सुधाकरन को प्रोटेम स्पीकर बनाकर सतीशन सरकार ने विजयन को दी राजनीतिक चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की नई सरकार ने 18 मई 2026 को अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला — पूर्व माकपा (CPI-M) नेता जी. सुधाकरन को 16वीं केरल विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त करने की सिफारिश की। यह नियुक्ति केवल संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के लिए एक तीखा राजनीतिक संदेश भी मानी जा रही है, जो चुनावी हार और पार्टी के भीतर बढ़ती आलोचनाओं से पहले से जूझ रहे हैं।
सुधाकरन की नियुक्ति का राजनीतिक संदर्भ
संवैधानिक परंपरा के अनुसार, प्रोटेम स्पीकर का पद विधानसभा के वरिष्ठतम सदस्य को दिया जाता है। जी. सुधाकरन इस कसौटी पर खरे उतरते हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति का राजनीतिक महत्व कहीं अधिक गहरा है। सुधाकरन का माकपा नेतृत्व — और विशेष रूप से पिनाराई विजयन — से वर्षों पुराना टकराव रहा है।
उन्होंने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार को दरकिनार कर अंबालापुझा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनकी यह जीत माकपा के भीतर आंतरिक लोकतंत्र के कमजोर होने के विरुद्ध खुले विरोध का प्रतीक थी।
विजयन के लिए प्रतीकात्मक झटका
केरल की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पिनाराई विजयन 21 मई को विधानसभा के पहले सत्र में अपने पूर्व कैबिनेट सहयोगी और अब खुले राजनीतिक आलोचक बन चुके सुधाकरन के सामने विधायक पद की शपथ लेने पहुँचेंगे।
राजनीतिक हलकों में इसे विजयन के लिए गहरी असहजता का क्षण बताया जा रहा है। पार्टी और सरकार पर लौह-पकड़ की छवि वाले नेता के लिए यह घटनाक्रम बड़ा प्रतीकात्मक क्षरण माना जा रहा है।
विजयन का संभावित विकल्प
सूत्रों के अनुसार, विजयन 21 मई के पहले दिन के शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित नहीं हो सकते और बाद में स्थायी स्पीकर के सामने शपथ ले सकते हैं। विधानसभा नियमों के तहत यह व्यवस्था उपलब्ध है — यदि कोई सदस्य पहले दिन प्रोटेम स्पीकर के समक्ष शपथ नहीं लेता, तो वह निर्वाचित स्पीकर के सामने बाद में शपथ ले सकता है।
बताया जा रहा है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन को 22 मई को स्थायी स्पीकर चुना जा सकता है।
माकपा में बढ़ती दरारें
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब माकपा की जिला समिति बैठकों में पार्टी की चुनावी हार को लेकर विजयन और शीर्ष नेतृत्व की तीखी आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि सुधाकरन को प्रोटेम स्पीकर बनाए जाने से माकपा को राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक — दोनों स्तरों पर — गहरा आघात पहुँचा है।
गौरतलब है कि सतीशन सरकार ने विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले ही विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। 16वीं केरल विधानसभा का पहला सत्र केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि माकपा के भीतर बढ़ती दरारों और विजयन की कमजोर पड़ती राजनीतिक पकड़ की सार्वजनिक अभिव्यक्ति बनता दिख रहा है।