करतार सिंह सराभा जयंती 2026: हरियाणा-राजस्थान के मुख्यमंत्रियों समेत कई नेताओं ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
24 मई 2026 को गदर आंदोलन के अमर क्रांतिकारी शहीद करतार सिंह सराभा की जयंती पर देशभर के राजनेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह उन उल्लेखनीय नामों में शामिल रहे जिन्होंने उस युवा क्रांतिकारी को याद किया, जिन्होंने मात्र 19 वर्ष की आयु में भारत की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी।
शहीद सराभा: एक युवा क्रांतिकारी की विरासत
करतार सिंह सराभा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन विरले नायकों में से थे जिन्होंने अपनी किशोरावस्था में ही देश की आज़ादी का बीड़ा उठाया। गदर आंदोलन में उनकी केंद्रीय भूमिका और अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध उनके अदम्य साहस ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमर कर दिया। उनके बलिदान ने आने वाली पीढ़ियों के क्रांतिकारियों को प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्रियों की श्रद्धांजलि
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, 'मां भारती की आजादी के लिए अल्पायु में ही अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महान क्रांतिकारी शहीद करतार सिंह सराभा की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं कोटिशः नमन।' सैनी ने आगे कहा कि सराभा का साहस, राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर क्रांतिकारी एवं अदम्य राष्ट्रभक्ति के प्रतीक करतार सिंह सराभा की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। मातृभूमि के लिए उनका साहस, त्याग और बलिदान देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।'
राज्यपाल और अन्य नेताओं का नमन
मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह ने कहा, 'भारत माता के वीर सपूत, महान क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा की जयंती पर शत्-शत् नमन। कम आयु में ही उन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर युवाओं के लिए साहस, देशभक्ति और त्याग का अमर उदाहरण प्रस्तुत किया।'
राजस्थान के शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि अल्पायु में ही अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की जो मिसाल सराभा ने प्रस्तुत की, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व सांसद डॉ. संघमित्रा मौर्य ने भी उन्हें 'मातृभूमि का सबसे युवा सपूत' कहते हुए नमन किया।
गदर आंदोलन और सराभा की प्रासंगिकता
गौरतलब है कि गदर आंदोलन बीसवीं सदी के आरंभ में प्रवासी भारतीयों द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संगठित एक क्रांतिकारी अभियान था, जिसमें सराभा की भूमिका केंद्रीय थी। यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को पुनः राष्ट्रीय विमर्श में स्थान दिलाने की माँग विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक मंचों पर उठती रही है।
युवा पीढ़ी के लिए संदेश
तमाम नेताओं ने एकमत से यह संदेश दिया कि सराभा का जीवन आज के युवाओं के लिए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा है। शहीद करतार सिंह सराभा की स्मृति को जीवित रखना और उनके आदर्शों को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।