केरल में ₹40 करोड़ के दो एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में होंगे स्थापित
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार ने 21 मई 2026 को इंडिया एआई मिशन के साथ साझेदारी में कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में दो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एआई-सीओई) स्थापित करने की घोषणा की, जिन पर कुल ₹40 करोड़ का निवेश होगा। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत संचालित इंडिया एआई मिशन के सहयोग से बनने वाले ये केंद्र राज्य को एक राष्ट्रीय एआई हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
दोनों परियोजनाओं की घोषणा केरल के आईटी और उद्योग मंत्री पी.के. कुन्हालीकुट्टी ने की। उन्होंने कहा, "केरल न केवल भारत के एआई मिशन में हिस्सा ले रहा है, बल्कि हम इसे आकार देने में भी मदद कर रहे हैं।" अधिकारियों के अनुसार, दोनों केंद्र शोध, स्टार्टअप को बढ़ावा और व्यावसायिक नवाचार पर केंद्रित रहेंगे।
कोच्चि का बायो-एआई सेंटर: जैव विविधता और आयुर्वेद का डिजिटल संगम
कोच्चि के डिजिटल हब में केरल स्टार्टअप मिशन द्वारा स्थापित किया जाने वाला 'बायो-एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' केरल की जैव विविधता, आयुर्वेदिक परंपरा और जीनोमिक्स क्षमताओं को उन्नत एआई तकनीक के साथ जोड़ेगा। यह केंद्र कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 'तेजस्वी' सुपरकंप्यूटर और केरल जीनोम डेटा सेंटर के सहयोग से संचालित होगा।
इस परियोजना का लक्ष्य चार वर्षों में 48 डीप टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देना और लगभग 600 प्रत्यक्ष उच्च-मूल्य वाली नौकरियाँ सृजित करना है। केंद्र एआई-आधारित दवा खोज, सटीक आयुर्वेद, जीनोमिक्स और केरल के मसाला क्षेत्र के लिए कृषि-तकनीक नवाचार जैसे विशेष क्षेत्रों पर काम करेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से विकसित एआई उपकरणों से 40,000 से अधिक मसाला किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनकी आय में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का अनुमान है — पूर्वानुमान विश्लेषण, कीट प्रबंधन और प्रीमियम गुणवत्ता प्रमाणीकरण के ज़रिए।
₹20 करोड़ की यह परियोजना 40:40:20 के वित्त पोषण मॉडल पर आधारित है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एक उद्योग संघ की भागीदारी है।
तिरुवनंतपुरम का एआई सेंटर: अनुसंधान से बाज़ार तक
दूसरा केंद्र तिरुवनंतपुरम में डिजिटल यूनिवर्सिटी केरल के तहत स्थापित होगा, जिसके लिए 10,000 वर्ग फुट की एक विशेष सुविधा तैयार की जाएगी। इस केंद्र का प्राथमिक उद्देश्य एआई अनुसंधान और बाज़ार में उपयोग होने वाले अनुप्रयोगों के बीच की खाई को पाटना है। यह स्टार्टअप्स को व्यावसायीकरण, कौशल विकास और उद्योग सहयोग में सहायता देगा, साथ ही केरल की सामाजिक-आर्थिक ज़रूरतों के अनुसार तैयार एआई समाधानों पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत के कई राज्य एआई-आधारित औद्योगिक नीतियों की दौड़ में हैं। गौरतलब है कि केरल पहले से ही के-डिस्क और केरल स्टार्टअप मिशन जैसी पहलों के ज़रिए डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी पहचान बना चुका है। दोनों केंद्रों से न केवल तकनीकी रोज़गार सृजन होगा, बल्कि कृषि, स्वास्थ्य और पारंपरिक उद्योगों में भी एआई का व्यावहारिक उपयोग सुनिश्चित होगा। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों की सफलता यह तय करेगी कि केरल राष्ट्रीय एआई मानचित्र पर कितना मज़बूत स्थान बनाता है।