गणेश दामोदर सावरकर जयंती: नितिन गडकरी, सम्राट चौधरी समेत भाजपा नेताओं ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी क्रांतिकारी गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) की जयंती पर 13 जून 2025 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अनेक वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। विनायक दामोदर सावरकर के अग्रज गणेश सावरकर को 'अभिनव भारत' संगठन की स्थापना और अंडमान की सेल्युलर जेल में काला पानी की सजा भुगतने के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है।
नेताओं ने एक्स पर दी श्रद्धांजलि
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर लिखा, "वीर सावरकर के बड़े भाई क्रांतिकारी गणेश दामोदर सावरकर (बाबाराव सावरकर) की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं नमन।" महाराष्ट्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि बाबाराव सावरकर ने 'अभिनव भारत' संगठन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और जनमानस में स्वतंत्रता की चेतना तथा क्रांति की ज्वाला प्रज्वलित की।
चव्हाण ने आगे लिखा कि अंडमान की सेल्युलर जेल में काला पानी की सजा भुगतते हुए उन्होंने असहनीय यातनाएँ सहीं, लेकिन राष्ट्रसेवा के अपने संकल्प से कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने विपुल लेखन के माध्यम से मराठी साहित्य को भी समृद्ध किया।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, "महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, राष्ट्रभक्त एवं क्रांतिकारी विचारक गणेश दामोदर सावरकर जी की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए उनका त्याग, संघर्ष और समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।"
बिहार सरकार में मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्हें 'भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी, प्रखर राष्ट्रवादी, महान क्रांतिकारी एवं हिंदू महासभा के सह-संस्थापक' बताया और कोटि-कोटि नमन अर्पित किया।
गणेश दामोदर सावरकर: जीवन परिचय
गणेश दामोदर सावरकर का जन्म 13 जून 1879 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के निकट भागपुर नामक ग्राम में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा नासिक में ही हुई। आरंभ में उनकी रुचि धर्म, योग, जप और तप की ओर थी, और एक समय उन्होंने संन्यास लेने का विचार भी किया था।
गौरतलब है कि 1897 में प्लेग अधिकारी रेंड के अत्याचारों से क्रुद्ध चापेकर बंधुओं द्वारा की गई हत्या ने पूरे महाराष्ट्र में हलचल मचा दी थी। उस समय गणेश सावरकर पर इसका प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा, परंतु पिता की प्लेग से मृत्यु के बाद छोटे भाइयों की शिक्षा-दीक्षा का दायित्व आ जाने से उनकी संन्यास की इच्छा अधूरी रह गई और वे राष्ट्रसेवा के मार्ग पर आगे बढ़े।
'अभिनव भारत' और क्रांतिकारी योगदान
गणेश दामोदर सावरकर ने 'अभिनव भारत' संगठन की स्थापना में केंद्रीय भूमिका निभाई, जो ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का प्रतीक बना। इस संगठन के माध्यम से उन्होंने युवाओं में राष्ट्रीय चेतना जगाई और स्वतंत्रता की लौ को जीवित रखा। उनके अनुज विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) के साथ मिलकर उन्होंने क्रांतिकारी आंदोलन को नई दिशा दी।
यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता संग्राम के उन नायकों को पुनः स्मरण किया जा रहा है जो इतिहास की मुख्यधारा में अपेक्षाकृत कम चर्चित रहे। बाबाराव सावरकर का विपुल मराठी साहित्य और उनकी वैचारिक विरासत आज भी शोधकर्ताओं और राष्ट्रवादी विचारकों के लिए प्रासंगिक बनी हुई है।
राजनीतिक संदर्भ और स्मरण परंपरा
भाजपा नेताओं द्वारा गणेश दामोदर सावरकर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने की परंपरा हर वर्ष जारी रहती है। इस वर्ष केंद्रीय मंत्री से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक, सभी ने एक्स के माध्यम से उनके योगदान को रेखांकित किया। आने वाले समय में इस महान क्रांतिकारी की विरासत को और व्यापक रूप से देशवासियों तक पहुँचाने के प्रयास जारी रहने की संभावना है।