम' (उच्च मध्यम आय) श्रेणी की सीमा पार करना राज्य के इतिहास में एक ऐतिहासिक पड़ाव है, जो देश के अग्रणी राज्यों में कर्नाटक की स्थिति को और मज़बूत करता है। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य के उद्यमियों, किसानों, श्रमिकों, महिलाओं और युवाओं की सामूहिक मेहनत और नवाचार को दिया।

उपलब्धि का महत्व

शिवकुमार ने कहा, 'यह हर कन्नड़वासी के लिए गर्व का क्षण है। हमारे उद्यमियों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं की मेहनत और नवाचार ने कर्नाटक को इस मुकाम तक पहुँचाया है।' यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारतीय राज्य राष्ट्रीय GDP में अपनी हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं और कर्नाटक प्रौद्योगिकी व निर्यात के मोर्चे पर अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

गौरतलब है कि विश्व बैंक की 'अपर मिडिल इनकम' श्रेणी एक निर्धारित प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) सीमा पार करने पर मिलती है, जो किसी अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक प्रगति का संकेतक मानी जाती है।

पाँच गारंटी योजनाओं की भूमिका

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार की पाँच गारंटी योजनाओं का बचाव करते हुए कहा कि ये योजनाएँ समावेशी विकास की रीढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, 'हमारी पाँच गारंटी योजनाएँ केवल कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि लोगों में किया गया निवेश हैं। परिवारों की आय बढ़ाकर, आजीविका को सुरक्षित बनाकर और नए अवसर उपलब्ध कराकर हमने साबित किया है कि समावेशी विकास ही दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति की सबसे मज़बूत नींव है।'

शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि सरकार का अगला लक्ष्य अधिक रोज़गार और आर्थिक अवसर सृजित करना है, ताकि विकास का लाभ राज्य के हर परिवार तक पहुँचे और कर्नाटक देश का नंबर एक राज्य बन सके।

कल्याण कर्नाटक में सूखे की समीक्षा

कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में सूखे की स्थिति का व्यापक आकलन कर रही है। जाँच और सत्यापन के बाद पात्र लोगों को राहत और मुआवज़ा प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वह क्षेत्र का व्यक्तिगत दौरा कर ज़मीनी हालात का जायज़ा ले रहे हैं और स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहे हैं। अगले दो-तीन दिनों में वह बेलगावी का भी दौरा करेंगे।

राहत प्रक्रिया और प्रजा सेवा विभाग

शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि किसी क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर राहत पैकेज जारी करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। बीदर और कल्याण कर्नाटक के अन्य हिस्सों से सरकार को कई ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।

जनता की समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए सरकार ने 'प्रजा सेवा विभाग' की स्थापना की है और इसके लिए अलग मंत्रालय भी गठित किया है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सभी ज्ञापनों की विस्तार से जाँच की जाएगी और जहाँ राहत की आवश्यकता होगी, वहाँ पूरी संवेदनशीलता के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।

आगे की राह

कर्नाटक की यह उपलब्धि राज्य की आर्थिक नीतियों की दिशा पर नई बहस छेड़ सकती है — विशेष रूप से तब, जब विपक्ष गारंटी योजनाओं पर राजकोषीय दबाव के सवाल उठाता रहा है। आने वाले महीनों में सूखा राहत की प्रक्रिया और रोज़गार सृजन के आँकड़े यह तय करेंगे कि यह आर्थिक प्रगति कितनी समावेशी रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि यह समृद्धि राज्य के उत्तरी और पिछड़े हिस्सों — जैसे कल्याण कर्नाटक — तक कितनी पहुँची है, जहाँ आज भी सूखा राहत के लिए ज्ञापनों की लंबी कतार है। पाँच गारंटी योजनाओं को समावेशी विकास का आधार बताना राजनीतिक दृष्टि से सुविधाजनक है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि इन योजनाओं के राजकोषीय बोझ और दीर्घकालिक रोज़गार सृजन पर स्वतंत्र मूल्यांकन अभी भी अनुपलब्ध है। 'नंबर एक राज्य' का लक्ष्य तब तक अधूरा है जब तक बेंगलुरु की चमक कलबुर्गी और बीदर के खेतों तक नहीं पहुँचती।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व बैंक की 'अपर मिडिल इनकम' श्रेणी क्या है और कर्नाटक ने इसे कैसे हासिल किया?
विश्व बैंक एक निर्धारित प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI) सीमा पार करने पर किसी अर्थव्यवस्था को 'अपर मिडिल इनकम' श्रेणी में रखता है, जो दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति का मानक संकेतक है। कर्नाटक ने उद्योग, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र में विस्तार के दम पर यह सीमा पार की है।
सीएम शिवकुमार ने इस उपलब्धि का श्रेय किसे दिया?
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इस उपलब्धि का श्रेय राज्य के उद्यमियों, किसानों, श्रमिकों, महिलाओं और युवाओं को दिया। उन्होंने कांग्रेस सरकार की पाँच गारंटी योजनाओं को भी समावेशी विकास में सहायक बताया।
कर्नाटक की पाँच गारंटी योजनाएँ क्या हैं और इनका अर्थव्यवस्था से क्या संबंध है?
कांग्रेस सरकार की पाँच गारंटी योजनाओं में परिवारों को आय सहायता, मुफ्त बिजली, और महिला सशक्तीकरण से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। सीएम शिवकुमार के अनुसार, इन योजनाओं ने आजीविका सुरक्षित कर और नए अवसर देकर समावेशी आर्थिक विकास को बल दिया है।
कल्याण कर्नाटक में सूखे की स्थिति पर सरकार क्या कदम उठा रही है?
राज्य सरकार कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में सूखे की स्थिति का व्यापक आकलन कर रही है। जाँच और सत्यापन के बाद पात्र लोगों को कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत और मुआवज़ा दिया जाएगा; सीएम शिवकुमार स्वयं क्षेत्र का दौरा कर ज़मीनी हालात देख रहे हैं।
'प्रजा सेवा विभाग' क्या है और यह कैसे काम करेगा?
'प्रजा सेवा विभाग' कर्नाटक सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए स्थापित नया विभाग है, जिसके लिए अलग मंत्रालय भी गठित किया गया है। बीदर और कल्याण कर्नाटक से प्राप्त सभी ज्ञापनों की इसी विभाग के माध्यम से विस्तार से जाँच होगी।
राष्ट्र प्रेस
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