13 जुलाई 2026
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वीर सावरकर जयंती 2026: योगी आदित्यनाथ, नायब सिंह सैनी समेत कई नेताओं ने किया नमन

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वीर सावरकर जयंती 2026: योगी आदित्यनाथ, नायब सिंह सैनी समेत कई नेताओं ने किया नमन

सारांश

वीर सावरकर की जयंती पर CM योगी, हरियाणा CM सैनी, नितिन गडकरी समेत दर्जनों नेताओं ने नमन किया। कालापानी की यातनाओं के बावजूद अटूट रहे इस स्वतंत्रता सेनानी की विरासत आज भी भारतीय राजनीति में सबसे जीवंत और विमर्शित विषयों में से एक है।

मुख्य बातें

28 मई 2026 को स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर देशभर के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी 'क्रांतिकारी चेतना और संघर्षपूर्ण जीवन' को राष्ट्रहित में प्रेरणा का स्रोत बताया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक्स पर पोस्ट कर कालापानी की यातनाओं के बावजूद सावरकर के अटूट संकल्प को याद किया।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सावरकर को 'महान क्रांतिकारी, लेखक, समाज सुधारक' बताते हुए सशस्त्र क्रांति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया और मंत्री ए.के.
शर्मा ने भी सावरकर के त्याग और बलिदान को करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर 28 मई 2026 को देशभर के प्रमुख नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सावरकर के अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति और कालापानी की यातनाओं के बावजूद अटूट संकल्प को याद किया। नेताओं ने उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सावरकर को 'मां भारती के अमर सपूत' बताते हुए कहा कि राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए कठोरतम अमानवीय यातनाएं सहकर अपना जीवन मातृभूमि के चरणों में अर्पित करने वाले इस महान स्वतंत्रता सेनानी की 'क्रांतिकारी चेतना और संघर्षपूर्ण जीवन हमें सदैव राष्ट्रहित में समर्पण, साहस और अटूट संकल्प का अमूल्य संदेश देता रहेगा।'

हरियाणा सीएम सैनी और अन्य नेताओं के संदेश

एक्स पर एक पोस्ट में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लिखा कि अंग्रेजों द्वारा कालापानी की कठोर यातनाएं झेलने के बावजूद वीर सावरकर का स्वतंत्र भारत का संकल्प कभी नहीं डगमगाया और उनका 'अदम्य साहस, राष्ट्रभक्ति, त्याग और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।'

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सावरकर ने स्वतंत्रता के साथ-साथ सांस्कृतिक स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना के जागरण के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनके अनुसार, 'भारत से इंग्लैंड तक स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म के लिए किया गया उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।'

केंद्रीय मंत्री और सांसदों की प्रतिक्रिया

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सावरकर को 'महान क्रांतिकारी, लेखक, समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी' बताते हुए कहा कि उन्होंने सशस्त्र क्रांति का पुरजोर समर्थन किया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि मातृभूमि के लिए सावरकर का त्याग और बलिदान करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणास्रोत है।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ए.के. शर्मा ने सावरकर को 'स्वातंत्र्यवीर, महान क्रांतिकारी, चिंतक, लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता' के रूप में याद किया और उन्हें शत्-शत् नमन किया।

सावरकर का ऐतिहासिक योगदान

गौरतलब है कि विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति के प्रबल समर्थक सावरकर को अंग्रेजों ने अंडमान की सेलुलर जेल में कालापानी की सज़ा दी, जहाँ उन्होंने वर्षों तक अमानवीय यातनाएं सहीं। उनकी क्रांतिकारी विचारधारा और लेखनी ने स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक ऊर्जा प्रदान की और हिंदुत्व की अवधारणा को एक राजनीतिक-सांस्कृतिक आयाम दिया।

राजनीतिक महत्व और आगे की दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब सावरकर का मूल्यांकन भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। BJP और उससे जुड़े संगठन उन्हें स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि विपक्षी दल उनकी विरासत को लेकर भिन्न दृष्टिकोण रखते हैं। प्रत्येक वर्ष उनकी जयंती राष्ट्रवादी विमर्श को नई ऊर्जा देती है और उनके योगदान पर बहस को जीवंत रखती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित राजनीतिक संदेश है — जो स्वतंत्रता संग्राम की वैकल्पिक व्याख्या को मुख्यधारा में स्थापित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः श्रद्धांजलियों को सूचीबद्ध करने तक सीमित रहती है, लेकिन असली सवाल यह है कि सावरकर की विरासत पर राष्ट्रीय सहमति अभी भी क्यों नहीं बन पाई। उनकी जयंती हर वर्ष उस बहस को ताज़ा करती है जो इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से लेकर संसद तक चलती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीर सावरकर की जयंती कब मनाई जाती है?
वीर सावरकर की जयंती प्रत्येक वर्ष 28 मई को मनाई जाती है। उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था।
कालापानी की सज़ा क्या थी और सावरकर को यह क्यों दी गई?
कालापानी अंडमान की सेलुलर जेल में दी जाने वाली कठोरतम ब्रिटिश सज़ा थी, जहाँ कैदियों को अमानवीय परिस्थितियों में रखा जाता था। सावरकर को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण यह सज़ा दी गई थी।
2026 की जयंती पर किन-किन नेताओं ने श्रद्धांजलि दी?
28 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, मंत्री ए.के. शर्मा और BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
सावरकर को राष्ट्रवादी विचारक क्यों कहा जाता है?
सावरकर ने हिंदुत्व की अवधारणा को एक राजनीतिक-सांस्कृतिक आयाम दिया और सांस्कृतिक स्वाभिमान के साथ-साथ सशस्त्र क्रांति के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्ति पर बल दिया। उनकी लेखनी और विचारधारा ने स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक ऊर्जा प्रदान की।
सावरकर की विरासत पर भारतीय राजनीति में मतभेद क्यों हैं?
BJP और संबद्ध संगठन सावरकर को स्वतंत्रता संग्राम के महानायक के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि विपक्षी दल उनकी विरासत के कुछ पहलुओं पर भिन्न दृष्टिकोण रखते हैं। यह विमर्श इतिहास की व्याख्या और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ा एक जटिल प्रश्न बना हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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