13 जुलाई 2026
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वीर सावरकर की 143वीं जयंती: भारत रत्न की मांग फिर तेज, BJP-शिवसेना नेताओं ने केंद्र से की अपील

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वीर सावरकर की 143वीं जयंती: भारत रत्न की मांग फिर तेज, BJP-शिवसेना नेताओं ने केंद्र से की अपील

सारांश

सावरकर की 143वीं जयंती पर BJP और शिवसेना ने एकस्वर में भारत रत्न की मांग दोहराई। महाराष्ट्र मंत्री गिरीश महाजन ने विधानसभा प्रस्ताव का हवाला दिया, तो शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने केंद्र से तत्काल फैसले की अपील की — एक विवाद जो दशकों से भारतीय राजनीति में जीवित है।

मुख्य बातें

वीर सावरकर की 143वीं जयंती पर 28 मई 2026 को भारत रत्न देने की मांग फिर तेज हुई।
महाराष्ट्र मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा पहले ही एकमत से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेज चुकी है।
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने केंद्र सरकार से जल्द ठोस फैसले की अपील की।
ग्रेटर नोएडा में सेमिनार में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि मोदी कार्यकाल में पहली बार सावरकर को महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मान मिला।
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

विनायक दामोदर सावरकर की 143वीं जयंती पर 28 मई 2026 को देशभर में उन्हें भारत रत्न देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के नेताओं ने एकस्वर में केंद्र सरकार से अपील की कि स्वतंत्रता संग्राम में सावरकर के योगदान को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से मान्यता दी जाए। यह मांग वर्षों से उठती रही है, लेकिन इस बार महाराष्ट्र सरकार के स्तर पर विधानसभा प्रस्ताव का हवाला देकर इसे नई धार दी गई।

मंत्री गिरीश महाजन का बयान

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि देश की आजादी में विनायक दामोदर सावरकर का योगदान असाधारण रहा है और इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा पहले ही एकमत से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। महाजन ने कहा, 'वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। देश की आजादी में वीर सावरकर का योगदान बहुत बड़ा है। हमने भी मांग की है। विधानसभा में भी हमने एकमत से प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार को भेजा था। हम निश्चित रूप से उस पर भी अमल करेंगे।'

शिवसेना नेता मनीषा कायंदे की अपील

शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने भी सावरकर को भारत रत्न देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से यह मांग करती आ रही है और अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार इस पर ठोस फैसला ले। कायंदे के अनुसार यह केवल किसी एक दल की भावना नहीं, बल्कि व्यापक जनमत है कि सावरकर के राष्ट्रीय योगदान को उचित सम्मान मिले।

ग्रेटर नोएडा में सेमिनार, आचार्य प्रमोद कृष्णम का संबोधन

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक सेमिनार में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने महंत अवैद्यनाथ और वीर सावरकर दोनों की जयंती के अवसर पर उनके योगदान को याद किया। कृष्णम ने कहा कि सावरकर ने देश की आजादी के लिए कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया, फिर भी स्वतंत्रता के बाद उन्हें उचित न्याय नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा, 'नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह पहला ऐसा दशक है जब वीर सावरकर को महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित करने का फैसला लिया गया।'

विवाद और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि सावरकर का ऐतिहासिक मूल्यांकन भारतीय राजनीति में दशकों से विवाद का विषय रहा है। उनके समर्थक उन्हें क्रांतिकारी राष्ट्रवादी और 'हिंदुत्व' के प्रणेता के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि अंडमान की जेल से उनकी माफी याचिकाएँ और द्विराष्ट्र सिद्धांत पर उनके विचार उनकी विरासत को विवादास्पद बनाते हैं। भारत रत्न की यह मांग पहली बार नहीं उठी है — महाराष्ट्र विधानसभा पहले भी इस आशय का प्रस्ताव पारित कर चुकी है।

आगे क्या होगा

केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। BJP और शिवसेना नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहेंगे। यह मांग आने वाले विधानसभा सत्रों और राजनीतिक बहसों में भी केंद्र में बनी रह सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह मुद्दा बार-बार उठता और ठंडे बस्ते में जाता रहा है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार इस बार राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएगी या यह मांग अगली जयंती तक फिर स्थगित रहेगी। सावरकर की विरासत पर ऐतिहासिक बहस अभी भी अनसुलझी है — उनके समर्थक और आलोचक दोनों अपने-अपने तर्कों पर अडिग हैं — और भारत रत्न की घोषणा इस विवाद को सुलझाने के बजाय और गहरा भी कर सकती है। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः इस राजनीतिक माँग को दोहराती है, लेकिन उस व्यापक ऐतिहासिक बहस को नज़रअंदाज़ करती है जो इस निर्णय को वास्तव में जटिल बनाती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग क्यों उठ रही है?
BJP और शिवसेना नेताओं का कहना है कि विनायक दामोदर सावरकर ने देश की आजादी में असाधारण योगदान दिया, जिसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से मान्यता मिलनी चाहिए। महाराष्ट्र विधानसभा पहले भी इस आशय का प्रस्ताव एकमत से पारित कर केंद्र को भेज चुकी है।
सावरकर की 143वीं जयंती कब मनाई गई?
वीर सावरकर की 143वीं जयंती 28 मई 2026 को मनाई गई। इस अवसर पर मुंबई से लेकर ग्रेटर नोएडा तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए।
महाराष्ट्र सरकार ने इस मांग पर क्या कदम उठाए हैं?
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन के अनुसार, महाराष्ट्र विधानसभा पहले ही एकमत से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर अमल करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या केंद्र सरकार ने सावरकर को भारत रत्न देने पर कोई फैसला किया है?
अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। BJP और शिवसेना नेताओं ने कहा है कि वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे।
सावरकर की विरासत को लेकर विवाद क्यों है?
सावरकर के समर्थक उन्हें क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी और हिंदुत्व के प्रणेता मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि अंडमान जेल से उनकी माफी याचिकाएँ और द्विराष्ट्र सिद्धांत पर उनके विचार उनकी विरासत को विवादास्पद बनाते हैं। यह बहस दशकों से भारतीय राजनीति और इतिहास-लेखन में जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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