13 जुलाई 2026
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वीर सावरकर जयंती पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में अर्पित की पुष्पांजलि, कहा — युवाओं में जगाई देशभक्ति की अलख

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वीर सावरकर जयंती पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में अर्पित की पुष्पांजलि, कहा — युवाओं में जगाई देशभक्ति की अलख

सारांश

वीर सावरकर की जयंती पर संसद के केंद्रीय कक्ष में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पुष्पांजलि अर्पित की। जेपी नड्डा, किरेन रिजिजू और अर्जुनराम मेघवाल सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। बिरला ने एक्स पर सावरकर को 'त्याग, साहस और अटूट इच्छाशक्ति का अद्वितीय उदाहरण' बताया।

मुख्य बातें

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 28 मई 2026 को संसद के केंद्रीय कक्ष में वीर सावरकर को पुष्पांजलि अर्पित की।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा , किरेन रिजिजू और अर्जुनराम मेघवाल सहित BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी उपस्थित रहे।
बिरला ने एक्स पर सावरकर को 'मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक' और युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाने वाला बताया।
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था; वे क्रांतिकारी, कवि, लेखक और समाज सुधारक थे।
सावरकर ने अंडमान की सेल्युलर जेल में कठोर कारावास सहते हुए भी स्वतंत्रता के संकल्प को अडिग रखा।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 28 मई 2026 को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर संसद के केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और पूर्व सांसदों ने भी वीर सावरकर को श्रद्धांजलि दी।

मुख्य घटनाक्रम

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उपस्थित रहे। संसद सदस्यों और पूर्व सांसदों ने भी इस अवसर पर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।

ओम बिरला ने एक्स पर क्या लिखा

ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण के प्रतीक, महान क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पित की। स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने न केवल देश में, बल्कि विदेशों में रहकर भी क्रांतिकारी विचारधारा को मजबूत किया और अनेक युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई। अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध उनके विचार, लेखनी और संगठन क्षमता ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।'

उन्होंने आगे लिखा, 'कठोर कारावास और प्रताड़नाओं के बावजूद उन्होंने हर परिस्थिति में राष्ट्रहित और स्वाधीनता के संकल्प को सर्वोपरि रखा। सावरकर जी का जीवन त्याग, संघर्ष, साहस और अटूट इच्छाशक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। भारत की एकता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनका चिंतन आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करता है।'

वीर सावरकर: एक परिचय

विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में वे क्रांतिकारी, कवि, लेखक और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं। 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दौर में उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

सेल्युलर जेल और संघर्ष की विरासत

सावरकर का अदम्य साहस अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की कुख्यात सेल्युलर जेल में कारावास के दौरान विशेष रूप से उभरकर सामने आया, जहाँ उन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों का दृढ़ संकल्प के साथ सामना किया। उन्होंने युवाओं को संगठित करने के लिए क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना की और तर्कवाद, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा प्रगतिशील भारतीय समाज के निर्माण के आदर्शों का समर्थन किया।

आज भी जीवित है उनकी प्रेरणा

सावरकर की विरासत उनके लेखन, राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए उनके अथक प्रयासों और एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के माध्यम से आज भी जीवित है। गौरतलब है कि उनकी जयंती प्रत्येक वर्ष संसद परिसर में राष्ट्रीय स्तर पर मनाई जाती है, जो उनके योगदान की स्थायी स्वीकृति को दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी ओर उनकी विचारधारा और माफीनामों पर इतिहासकारों के बीच गहरे मतभेद हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस द्वंद्व को नज़रअंदाज़ कर देती है। जवाबदेही की दृष्टि से यह ज़रूरी है कि सावरकर की विरासत पर राष्ट्रीय विमर्श तथ्यों की पूरी परतों के साथ हो — न कि केवल एक पक्ष की आधिकारिक आख्यान के रूप में।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीर सावरकर की जयंती कब है और उनका जन्म कब हुआ था?
वीर सावरकर की जयंती 28 मई को मनाई जाती है। विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी, कवि, लेखक और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सावरकर जयंती पर क्या किया?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 28 मई 2026 को संसद के केंद्रीय कक्ष में वीर सावरकर को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने एक्स पर सावरकर को 'त्याग, संघर्ष, साहस और अटूट इच्छाशक्ति का अद्वितीय उदाहरण' बताया।
सावरकर जयंती कार्यक्रम में कौन-कौन से वरिष्ठ नेता उपस्थित थे?
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, किरेन रिजिजू और अर्जुनराम मेघवाल के साथ-साथ BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, संसद सदस्य और पूर्व सांसद उपस्थित रहे।
वीर सावरकर को सेल्युलर जेल से क्यों जोड़ा जाता है?
वीर सावरकर को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की कुख्यात सेल्युलर जेल में कारावास दिया गया था। वहाँ अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपने राष्ट्रवादी संकल्प को बनाए रखा, जो उनके अदम्य साहस का प्रतीक माना जाता है।
सावरकर का सामाजिक सुधारों में क्या योगदान था?
क्रांतिकारी विचारों के अतिरिक्त सावरकर तर्कवाद, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और प्रगतिशील भारतीय समाज के निर्माण के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने जाति-भेद और अन्य सामाजिक विभाजनों के विरुद्ध आवाज़ उठाई और आधुनिकीकरण की वकालत की।
राष्ट्र प्रेस
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