18 सितंबर 2026
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केरल में GST छापेमारी: रेलवे पार्किंग में ₹7.56 करोड़ की कर चोरी उजागर, 69 ठिकानों पर जाँच

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केरल में GST छापेमारी: रेलवे पार्किंग में ₹7.56 करोड़ की कर चोरी उजागर, 69 ठिकानों पर जाँच

सारांश

केरल में जीएसटी विभाग ने रेलवे स्टेशनों की पार्किंग सेवाओं में ₹7.56 करोड़ की कर चोरी पकड़ी — 22 संचालकों की 69 जगहों पर एक साथ छापा। ₹42 करोड़ का टर्नओवर छिपाया गया था। अब 1,000 से अधिक पार्किंग स्थलों पर जाँच का दायरा बढ़ेगा।

मुख्य बातें

स्टेट जीएसटी इंटेलिजेंस एंड एनफोर्समेंट विंग ने 16 सितंबर 2026 को राज्यव्यापी ऑपरेशन में रेलवे पार्किंग सेवाओं में ₹7.56 करोड़ की कथित जीएसटी चोरी उजागर की।
22 करदाताओं से जुड़ी 69 जगहों की तलाशी ली गई; ₹42 करोड़ का टर्नओवर छिपाया गया पाया गया।
जाँच में अनेक क्यूआर कोड के उपयोग और सॉफ्टवेयर, बही-खातों व मोबाइल चैट से साक्ष्य जुटाए गए।
मुख्यमंत्री सतीशन , जो वित्त मंत्री भी हैं, राजस्व प्रशासन की सीधी निगरानी कर रहे हैं।
अगले चरण में केएसआरटीसी, अस्पतालों, शॉपिंग मॉल और सिनेमाघरों सहित 1,000 से अधिक पार्किंग स्थलों पर निरीक्षण होगा।

केरल के स्टेट जीएसटी इंटेलिजेंस एंड एनफोर्समेंट विंग ने 16 सितंबर 2026 को राज्यव्यापी ऑपरेशन में रेलवे स्टेशनों पर वाहन पार्किंग सेवाओं में ₹7.56 करोड़ की कथित जीएसटी चोरी का पर्दाफाश किया। 22 करदाताओं से जुड़ी 69 जगहों पर एक साथ की गई इस छापेमारी में ₹42 करोड़ का छिपाया हुआ टर्नओवर सामने आया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार, 18 सितंबर को इस ऑपरेशन की जानकारी सार्वजनिक की।

ऑपरेशन का दायरा और तरीका

जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने पूरे केरल में रेलवे परिसरों में पार्किंग सेवा संचालकों के मुख्य व्यावसायिक परिसरों, आवासों और अन्य व्यावसायिक स्थलों की एक साथ तलाशी ली। जाँच में पाया गया कि इन संचालकों द्वारा जीएसटी रिटर्न में दर्शाया गया टर्नओवर पार्किंग सेवाओं से हुई वास्तविक आय से काफी कम था।

विभाग ने छिपाई गई आय का पता लगाने के लिए डिजिटल और भौतिक — दोनों साक्ष्यों का सहारा लिया। 13 करदाताओं के लेनदेन का ब्यौरा सॉफ्टवेयर प्रणाली से निकाला गया, जबकि शेष मामलों में बही-खाते, रजिस्टर और मोबाइल फोन चैट से जानकारी एकत्र की गई। जाँच में भुगतान स्वीकार करने के लिए अनेक क्यूआर कोड के उपयोग का भी खुलासा हुआ — जो कथित तौर पर लेनदेन को बिखराने और कर-योग्य आय को कम दिखाने की रणनीति का हिस्सा था।

मुख्यमंत्री की निगरानी और सरकार का रुख

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन सतीशन, जो राज्य के वित्त मंत्री का पोर्टफोलियो भी संभालते हैं, राजस्व प्रशासन की प्रत्यक्ष देखरेख कर रहे हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार राजस्व रिसाव रोककर और अधिक लेनदेन को कर के दायरे में लाकर अपनी वित्तीय स्थिति मज़बूत करना चाहती है।

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे पार्किंग क्षेत्र में कर चोरी की सूचना गोपनीय रूप से विभाग को दें, ताकि जाँच का दायरा और व्यापक हो सके।

आगे का ऑपरेशन: 1,000 से अधिक स्थल निशाने पर

स्टेट जीएसटी कमिश्नर ने स्पष्ट किया है कि रेलवे पार्किंग ऑपरेशन महज पहला चरण है। विभाग ने पूरे राज्य में केएसआरटीसी स्थलों, अस्पतालों, शॉपिंग मॉलों और सिनेमाघरों में संचालित 1,000 से अधिक वाहन पार्किंग स्थानों की विस्तृत जानकारी पहले ही एकत्र कर ली है।

जिन स्थलों पर कर चोरी का संदेह है, वहाँ जल्द ही निरीक्षण अभियान शुरू होगा। गौरतलब है कि पार्किंग क्षेत्र परंपरागत रूप से जीएसटी अनुपालन की दृष्टि से कम निगरानी में रहा है, और यह ऑपरेशन उस खामी को दूर करने की दिशा में एक बड़ा संरचनात्मक कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

कर विशेषज्ञों के अनुसार, अनेक क्यूआर कोड के ज़रिए भुगतान विभाजित करना एक परिचित तकनीक है जिससे डिजिटल ट्रेल को तोड़ा जाता है। इस ऑपरेशन की सफलता इस बात से भी आँकी जाएगी कि मामले आगे अभियोजन तक पहुँचते हैं या केवल माँग नोटिस तक सीमित रहते हैं — क्योंकि पहले चरण की छापेमारी और वसूली के बीच अक्सर बड़ा अंतर देखा गया है।

जाँच जारी है और आने वाले हफ्तों में और खुलासे संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असली महत्व संकेत-मूल्य में है — पार्किंग जैसा अनौपचारिक, नकद-प्रधान क्षेत्र अब जीएसटी की रडार पर है। क्यूआर कोड के विभाजन और सॉफ्टवेयर डेटा माइनिंग का उपयोग दर्शाता है कि विभाग डिजिटल ट्रेल को समझने में परिपक्व हो रहा है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये मामले केवल माँग नोटिस तक सिमटते हैं, या अभियोजन तक पहुँचते हैं — क्योंकि बिना दंडात्मक नतीजों के, इस तरह की छापेमारियाँ अनुपालन व्यवहार बदलने में सीमित असर दिखाती हैं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल में जीएसटी छापेमारी में क्या सामने आया?
16 सितंबर 2026 को स्टेट जीएसटी इंटेलिजेंस एंड एनफोर्समेंट विंग ने रेलवे स्टेशनों की पार्किंग सेवाओं में ₹7.56 करोड़ की कथित कर चोरी उजागर की। 22 करदाताओं से जुड़ी 69 जगहों पर छापे मारे गए और ₹42 करोड़ का छिपाया हुआ टर्नओवर सामने आया।
जाँच में कर चोरी कैसे पकड़ी गई?
जाँचकर्ताओं ने पाया कि जीएसटी रिटर्न में दर्शाया गया टर्नओवर वास्तविक पार्किंग आय से काफी कम था। 13 करदाताओं के मामले में सॉफ्टवेयर से लेनदेन डेटा निकाला गया और शेष मामलों में बही-खाते, रजिस्टर व मोबाइल चैट को साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया गया। भुगतान छिपाने के लिए अनेक क्यूआर कोड का उपयोग भी पाया गया।
आगे की जाँच का दायरा क्या होगा?
स्टेट जीएसटी विभाग ने केएसआरटीसी स्थलों, अस्पतालों, शॉपिंग मॉलों और सिनेमाघरों सहित 1,000 से अधिक वाहन पार्किंग स्थानों की पहचान कर ली है। जहाँ कर चोरी का संदेह है वहाँ जल्द निरीक्षण अभियान शुरू होगा।
इस ऑपरेशन में मुख्यमंत्री की क्या भूमिका है?
मुख्यमंत्री सतीशन, जो वित्त मंत्री का पोर्टफोलियो भी संभालते हैं, राजस्व प्रशासन की सीधी निगरानी कर रहे हैं। सरकार ने नागरिकों से पार्किंग क्षेत्र में कर चोरी की सूचना गोपनीय रूप से देने की अपील भी की है।
पार्किंग सेवाओं पर जीएसटी क्यों लागू होता है?
वाहन पार्किंग सेवाएँ जीएसटी के तहत कर योग्य सेवाएँ हैं और संचालकों को नियमित रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। इस ऑपरेशन से स्पष्ट हुआ कि पार्किंग क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वास्तविक टर्नओवर को छिपाकर कम कर जमा किया जा रहा था।
राष्ट्र प्रेस
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