वीर सावरकर की 143वीं जयंती: भारत रत्न की मांग फिर तेज, BJP-शिवसेना नेताओं ने केंद्र से की अपील
सारांश
मुख्य बातें
विनायक दामोदर सावरकर की 143वीं जयंती पर 28 मई 2026 को देशभर में उन्हें भारत रत्न देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना के नेताओं ने एकस्वर में केंद्र सरकार से अपील की कि स्वतंत्रता संग्राम में सावरकर के योगदान को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से मान्यता दी जाए। यह मांग वर्षों से उठती रही है, लेकिन इस बार महाराष्ट्र सरकार के स्तर पर विधानसभा प्रस्ताव का हवाला देकर इसे नई धार दी गई।
मंत्री गिरीश महाजन का बयान
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि देश की आजादी में विनायक दामोदर सावरकर का योगदान असाधारण रहा है और इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र विधानसभा पहले ही एकमत से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। महाजन ने कहा, 'वीर सावरकर को भारत रत्न दिया जाना चाहिए। देश की आजादी में वीर सावरकर का योगदान बहुत बड़ा है। हमने भी मांग की है। विधानसभा में भी हमने एकमत से प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार को भेजा था। हम निश्चित रूप से उस पर भी अमल करेंगे।'
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे की अपील
शिवसेना नेता मनीषा कायंदे ने भी सावरकर को भारत रत्न देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से यह मांग करती आ रही है और अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार इस पर ठोस फैसला ले। कायंदे के अनुसार यह केवल किसी एक दल की भावना नहीं, बल्कि व्यापक जनमत है कि सावरकर के राष्ट्रीय योगदान को उचित सम्मान मिले।
ग्रेटर नोएडा में सेमिनार, आचार्य प्रमोद कृष्णम का संबोधन
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आयोजित एक सेमिनार में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने महंत अवैद्यनाथ और वीर सावरकर दोनों की जयंती के अवसर पर उनके योगदान को याद किया। कृष्णम ने कहा कि सावरकर ने देश की आजादी के लिए कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया, फिर भी स्वतंत्रता के बाद उन्हें उचित न्याय नहीं मिला। उन्होंने यह भी कहा, 'नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह पहला ऐसा दशक है जब वीर सावरकर को महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित करने का फैसला लिया गया।'
विवाद और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि सावरकर का ऐतिहासिक मूल्यांकन भारतीय राजनीति में दशकों से विवाद का विषय रहा है। उनके समर्थक उन्हें क्रांतिकारी राष्ट्रवादी और 'हिंदुत्व' के प्रणेता के रूप में देखते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि अंडमान की जेल से उनकी माफी याचिकाएँ और द्विराष्ट्र सिद्धांत पर उनके विचार उनकी विरासत को विवादास्पद बनाते हैं। भारत रत्न की यह मांग पहली बार नहीं उठी है — महाराष्ट्र विधानसभा पहले भी इस आशय का प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
आगे क्या होगा
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। BJP और शिवसेना नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहेंगे। यह मांग आने वाले विधानसभा सत्रों और राजनीतिक बहसों में भी केंद्र में बनी रह सकती है।