करवा चौथ 2026: देशभर में महिलाओं ने रखा व्रत, शिवराज-ब्रजेश पाठक ने दीं शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
करवा चौथ 2026 का पावन पर्व 29 अक्टूबर को देशभर में पारंपरिक उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए निर्जल व्रत रखा तथा विधिवत पूजा-अर्चना की। नई दिल्ली से लेकर लखनऊ, भोपाल और चंडीगढ़ तक — हर शहर में महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजकर सामूहिक पूजन में शामिल हुईं।
मुख्य घटनाक्रम
दिनभर उपवास रखने के बाद संध्या बेला में महिलाओं ने छलनी से चंद्रमा के दर्शन किए, पारंपरिक रीतियों से पूजा संपन्न की और फिर पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत का समापन किया। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से एकत्र होकर यह त्योहार मनाया, जिससे उत्सव का वातावरण और भी भव्य हो गया।
चंडीगढ़ में मौसम की बाधा भी श्रद्धालु महिलाओं का उत्साह नहीं तोड़ सकी। बादलों की आड़ के कारण चंद्रमा के दर्शन में विलंब हुआ और अंततः रात करीब 8:40 बजे चाँद नज़र आने के बाद महिलाओं ने पूजा-अर्चना पूर्ण की और व्रत खोला।
शिवराज सिंह चौहान का संदेश
भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पत्नी साधना सिंह चौहान के साथ करवा चौथ के पारंपरिक रीति-रिवाजों में हिस्सेदारी की। साधना सिंह चौहान ने चंद्र-दर्शन के बाद विधिवत पूजा कर व्रत का समापन किया।
इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय महिलाओं के त्याग और तपस्या की प्रशंसा करते हुए कहा, 'भारतीय नारी त्याग और तपस्या की सच्ची प्रतिमूर्ति है। पति, बच्चों और परिवार के लिए वह जो बलिदान देती है, उसकी तुलना किसी अन्य चीज से नहीं की जा सकती।' उन्होंने करवा चौथ को 'निस्वार्थ समर्पण का सशक्त प्रतीक' बताया।
दिल्ली और लखनऊ में उत्सव
नई दिल्ली में मंत्री रविंद्र इंद्राज ने कहा कि यह त्योहार समर्पण और भक्ति का प्रतीक है और इस तरह का समर्पण अन्य संस्कृतियों में बहुत कम देखने को मिलता है। उन्होंने करवा चौथ को भारतीय हिंदू संस्कृति और सनातन परंपराओं की अभिव्यक्ति बताया।
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष लता गुप्ता ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित सामूहिक उत्सव की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में शामिल सभी महिलाएं बेहद प्रसन्न हैं।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपनी पत्नी के साथ करवा चौथ मनाया और प्रदेश की सभी बहनों, माताओं व बेटियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। पाठक ने कहा, 'पूरे उत्तर प्रदेश में सनातन संस्कृति का प्रतीक यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है।' उन्होंने पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास को इस पर्व की विशेषता बताया।
सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
करवा चौथ का यह पर्व कार्तिक माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है और मुख्यतः उत्तर भारत में विशेष महत्व रखता है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में यह त्योहार देश के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में भी लोकप्रियता हासिल कर चुका है। सामूहिक पूजन की परंपरा महिलाओं के बीच सामाजिक जुड़ाव को भी मज़बूत करती है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में त्योहारों के मौसम — नवरात्रि, दशहरा, दीपावली और करवा चौथ — की श्रृंखला अपने चरम पर है। आने वाले दिनों में भाई दूज और छठ पूजा जैसे और पर्व भी इस उत्सवी क्रम को जारी रखेंगे।