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वीर सावरकर जयंती 2026: 28 मई 1883 को जन्मे क्रांतिकारी विचारक का संघर्ष और विरासत

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वीर सावरकर जयंती 2026: 28 मई 1883 को जन्मे क्रांतिकारी विचारक का संघर्ष और विरासत

सारांश

28 मई 1883 को नाशिक में जन्मे विनायक दामोदर सावरकर — क्रांतिकारी से राष्ट्रवादी विचारक तक का उनका सफर दोहरे आजीवन कारावास, 'काला पानी' की यातनाओं और '1857 द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस' जैसी ऐतिहासिक कृतियों से होकर गुज़रता है — एक ऐसी विरासत जो आज भी भारतीय विमर्श में जीवित है।

मुख्य बातें

वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को नाशिक जिले , महाराष्ट्र में हुआ था।
उन्होंने 1904 में लंदन में 'अभिनव भारत' संगठन की स्थापना की और 1905 में पुणे में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई।
13 मई 1910 को गिरफ्तार कर उन्हें दोहरे आजीवन कारावास की सज़ा दी गई और अंडमान की सेलुलर जेल भेजा गया।
उन्होंने 4 जुलाई 1911 से 21 मई 1921 तक 'काला पानी' में कठोर यातनाएँ झेलीं।
उनकी पुस्तक '1857 द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस' को अंग्रेजों ने प्रतिबंधित कर दिया था।
उन्होंने अस्पृश्यता और सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध भी मुखर विचार रखे।

विनायक दामोदर सावरकर — जिन्हें वीर सावरकर के नाम से जाना जाता है — का जन्म 28 मई 1883 को नाशिक जिले, महाराष्ट्र में हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे चर्चित, प्रभावशाली और विवादास्पद व्यक्तित्वों में गिने जाने वाले सावरकर ने क्रांतिकारी, चिंतक, लेखक, वकील और राष्ट्रवादी विचारक के रूप में भारतीय इतिहास पर अमिट छाप छोड़ी। उनकी जयंती पर उनके जीवन के संघर्ष, बलिदान और वैचारिक योगदान को स्मरण करना प्रासंगिक है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

सावरकर के पिता का नाम दामोदर पंत सावरकर और माता का नाम राधाबाई था। बालपन से ही उनका जीवन कठिनाइयों से घिरा रहा — मात्र नौ वर्ष की आयु में उनकी माता का निधन हो गया और सात वर्ष बाद पिता भी चल बसे। इसके बाद उनके बड़े भाई गणेश सावरकर ने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई।

सावरकर ने प्रारंभिक शिक्षा नासिक के शिवाजी हाई स्कूल से प्राप्त की और वर्ष 1901 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की। कम उम्र में ही उनका झुकाव साहित्य और कविता की ओर था। उच्च शिक्षा के लिए वे लंदन गए, जहाँ उनका जीवन एक नई दिशा में मुड़ा।

क्रांतिकारी गतिविधियाँ और 'अभिनव भारत'

लंदन प्रवास के दौरान सावरकर का रुझान राजनीतिक आंदोलन की ओर तेज़ी से बढ़ा। वर्ष 1904 में उन्होंने 'अभिनव भारत' नामक संगठन की स्थापना की, जिसका उद्देश्य युवाओं में स्वदेशी भावना, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति जागृत करना था। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में उन्होंने पुणे में विदेशी वस्त्रों की होली जलाकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रतीकात्मक विद्रोह का संदेश दिया।

1907 में उन्होंने लंदन के इंडिया हाउस में 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की स्वर्ण जयंती मनाई और कई क्रांतिकारी नेताओं से संपर्क स्थापित किया। रूसी क्रांतिकारी विचारधारा से प्रभावित सावरकर उस दौर के सबसे सक्रिय क्रांतिकारी बौद्धिकों में से एक थे।

गिरफ्तारी और काला पानी की सज़ा

वर्ष 1909 में मदन लाल ढींगरा द्वारा ब्रिटिश अधिकारी कर्जन वायली की हत्या के बाद सावरकर ब्रिटिश सरकार के निशाने पर आ गए। उन्होंने इस घटना के समर्थन में 'लंदन टाइम्स' में लेख लिखा, जिसके कारण 13 मई 1910 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 8 जुलाई 1910 को उन्होंने जहाज़ से कूदकर भागने का प्रयास किया, लेकिन दोबारा पकड़े गए।

ब्रिटिश हुकूमत ने सावरकर को दोहरे आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। 7 अप्रैल 1911 को उन्हें पोर्ट ब्लेयर की सेलुलर जेल — जिसे 'काला पानी' कहा जाता था — भेजा गया, जहाँ उन्होंने 4 जुलाई 1911 से 21 मई 1921 तक कठोर यातनाएँ सहीं। यह ऐसे समय में आया जब अंडमान की वह जेल राजनीतिक बंदियों के लिए यातना का पर्याय बन चुकी थी। बाद में उनकी याचिका पर विचार करते हुए अंग्रेजों ने उन्हें रिहा किया।

वैचारिक योगदान और साहित्यिक धरोहर

सावरकर ने 1857 के विद्रोह को भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम घोषित किया और इस विषय पर विस्तृत शोध के आधार पर '1857 द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस' पुस्तक लिखी, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन को एक वैचारिक आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह पुस्तक अंग्रेज़ों ने प्रतिबंधित कर दी थी।

गौरतलब है कि सावरकर केवल क्रांतिकारी नहीं थे — उन्होंने अस्पृश्यता, सामाजिक भेदभाव और राष्ट्रीय एकता पर भी मुखर विचार रखे। उनका मानना था कि छुआछूत और सामाजिक विभाजन देश को भीतर से कमज़ोर करते हैं। उन्होंने कर्तव्यनिष्ठा, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम को जीवन का सर्वोच्च धर्म बताया। उनकी यह विरासत आज भी भारतीय राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में प्रासंगिक बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी विचारधारा पर बहस अभी थमी नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर उनके सामाजिक सुधार संबंधी विचारों — विशेषकर अस्पृश्यता-विरोध — को नज़रअंदाज़ कर देती है, जो उनके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण आयाम है। उनकी विरासत का निष्पक्ष मूल्यांकन तभी संभव है जब उनके समग्र जीवन को — संघर्ष, लेखन और विचार — एक साथ देखा जाए।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीर सावरकर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नाशिक जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदर पंत सावरकर और माता का नाम राधाबाई था।
सावरकर को 'काला पानी' की सज़ा क्यों मिली?
1909 में मदन लाल ढींगरा द्वारा ब्रिटिश अधिकारी कर्जन वायली की हत्या के बाद 'लंदन टाइम्स' में लेख लिखने के कारण 13 मई 1910 को सावरकर गिरफ्तार हुए। ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें दोहरे आजीवन कारावास की सज़ा देकर अंडमान की सेलुलर जेल भेजा, जहाँ उन्होंने 1911 से 1921 तक यातनाएँ सहीं।
'अभिनव भारत' संगठन क्या था?
सावरकर ने 1904 में लंदन में 'अभिनव भारत' की स्थापना की थी। इस संगठन का उद्देश्य युवाओं में स्वदेशी भावना, राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति जागृत करना था।
सावरकर की प्रमुख पुस्तक कौन-सी है और उसका महत्व क्या है?
सावरकर ने '1857 द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस' लिखी, जिसमें उन्होंने 1857 के विद्रोह को भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम घोषित किया। इस पुस्तक को अंग्रेजों ने प्रतिबंधित कर दिया था, जो इसके वैचारिक प्रभाव का प्रमाण है।
सावरकर के सामाजिक विचार क्या थे?
सावरकर ने अस्पृश्यता और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया और राष्ट्रीय एकता पर ज़ोर दिया। उनका मानना था कि छुआछूत और सामाजिक विभाजन देश को भीतर से कमज़ोर करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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