कश्मीर में स्कूली किताबों से हटेगी आपत्तिजनक सामग्री, डीएसईके ने 13 जुलाई तक रिपोर्ट माँगी
सारांश
मुख्य बातें
स्कूल शिक्षा निदेशालय कश्मीर (डीएसईके) ने 9 जुलाई 2026 को एक व्यापक सर्कुलर जारी कर जम्मू-कश्मीर के समस्त सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों तथा कोचिंग सेंटरों को निर्देश दिया है कि वे अपने परिसर में मौजूद सभी पुस्तकों की तत्काल समीक्षा करें और आपत्तिजनक सामग्री की पहचान कर उसे हटाएँ। यह आदेश ऐसे समय आया है जब कश्मीर विश्वविद्यालय पहले ही अपनी केंद्रीय पुस्तकालय और विभागीय पुस्तकालयों में रखी पुस्तकों, पत्रिकाओं, शोध सामग्री की समीक्षा शुरू कर चुका है।
आदेश का दायरा और समय-सीमा
डीएसईके के सर्कुलर के अनुसार, सभी संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि वे कार्यालय, कक्षाओं, स्टाफ रूम और स्कूल पुस्तकालयों में रखी प्रत्येक पुस्तक — चाहे वह हाल ही में खरीदी गई हो या पुरानी — की बारीकी से जाँच करें। संस्थान प्रमुखों को 13 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी। इसके बाद जोनल शिक्षा अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र के स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की रिपोर्ट संकलित कर 15 जुलाई तक संबंधित मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) को सौंपेंगे।
कश्मीर डिवीजन के मुख्य शिक्षा अधिकारियों को 17 जुलाई तक निदेशालय को प्रमाण पत्र और रिपोर्ट देनी होगी। अंत में, डीएसईके के जॉइंट डायरेक्टर, अतिरिक्त सचिव (विधि) और ओएसडी (सीईडब्ल्यू) की एक समिति जिलों से प्राप्त प्रमाणीकरण रिपोर्टों को एकत्र कर 19 जुलाई तक निदेशालय को संयुक्त रिपोर्ट सौंपेगी।
किस सामग्री पर है आपत्ति
सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि समीक्षा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पुस्तक में ऐसी सामग्री न हो जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाए, छात्रों के लिए अनुपयुक्त हो, प्रचलित कानूनों के विरुद्ध हो, राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुँचाए, या शैक्षिक मूल्यों एवं स्थापित मानदंडों को प्रभावित करे। इसके अलावा, सभी सामग्री को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आयु-उपयुक्त दिशानिर्देशों के अनुरूप होना अनिवार्य बताया गया है।
आपत्तिजनक सामग्री मिलने पर क्या करें
यदि किसी संस्थान में आपत्तिजनक सामग्री पाई जाती है, तो संस्थान प्रमुख को एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी जिसमें पुस्तक का शीर्षक, प्रकाशन वर्ष, लेखक व प्रकाशक का नाम और उपलब्ध प्रतियों की संख्या का उल्लेख हो। इस रिपोर्ट के साथ एक सारांश भी उसी समय-सीमा के भीतर सीईओ/जेएडईओ को सौंपना होगा। सीईओ से यह भी कहा गया है कि वे इस पूरी प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करें और प्रमाण पत्रों पर प्रति-हस्ताक्षर करने के बाद ही उन्हें आगे भेजें।
अनुपालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी
निदेशालय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस आदेश के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और नियमों के तहत दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। गौरतलब है कि यह पहल शिक्षा क्षेत्र में सामग्री की व्यापक समीक्षा की एक बड़ी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें उच्च शिक्षा और स्कूल शिक्षा दोनों स्तरों को एक साथ शामिल किया गया है। आने वाले दिनों में इस समीक्षा के निष्कर्ष और उसके आधार पर उठाए जाने वाले कदम शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की दिशा तय करेंगे।