वीर सावरकर जयंती पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में अर्पित की पुष्पांजलि, कहा — युवाओं में जगाई देशभक्ति की अलख
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 28 मई 2026 को स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की जयंती पर संसद के केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और पूर्व सांसदों ने भी वीर सावरकर को श्रद्धांजलि दी।
मुख्य घटनाक्रम
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुनराम मेघवाल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन उपस्थित रहे। संसद सदस्यों और पूर्व सांसदों ने भी इस अवसर पर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
ओम बिरला ने एक्स पर क्या लिखा
ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण के प्रतीक, महान क्रांतिकारी विनायक दामोदर सावरकर जी की जयंती पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में पुष्पांजलि अर्पित की। स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी ने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया। उन्होंने न केवल देश में, बल्कि विदेशों में रहकर भी क्रांतिकारी विचारधारा को मजबूत किया और अनेक युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई। अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध उनके विचार, लेखनी और संगठन क्षमता ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।'
उन्होंने आगे लिखा, 'कठोर कारावास और प्रताड़नाओं के बावजूद उन्होंने हर परिस्थिति में राष्ट्रहित और स्वाधीनता के संकल्प को सर्वोपरि रखा। सावरकर जी का जीवन त्याग, संघर्ष, साहस और अटूट इच्छाशक्ति का अद्वितीय उदाहरण है। भारत की एकता, आत्मगौरव और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनका चिंतन आज भी करोड़ों देशवासियों को प्रेरित करता है।'
वीर सावरकर: एक परिचय
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख व्यक्तित्व के रूप में वे क्रांतिकारी, कवि, लेखक और समाज सुधारक के रूप में जाने जाते हैं। 20वीं शताब्दी के प्रारंभिक दौर में उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सेल्युलर जेल और संघर्ष की विरासत
सावरकर का अदम्य साहस अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की कुख्यात सेल्युलर जेल में कारावास के दौरान विशेष रूप से उभरकर सामने आया, जहाँ उन्होंने अत्यंत कठिन परिस्थितियों का दृढ़ संकल्प के साथ सामना किया। उन्होंने युवाओं को संगठित करने के लिए क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना की और तर्कवाद, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा प्रगतिशील भारतीय समाज के निर्माण के आदर्शों का समर्थन किया।
आज भी जीवित है उनकी प्रेरणा
सावरकर की विरासत उनके लेखन, राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए उनके अथक प्रयासों और एक सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के माध्यम से आज भी जीवित है। गौरतलब है कि उनकी जयंती प्रत्येक वर्ष संसद परिसर में राष्ट्रीय स्तर पर मनाई जाती है, जो उनके योगदान की स्थायी स्वीकृति को दर्शाती है।