केरल के 5.5 लाख एमएसएमई को ईसीएलजीएस ने बचाया, ₹8,405 करोड़ की गारंटीकृत ऋण सहायता: राजीव चंद्रशेखर
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने 23 मई 2025 को केरल के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप्स को वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल से उबारने में केंद्र सरकार की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 5.5 लाख एमएसएमई इस योजना के तहत ऋण गारंटी समर्थन से लाभान्वित हुए हैं और ₹8,405 करोड़ से अधिक का गारंटीकृत ऋण वितरित किया गया है।
अलीबी ग्लोबल का अनुभव: एक जीवंत उदाहरण
चंद्रशेखर ने तिरुवनंतपुरम स्थित साइबर फोरेंसिक स्टार्टअप 'अलीबी ग्लोबल' के संस्थापक श्याम के साथ हुई बातचीत का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि मध्य पूर्व में व्यापारिक अनिश्चितता के चलते कंपनी के कारोबार पर गहरा असर पड़ा था, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के माध्यम से ईसीएलजीएस के तहत मिली वित्तीय सहायता ने उन्हें संकट से उबरने में मदद की। श्याम ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देने का अनुरोध किया, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि उद्यमियों को सबसे कठिन समय में सरकारी सहारा मिले।
केरल की अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व का गहरा जुड़ाव
चंद्रशेखर ने बताया कि केरल की अर्थव्यवस्था प्रेषण (रेमिटेंस), व्यापार, पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के ज़रिए खाड़ी देशों और व्यापक मध्य पूर्व से गहराई से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि इस क्षेत्र में किसी भी अस्थिरता का असर केरल पर तत्काल और सीधे तौर पर पड़ता है। उन्होंने कहा, 'जब मध्य पूर्व में अस्थिरता आती है, तो केरल अक्सर इसका प्रभाव तुरंत महसूस करता है।'
ईसीएलजीएस की व्यापक भूमिका
इस योजना ने केरल के लाखों उद्यमों को कार्यशील पूंजी के दबाव को संभालने, संचालन निरंतर रखने, रोज़गार बचाने और बाहरी आर्थिक चुनौतियों के बावजूद विकास में निवेश जारी रखने में सक्षम बनाया है। चंद्रशेखर के अनुसार, यह योजना बैंकों को कठिन समय में भी ऋण देने का भरोसा दिलाती है — जो किसी भी लचीली अर्थव्यवस्था की नींव है।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण और आगे की राह
चंद्रशेखर ने ज़ोर देकर कहा, 'एमएसएमई का समर्थन करना केवल ऋण प्रदान करना नहीं है; यह आजीविका की रक्षा करना, विकास को सक्षम बनाना और भविष्य में विश्वास पैदा करना है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएँ भारत के निर्यातोन्मुखी एमएसएमई क्षेत्र पर दबाव बना रही हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या ईसीएलजीएस के तहत मिली राहत दीर्घकालिक व्यावसायिक स्थिरता में तब्दील होती है।