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जम्मू-कश्मीर में विवादित किताबें: 8 शिक्षा अधिकारी सस्पेंड, लेखक-प्रकाशक ब्लैकलिस्ट

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जम्मू-कश्मीर में विवादित किताबें: 8 शिक्षा अधिकारी सस्पेंड, लेखक-प्रकाशक ब्लैकलिस्ट

सारांश

जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्कूलों में अलगाववादी सामग्री वाली किताबें मंजूर करने पर 8 शिक्षा अधिकारी निलंबित किए। दोनों किताबों के लेखक और प्रकाशक ब्लैकलिस्ट; 251 प्रतियाँ पाँच जिलों से वापस होंगी। 30 दिन में जांच रिपोर्ट तलब।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 4 जुलाई 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
विवाद में दो किताबें — 'पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर' और 'पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर' — पर अलगाववादियों का महिमामंडन करने का आरोप है।
कुल 251 प्रतियाँ — जम्मू, रामबन, उधमपुर और बारामूला जिलों में वितरित — वापस ली जाएंगी।
लेखक हिलाल अहमद, संतोष मीणा, डॉ.
सुशांत गिरी और उनके प्रकाशक जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित और ब्लैकलिस्ट ।
जांच अधिकारी अश्वनी कुमार, आईएएस को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।
अनुबंध कर्मी शेख सुहेल अहमद को भी तत्काल प्रभाव से सेवा से हटाया गया।

जम्मू-कश्मीर सरकार ने 4 जुलाई 2026 को स्कूली पाठ्यक्रम में अलगाववादी सामग्री को मंजूरी देने के आरोप में स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उनके विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश जारी किए। इसके साथ ही, विवादित किताबों के लेखकों और प्रकाशकों को केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंधित एवं ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।

कौन-सी किताबें विवाद में हैं

सरकारी आदेश में दो किताबों को विवादास्पद चिह्नित किया गया है। पहली किताब 'पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर' है, जिसके लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीणा हैं और इसे ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू ने प्रकाशित किया है। दूसरी किताब 'पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर' है, जिसके लेखक डॉ. सुशांत गिरी हैं और इसे अनुराग प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है।

आदेश के अनुसार, पहली किताब की 123 प्रतियाँ जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में और दूसरी किताब की 128 प्रतियाँ जम्मू और बारामूला जिलों में आपूर्ति की गई थीं। अधिकारियों का कहना है कि इन किताबों में अलगाववादियों और आतंकवादियों का महिमामंडन करने वाली सामग्री थी, जो कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती थी।

सरकार की कार्रवाई और आधिकारिक आदेश

सरकारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 'सब-कमेटी सीरीज 4' के सदस्यों और पर्यवेक्षी अधिकारियों ने ऐसी किताबों की सिफारिश करने में 'गंभीर लापरवाही' बरती और अपने कर्तव्य का समुचित पालन नहीं किया। आदेश में कहा गया, 'इन किताबों में अलगाववाद से जुड़ी सामग्री थी, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है।'

निलंबन जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1956 के नियम 31(1)(ए) के तहत किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान सभी अधिकारी स्कूल शिक्षा विभाग से संबद्ध रहेंगे।

कौन-कौन से अधिकारी निलंबित हुए

निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं: फजिल इमरान सिद्दीकी, कोऑर्डिनेटर, लाइब्रेरी, समग्र शिक्षा; गुरजीत सिंह, असिस्टेंट कोऑर्डिनेटर, समग्र शिक्षा; संजीव शर्मा, प्रिंसिपल, जीएचएसएस कोरे पन्नू, कठुआ; शाजिया कौसर, एकेडमिक ऑफिसर, एससीईआरटी, जम्मू; इम्तियाज अहमद मीर, लेक्चरर, बीएचएसएस, बडगाम; निरंजन शर्मा, लेक्चरर, जीएचएसएस बड़हट, किश्तवाड़, डीआईईटी, जम्मू; रेनू मेंगी, लेक्चरर; और राजमोहिनी, लेक्चरर, जीजीएसएस, पुंछ।

इसके अलावा, शेख सुहेल अहमद, कंप्यूटर असिस्टेंट (अनुबंध पर), को तत्काल प्रभाव से उनके अनुबंध से हटा दिया गया है। वे समग्र शिक्षा के लाइब्रेरी कोऑर्डिनेटर की सहायता कर रहे थे।

जांच अधिकारी की नियुक्ति

मामले की जांच के लिए अश्वनी कुमार, आईएएस, वित्त आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव), विद्युत विकास विभाग को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। रोहित शर्मा, जेकेएएस, अतिरिक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, को प्रेजेंटिंग ऑफिसर बनाया गया है। जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

लेखक और प्रकाशक ब्लैकलिस्ट, आगे क्या होगा

सरकार ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि उपरोक्त लेखकों और प्रकाशकों को अब से जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित और ब्लैकलिस्ट किया जाता है। उनके द्वारा लिखी या प्रकाशित किसी भी मुद्रित सामग्री को भी जम्मू-कश्मीर क्षेत्र से वापस लिया जाएगा। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि सरकार स्कूली पाठ्यक्रम की समीक्षा को लेकर अत्यंत सतर्क रुख अपना रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि पाठ्यक्रम अनुमोदन की प्रक्रिया में यह चूक हुई कैसे — क्या यह व्यक्तिगत लापरवाही थी या संस्थागत निगरानी की विफलता? 'सब-कमेटी सीरीज 4' जैसी समितियों की संरचना और जवाबदेही तंत्र पर अब तक कोई स्पष्टता नहीं आई है। निलंबन दंड का संकेत देता है, लेकिन 30-दिवसीय जांच रिपोर्ट यह तय करेगी कि क्या यह मामला व्यक्तिगत कदाचार तक सीमित रहता है या पाठ्यक्रम चयन की पूरी व्यवस्था की पड़ताल होती है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में किन किताबों को विवादित घोषित किया गया है?
'पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर' (लेखक: हिलाल अहमद व संतोष मीणा) और 'पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर' (लेखक: डॉ. सुशांत गिरी) को अलगाववादी सामग्री के आरोप में विवादित घोषित किया गया है। इन दोनों किताबों की कुल 251 प्रतियाँ पाँच जिलों में वितरित की गई थीं।
कौन-से 8 अधिकारी निलंबित किए गए हैं?
निलंबित अधिकारियों में फजिल इमरान सिद्दीकी, गुरजीत सिंह, संजीव शर्मा, शाजिया कौसर, इम्तियाज अहमद मीर, निरंजन शर्मा, रेनू मेंगी और राजमोहिनी शामिल हैं। ये सभी स्कूल शिक्षा विभाग और समग्र शिक्षा से जुड़े थे और 'सब-कमेटी सीरीज 4' के सदस्य या पर्यवेक्षी अधिकारी थे।
जांच कौन करेगा और कब तक रिपोर्ट आएगी?
आईएएस अधिकारी अश्वनी कुमार, वित्त आयुक्त (अतिरिक्त मुख्य सचिव), को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें 30 दिनों के भीतर सक्षम अधिकारी को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
लेखकों और प्रकाशकों पर क्या कार्रवाई हुई है?
सरकार ने दोनों किताबों के लेखकों और प्रकाशकों — ओबेरॉय बुक सर्विस (जम्मू) और अनुराग प्रकाशन (दिल्ली) — को जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित और ब्लैकलिस्ट कर दिया है। उनके द्वारा लिखी या प्रकाशित कोई भी सामग्री अब इस क्षेत्र में नहीं बेची जा सकेगी।
विवादित किताबें किन जिलों से वापस ली जाएंगी?
पहली किताब की 123 प्रतियाँ जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों से तथा दूसरी किताब की 128 प्रतियाँ जम्मू और बारामूला जिलों से वापस ली जाएंगी। सरकार ने इन सभी प्रतियों को तत्काल हटाने का आदेश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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