जम्मू-कश्मीर: स्कूली किताबों में अलगाववादियों के महिमामंडन पर UAPA के तहत FIR, 8 अधिकारी निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर सरकार ने 4 जुलाई 2026 को स्कूली पुस्तकालयों में वितरित दो विवादित पुस्तकों के मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए आठ सरकारी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और जम्मू के काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 3/2026 दर्ज की। इन पुस्तकों पर कथित तौर पर अलगाववादियों और आतंकवादियों का महिमामंडन करने का आरोप है। जांच एजेंसियों ने संबंधित प्रकाशकों के परिसरों पर छापेमारी कर भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार के साक्ष्य जब्त किए हैं।
विवाद में कौन-सी पुस्तकें हैं
विवाद के केंद्र में दो पुस्तकें हैं। पहली, 'पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर', जिसके लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीणा हैं और इसे ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू ने प्रकाशित किया है। दूसरी, 'पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर', जिसके लेखक डॉ. सुशांत गिरी हैं और इसे अनुराग प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है। सरकारी आदेश के अनुसार, पहली पुस्तक की 123 प्रतियाँ जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियाँ जम्मू और बारामूला जिलों में वितरित की गई थीं।
कानूनी कार्रवाई और आरोप
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 49, 61(2), 152, 196 और 353 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। सरकार का कहना है कि इन पुस्तकों में ऐसी सामग्री शामिल है जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही पर सरकार की नज़र पहले से कड़ी है।
निलंबित अधिकारी और जांच का दायरा
निलंबित आठ अधिकारियों में फजिल इमरान सिद्दीकी, गुरजीत सिंह, संजीव शर्मा, शाजिया कौसर, इम्तियाज अहमद मीर, निरंजन शर्मा, रेनू मेंगी और राजमोहिनी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, समग्र शिक्षा में अनुबंध पर कार्यरत कंप्यूटर असिस्टेंट शेख सुहेल अहमद की सेवाएँ भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। सरकार का आरोप है कि पुस्तकों की सिफारिश करने वाली उपसमिति और संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही बरती और आवश्यक सतर्कता नहीं दिखाई।
जांच का ढाँचा
सरकार ने इस मामले की विभागीय जांच के लिए वरिष्ठ IAS अधिकारी अश्वनी कुमार को जांच अधिकारी और JKAS अधिकारी रोहित शर्मा को प्रेजेंटिंग ऑफिसर नियुक्त किया है। जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जम्मू-कश्मीर में पाठ्यक्रम सामग्री को लेकर विवाद उठा हो, परंतु UAPA के तहत प्रकाशकों पर सीधी कार्रवाई इस मामले को असाधारण बनाती है।
आगे क्या होगा
जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी। प्रकाशकों के परिसरों से जब्त डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच जारी है। इस मामले का असर भविष्य में सरकारी पुस्तक खरीद और पुस्तकालय चयन प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।