करवा चौथ 2026: CM धामी ने गीता धामी संग मनाया पर्व, बताया प्रेम और समर्पण का प्रतीक
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 29 अक्टूबर 2026 को अपनी धर्मपत्नी गीता धामी के साथ पारंपरिक विधि-विधान से करवा चौथ का पर्व मनाया। उन्होंने इस पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए करवा चौथ को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। इस दिन देशभर में महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक पोस्ट में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उन्होंने अपनी अर्धांगिनी के साथ श्रद्धा और परंपरा के अनुसार यह पर्व मनाया। उन्होंने दांपत्य जीवन में प्रेम, समर्पण और विश्वास के महत्व को रेखांकित किया और अपनी धर्मपत्नी के स्नेह व सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया।
धामी ने कहा कि सनातन परंपरा के ऐसे पर्व पारिवारिक रिश्तों को मज़बूत बनाने के साथ-साथ समाज में प्रेम, सद्भाव और आपसी विश्वास को भी प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की।
देशभर में उत्साह का माहौल
दिल्ली के चांदनी चौक समेत देश के प्रमुख बाज़ारों में करवा चौथ की खरीदारी को लेकर दिनभर चहल-पहल बनी रही। महिलाओं ने पूजा सामग्री, छलनी, करवा, श्रृंगार का सामान और पारंपरिक परिधान खरीदे। ज्योतिषियों के अनुसार महिलाओं ने निर्धारित समय पर चंद्र दर्शन के पश्चात व्रत का पारण किया।
गौरतलब है कि यह पर्व मुख्यतः उत्तर भारत में विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है, किंतु अब यह पूरे देश में व्यापक रूप से प्रचलित हो चुका है।
राजनीतिक हस्तियों की भागीदारी
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी 29 अक्टूबर को करवा चौथ पर पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनके साथ मंत्रिमंडल के कई अन्य सदस्य भी अपने परिवार के साथ उपस्थित थे।
यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक जीवन में सांस्कृतिक और धार्मिक पर्वों की सहभागिता को लेकर जनप्रतिनिधियों की रुचि बढ़ी है और ऐसे आयोजन बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे हैं।
आम जनता पर असर
करवा चौथ के अवसर पर देशभर में पारंपरिक उत्सव, धार्मिक आस्था और पारिवारिक मूल्यों का अनूठा संगम देखने को मिला। महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना की और शाम को चंद्र दर्शन के बाद निर्जला व्रत का पारण किया। इस पर्व ने एक बार फिर भारतीय समाज में दांपत्य प्रेम और सांस्कृतिक धरोहर की मज़बूती को उजागर किया।