नीट विरोध मामले वापस लेगी केरल सरकार: गृह मंत्री रमेश चेन्निथला का बड़ा ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने 31 जुलाई 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए राज्यव्यापी प्रदर्शनों से जुड़े सभी पुलिस मामले वापस लेगी। ये प्रदर्शन दिल्ली में चल रहे नीट-विरोधी आंदोलन के समर्थन में आयोजित किए गए थे।
मामले वापसी का फैसला क्यों लिया गया
चेन्निथला ने बताया कि विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन, तुषार गांधी और अन्य प्रमुख हस्तियों ने मुख्यमंत्री तथा गृह विभाग को मुकदमे वापस लेने की माँग करते हुए अभ्यावेदन सौंपे थे। इन अभ्यावेदनों पर कार्रवाई करते हुए उन्होंने राज्य पुलिस प्रमुख (एसपीसी) को इन मामलों में आगे कोई कार्रवाई न करने का निर्देश दिया।
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया, "ये सामान्य कानून-व्यवस्था के मामले हैं। इनमें कोई गंभीर हिंसा या अत्याचार नहीं हुआ। यहाँ तक कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाया है, इसलिए इन मामलों को आगे बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है।"
ऑपरेशन तूफान: जेलों में नशे के खिलाफ अभियान
चेन्निथला ने यह भी घोषणा की कि पुलिस और जेल विभागों ने संयुक्त रूप से 'ऑपरेशन तूफान' शुरू किया है — यह जेलों के भीतर नशीले पदार्थों की तस्करी और सेवन के खिलाफ राज्यव्यापी कार्रवाई है। खुफिया जानकारी मिलने के बाद कि कुछ कैदी जेल परिसर में नशीली दवाओं का सेवन और तस्करी कर रहे थे, तड़के 2 बजे छापेमारी शुरू हुई और जेलों में लगातार जारी रही। उन्होंने चेतावनी दी कि इसमें संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों तक ड्रग्स पहुँचाने की चिंता
ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं के ज़रिए छात्रों को नशीले पदार्थ पहुँचाने की खबरों पर गहरी चिंता जताते हुए चेन्निथला ने इस प्रवृत्ति को 'बेहद गंभीर' बताया। कोझिकोड के हालिया पेरामब्रा मामले का उल्लेख करते हुए — जिसमें कथित तौर पर तीन महिला शिक्षिकाओं और एक डिलीवरी एक्जीक्यूटिव पर संदेह जताया गया है — उन्होंने डिलीवरी कर्मियों से अपील की कि वे नशीले पदार्थों की तस्करी का माध्यम न बनें। उन्होंने यह भी कहा कि नशे की तस्करी को बढ़ावा देने वाले सोशल मीडिया अभियानों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
पीएम श्री योजना विवाद पर पलटवार
पीएम श्री योजना से जुड़े विवाद पर चेन्निथला ने पिछली एलडीएफ सरकार पर आरोप लगाया कि उसने अपने गठबंधन सहयोगी सीपीआई को सूचित किए बिना और कैबिनेट की मंजूरी लिए बगैर केंद्र के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार इस समझौते से एकतरफा पीछे नहीं हट सकती, क्योंकि इससे केरल को केंद्र से मिलने वाली सहायता बंद हो सकती है। इसके बजाय, सरकार पाठ्यक्रम और स्कूल चयन जैसे मुद्दों पर केंद्र से अधिक लचीलेपन की माँग करेगी।
राज्यसभा सदस्य और सीपीआई (एम) नेता जॉन ब्रिटास पर निशाना साधते हुए चेन्निथला ने सवाल किया कि जब पिछली पिनाराई विजयन सरकार के कार्यकाल में समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, तब उन्होंने आपत्ति क्यों नहीं जताई। उन्होंने कहा कि एलडीएफ अब इस जिम्मेदारी को मौजूदा प्रशासन पर नहीं डाल सकता। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब नीट परीक्षा विवाद को लेकर देशभर में राजनीतिक तापमान ऊँचा बना हुआ है।